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मंत्रिपरिषद के निर्णय - 2003-10

मंत्रिपरिषद के निर्णय- 2003

प्रथम बैठक 17 दिसंबर 2003

 
गरीब किसानों की ऋणमुक्ति, अटल आवास योजना,अन्नापूर्णा दाल-भात केन्द्र

लघु और सीमांत किसानों को प्रति व्यक्ति ढाई हजार रूपये तक के कृषि ऋणों से मुक्ति। यह राशि किसानों के ऋण खाते में समायोजित की जाएगी। इस पर अमल शुरू। राज्य के पांच लाख से अधिक किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से मिलेगा इसका फायदा। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब आदिवासी परिवारों को पांच वर्ष के भीतर गाय देने का फैसला। इसके लिए कार्य योजना तैयार करने का निर्णय। गरीबी रेखा से नीचे के बारहवीं तक शिक्षित बेरोजगारों को अप्रैल 2004 से 500 रूपये प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता। वर्ष 1980 से वन भूमि पर काबिज वनवासियों को जमीन का स्थायी पट्टा दिया जाएगा तथा 1990 से काबिज लोगों के प्रकरण शीघ्र केन्द्र को भेजे जाएंगे। सरकारी स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राओं को दुर्घटना बीमा सुरक्षा कवच। शहरी क्षेत्रों में रहने वाले गरीबी रेखा से नीचे के बेघरों को अटल आवास योजना के अंतर्गत सिर्फ दस रूपये की रोजाना किश्त पर दिए जाएंगे अच्छे, पक्के और सस्ते मकान। गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय। यदि मौजूदा कानून प्रभावी नहीं होगा तो नया कानून भी बनाया जाएगा। गौ शालाओं की स्थिति बेहतर बनाने के लिए उन्हें हरसंभव सहयोग। राज्य के ब्लॉक मुख्यालयों और अन्य प्रमुख शहरों में गांवों से आने वाले जरूरतमंद लोगों को सिर्फ पांच रूपये में भरपेट भोजन की सुविधा देने अन्नपूर्णा दाल-भात केन्द्रों की योजना शुरू करने का निर्णय। ग्रामीण जनता की विभिन्न समस्याओं के समयबध्द निराकरण के लिए सभी हजार से अधिक ग्राम  पचायत में ग्रामीण सचिवालय और 146 विकासखण्ड मुख्यालयों में ब्लॉक सचिवालय शुरू करने का फैसला। आदिवासी क्षेत्रों में गरीबी रेखा के नीचे परिवारों को सिर्फ पच्चीस पैसे प्रति किलो के रियायती मूल्य पर आयोडिन नमक 'छत्तीसगढ़ अमृत' बांटने की योजना। मंत्रियों के शासकीय वाहनों में लालबत्ती लगाने का निर्णय। संकल्प पत्र के क्रियान्वयन के लिए मंत्रिमण्डल की उप समिति की गठित। गृह मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल इस उप समिति के संयोजक बनाए गए। समिति में वित्त मंत्री श्री अमर अग्रवाल, अनुसूचित जाति-जनजाति मंत्री श्री रामविचार नेताम और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री अजय चन्द्राकर भी शामिल। 

मंत्रिपरिषद के निर्णय- 2004

बीज एवं कृषि विकास निगम का गठन अनुकंपा नियुक्ति के पदों से वृध्दि

01 फरवरी 2004

छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के गठन का फैसला। अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आरक्षित पदों का प्रतिशत बढ़ाने का निर्णय। अब दस प्रतिशत पद आरक्षित रहेंगे। अनुकम्पा नियुक्ति के लिए। सहायक ग्रेड तीन के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति के लिए स्टेनोग्राफी की परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता समाप्त। अनुकम्पा नियुक्ति से संबंधित मामलों का परीक्षण विधि विभाग से करवाया जाएगा। अनुकम्पा नियुक्ति के लिए पात्रता रखने वाले आवेदकों को उनके आवेदन दिनांक से तीन महीने के भीतर नियुक्ति मिल जाए, इसके लिए नियुक्ति प्रक्रिया का सरलीकरण। राज्य में पिछले तीन वर्षों में समर्थन मूल्य नीति के तहत की गयी धान खरीदी के मामले में श्वेत पत्र जारी करने का निर्णय।

 

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहायेग से गाय वितरण

03 सितम्बर 2004

      राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब आदिवासी परिवारों को जनवरी 2005 से गाय वितरण का निर्णय। आदिवासियों की आर्थिक बेहतरी और प्रदेश में दूध का उत्पादन बढ़ााने की महत्वपूर्ण योजना। प्रथम चरण में दस आदिवासी विकासखडों के एक सौ गांवों में शुरू की जाएगी योजना। प्रत्येक चयनित गांव में आदिवासियों की सहकारी समिति बनाकर और उन्हें गाय देकर दूध के व्यवसाय से जोड़ने का लक्ष्य। योजना का क्रियान्वयन राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहायोग से करने का निर्णय। इसके लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ होगा विधिवत समझौता। योजना के लिए राज्य सरकार के चालू वित्तीय वर्ष के बजट में 25 करोड़ रूपए का प्रावधान। हितग्राहियों का चयन जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित चयन समिति द्वारा किया जाएगा। चयनित हितग्राहियों से गाय का दूध रायपुर दुग्ध संघ द्वारा खरीदा जाएगा। रायपुर दुग्ध संघ का संचालन राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा किया जा रहा है। योजना के तहत राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मिल्क रूट वाले विकास खंडों के चयन का निर्णय। बोर्ड रायपुर में दुग्ध संग्रहण के लिए एक बड़ा शीत संयंत्र (चिलिंग प्लांट) लगाएगा। निजी क्षेत्र में दूध संग्रहण के लिए चिलिंग प्लांट लगाने पूंजी निवेशकों को मिलेगी राज्य सरकार से नि:शुल्क जमीन और विद्युत शुल्क में पचास प्रतिशत की विशेष छूट। राज्य में लगभग 18 हजार विभिन्न सहकारी समितियों का चुनाव कराने का फैसला। सहकारिता अधिनियम में संशोधन के लिए गठित समिति की रिपोर्ट पर विचार-विमर्श के बाद लिया गया निर्णय।   

 

आम आदमी को कीमतों में राहत गृह निर्माण मंडल का गठन, कर्मचारियों को वृत्तिकर में विशेष छूट 

 01 फरवरी 2004

जनता को दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में राहत देने अनेक महत्वपूर्ण फैसेले। वाणिज्यिक टैक्स की दरों के युक्यिुक्तकरण का निर्णय । ये सभी फैसले नये वित्तीय वर्ष 2004-05 में आगामी एक अप्रैल से प्रभावशील होंगे । व्यापारियों को भी इसका लाभ मिलेगा। इससे राज्य में आर्थिक विकास की गति बढ़ेगी। कर अपवंचन की प्रवृत्ति रूकेगी और सरकार का राजस्व बढ़ेगा। इन फैसलों के अनुसार खाद्य तेल और सभी प्रकार के किराना समानों पर वाणिज्यिक कर की प्रचलित दर चार प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत किया गया। प्रदेश के बाहर से आयातित किराना वस्तुओं पर मण्डी टैक्स की दो प्रतिशत की प्रचलित दर अब घटकर 0.5 (दशमलव पांच प्रतिशत), देशी घी, पावडर दूध (मिल्क पावडर), खुली चाय पत्ती और राज्य के अन्दर पैकिंग की गयी चाय पत्ती तथा पके पकाए भोजन (कुक्ड फुड) सहित स्टेशनरी समानों , सिलाई मशीनों हैण्डपम्पा और उसके स्पेयर पार्ट्स , स्पिंकलर सिस्टम और उसके स्पेयर पार्ट्स , कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर , एल्युमिनियम वायर लाईन ट्रांसफार्मर और एस्फालिटक रूफिंग पर वाणिज्यिकर की दरें आठ प्रतिशत से घटाकर चार प्रतिशत करने का निर्णय। एल.पी.जी. रसोई गैस , बेकरी गुड्स, केक पेस्ट्री पर वाणिज्यिक टैक्स की प्रचलित दर अब बारह प्रतिशत से घटकर आठ प्रतिशत। नारियल पर प्रचलित एक प्रतिशत और आयातित आटा, मैदा और सूजी आटा पर प्रचलित पांच प्रतिशत प्रवेश कर समाप्त। अगरबत्ती निर्माण के लिए उपयोगी कच्चे माल पर लागू एक प्रतिशत एन्ट्री टैक्स भी खत्म करने का निर्णय। सिनेमा घरों में प्रदर्शित होने वाले स्लाईड्स और शॉट्स पर विज्ञापन शुल्क समाप्त। व्यापार-व्यवसाय के लिए वाणिज्यिक कर विभाग की लायसेंस प्रक्रिया का सरलीकरण। रेडिमेड और होजियारी वस्तुओं पर लायसेंस शुल्क चार प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत करने का निर्णय । अब पच्चीस लाख रूपए तक वार्षिक टर्न ओव्हर वाले व्यापारियों को त्रैमासिक ब्यौरा प्रस्तुत करने की सुविधा। रोलिंग मिलों में रि-रोल्ड उत्पादों पर प्रांतीय और केन्द्रीय विक्रयकर की दर समान रूप से दो प्रतिशत की गयी। राज्य के लघु उद्योगों में निर्मित माला का इस्तेमाल दूसरे लघु उद्योगों द्वारा निर्माण प्रक्रिया में करने पर उन्हें प्रवेश कर (एंट्री टैक्स) से मुक्ति । महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने एक अहम फैसला । उन्हें बैंकों से ऋण लेने की प्रक्रिया में स्टाम्प शुल्क से मुक्ति।
केबिनेट की उपरोक्त बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य गृह निर्माण मण्डल के गठन का ऐतिहासिक फैसला। गरीबों और निम्न माध्यम वर्गीय परिवारों के लिए उचित मूल्य पर बनाए जाें साफ सुथरे पक्के मकान। विकसित होगी आवासीय कॉलोनियां। शहरी गरीबों के लिए शुरू की गयी अटल आवास योजना के लिए बीस करोड़ रूपए मंजूर। प्रथम चरण में राज्य भर में बनेंगे साढ़े तीन हजार मकान। प्रत्येक मकान की लागत सिर्फ साठ हजार रूपए। इसमें भी हितग्राहियों को मिलेगा पचास प्रतिशत का सरकारी अनुदान, अर्थात तीस हजार रूए की विशेष छूट । हितग्राही को सिर्फ तीस हजार रूपए में मिलेगा मकान। यह राशि सिर्फ दस रूपए की दैनिक किश्त (अथवा तीन सौ रूपए मासिक) के हिसाब से पन्द्रह साल में जमा करने की सुविधा। किसानों को 31 मार्च तक बकाया सिंचाई टैक्स की साठ प्रतिशत राशि जमा करने पर मिलेगी चालीस प्रशितत की विशेष रियायत। सरकारी कर्मचारियों के मंहगाई भत्ते में तीन प्रतिशत वृध्दि। अब उन्हें मिलेगा पचपन प्रतिशत महंगाई भत्ता मंत्रालयीन कर्मचारियों को मिलने वाला पच्चीस रूपए का मंत्रालयिन भत्ता बढ़ाकर पैंतीस रूपए किया गया। शासकीय कर्मचारियों को वृत्तिकर (प्रोफेशनल टैक्स) में विशेष राहत। इसके लिए वार्षिक आमदनी की सीमा एक लाख रूपए से बढ़ाकर डेढ़ लाख रूपए की गयी। राज्य के एक लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा इसका फायदा। शिक्षाकर्मियों के लिए तबादला नीति का सरलीकरण। पति-पत्नी दोनों शिक्षाकर्मी हैं तो उन्हें एक ही स्थान पर एक साथ कार्य करने की सुविधा, लेकिन इसके लिए पंचायती राज संस्थाओं की सहमति जरूरी। दिवंगत शिक्षा कर्मियों के आश्रितों को भी मिलेगी अनुकम्पा नियुक्ति। इसके लिए न्यूनतम योग्यता नहीं होने की स्थिति में आवेदक को तीन साल के भीतर योग्यता हासिल करने की सुविधा। शिक्षा कर्मियों के मासिक मानदेय में एक सौ रूपए की वृध्दि।      

 

    आदिवासी क्षेत्रों में गरीबों को सिर्फ 25 पैसे में आयोडिन नमक

       7 जनवरी 2004

स्कूली बच्चों को बांटे गए बस्तों में लगाई जाएगी महान दार्शनिक स्वामी विवेकानंद की तस्वीर। आदिवासी क्षेत्रों में सात लाख से अधिक गरीब परिवारों को 26 जनवरी 2004 से उचित मूल्य की दुकानों के जरिए दिया जाएगा सिर्फ पच्चीस पैसे प्रतिकिलो की दर से आयोडिन नमक 'छत्तीसगढ़ नमक'। सभी 85 आदिवासी विकासखंडों को इस योजना में शामिल करने का निर्णय।   

 

     राज्य प्रशासनिक अकादमी का गठन

09 जून 2004

आदिवासी बहुल बस्तर क्षेत्र के 253 आश्रम स्कूलों को फिर से शुरू करने का फैसला। इन्हें पूर्ववर्ती सरकार ने बंद करवा दिया था। बस्तर विकास प्राधिकरण ने इन्हें फिर से शुरू करने का प्रस्ताव पारित किया था, जिसे केबिनेट ने अनुमोदित कर दिया। फिर से शुरू होने वाले आश्रम स्कूलों में दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) जिले के 177 प्राथमिक और दो मिडिल स्कूल (आश्रम) और बस्तर (जगदलपुर) जिले के 74 प्राथमिक स्कूल शामिल। कार्यपालिक अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए राज्य प्रशासन अकादमी के गठन का निर्णय। फिलहाल इसके लिए दो करोड़ रूपए का प्रावधान, अतिरिक्त राशि बारहवें वित्त आयोग से प्राप्त करने का प्रयास।

      

छत्तीसगढ़ की आकर्षक नई उद्योग नीति

9 नवम्बर 2004

     राज्य की नयी उद्योग-नीति का अनुमोदन। यह पंचवर्षीय औद्योगिक नीति एक नवम्बर 2004 से 31 अक्टूबर 2009 तक प्रभावशील। प्रदेश के औद्योगिक विकास में तेजी लाने और पूंजी निवेश बढ़ाने के उद्देश्य से निवेशकों के लिए विभिन्न सुविधाओं के साथ अनेक नए और आकर्षक प्रावधान। नयी उद्योग-नीति में छत्तीसगढ़ के मूल-निवासियों को रोजगार की गारंटी देने की विशेष व्यवस्था। प्रत्येक उद्योग में कम से कम नब्बे प्रतिशत अकुशल श्रमिक और पचास प्रतिशत कुशल श्रमिक तथा तकनीशियन छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों में से रखना अनिवार्य। इसी तारतम्य में कम से कम एक तिहाई प्रशासकीय पद भी राज्य के मूल निवासियों के लिए आरक्षित रहेंगे। स्थानीय मूल निवासियों को इन प्रावधानों के तहत रोजगार देने पर ही उद्योगों को मिलेगा शासकीय सीमा पांच लाख रूपए से बढ़ाकर दस लाख रूपए करने का निर्णय। यह विशेष रियायत पांच वर्ष के लिए होगी, जबकि आदिवासी बहुल पिछड़े जिलों-बस्तर, कांकेर, दंतेवाड़ा, सरगुजा, जशपुर और कोरिया में थ्रस्ट सेक्टर के लघु उद्योगों के लिए ब्याज अनुदान की या अधिकतम समय-सीमा पांच वर्ष से बढ़ाकर सात वर्ष करने का फैसला। राज्य के आदिवासी बहुल पिछड़े जिलों में लघु उद्योग लगाने पर मिलेगा अधिकतम पैंतीस लाख रूपए का अनुदान। सामान्य जिलों में भी अब पूंजी निवेश अनुदान की एक नई व्यवस्था। इन जिलों में लघु उद्योग लगाने पर अधिकतम पच्चीस लाख रूपए का अनुदान मिलेगा। आदिवासी बहुल पिछड़े जिलों में अधोसंरचना लागत अनुदान दस प्रतिशत से बढ़ाकर पच्चीस प्रतिशत किया गया। सामान्य जिलों में भी सर्वोच्च प्राथामिकता वाले क्षेत्रों (थ्रस्ट सेक्टर) के लघु उद्योगों के लिए विद्युत शुल्क में छूट अब दस वर्ष से बढ़कार पन्द्रह वर्ष। वर्तमान में लघु उद्योगों को प्रवेश कर  में पांच वर्ष की छूट को बढ़ाकर सात वर्ष करने और थ्रस्ट सेक्टर के लघु उद्योगों के लिए नौ वर्ष करने का निर्णय। सामान्य जिलों में स्थाई पूंजी निवेश पर अब तक अनुदान की व्यवस्था नहीं थी। अब इन जिलों में थ्रस्ट सेक्टर लघु उद्योगों के लिए स्थाई पूंजी निवेश के पच्चीस प्रतिशत (अधिकतम पच्चीस लाख रूपए) के अनुदान का प्रावधान। आदिवासी बहुल पिछड़े जिलों में इस अनुदान की अधिकतम सीमा पैंतीस लाख रूपए होगी। लघु उद्योगों में अनुसूचित जाति और आदिवासी वर्ग के निवेशकों को सावधि ऋण और कार्यशील पूंजी पर अब केवल एक प्रतिशत ब्याज वहन करना होगा। जबकि अधिकतम दस प्रतिशत की सीमा तक शेष ब्याज की प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा की जाएगी। मध्यम श्रेणी के उद्योगों को सामान्य जिलों में थ्रस्ट सेक्टर के उद्योगों के लिए मिलेगा पांच वर्ष तक अधिकतम बीस लाख रूपए का वार्षिक ब्याज अनुदान। आदिवासी बहुल पिछड़े जिलों में उन्हें सात वर्ष कर मिलेगी यह सुविधा। राज्य में एक सौ करोड़ से एक हजार रूपए तक निवेश वाले वृहद उद्योगों के लिए अधोसंरचना लागत और सकल पूंजी लागत का पैंतालिस प्रतिशत अनुदान, जो अब तक पच्चीस प्रतिशत था। अब छत्तीसगढ़ में सभी प्रकार के उद्योगों को भूमि अर्जन पर सिर्फ पन्द्रह प्रतिशत सेवा शुल्क देना होगा। अब तक उनसे जमीन के मूल्य के पैंतीस प्रतिशत के बराबर यह शुल्क लिया जा रहा था। अप्रवासी भारतीयों और शत-प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ.डी.आई.) वाले निवेशकों को सामान्य निवेशकों को तुलना में पांच प्रतिशत अधिक छूट और रियायतें दी जाएगी। राज्य की तेन्दूपत्ता नीति पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी जारी रहेगी। बस्तर विकास प्राधिकरण के कार्यक्षेत्र में भानुप्रतापपुर, चारामा, दंतेवाड़ा गीदम, सुकमा सहित कुल सात शहरों में नागरिकों को बांस बल्ली निस्तारी दरों पर उपलब्ध कराने का फैसला।
     
     

बस्तर, सरगुजा'जशपुर विकास प्राधिकरणों का गठन

       11 मई 2004

छत्तीसगढ़ मंत्रि परिषद की बैठक नई दिल्ली में आयोजित। आदिवासी बहुल पिछड़े इलाकों बस्तर और सरगुजा-जशपुर के समग्र विकास के लिए दो विशेष प्राधिकरणों का गठन। मुख्यमंत्री स्वयं होंगे इन दोनों प्राधिकरण्ाों के अध्यक्ष। इनमें राज्य शासन के सभी विभागों के मंत्री, क्षेत्रीय सांसद संबंधित क्षेत्रों के सभी विधायक और जिला पंचायतों के पदाधिकारी शामिल रहेंगे। बस्तर विकास प्राधिकरण में क्रमश: उत्तर बस्तर (कांकेर) दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) और बस्तर (जगदलपुर) जिले शामिल। सरगुजा-जशपुर विकास प्राधिकरण में क्रमश: सरगुजा, कोरिया और जशपुर जिले सम्मिलित। मुख्यमंत्री इन प्राधिकरणों की त्रैमासिक बैठक लेंगे, जबकि मुख्य सचिव हर महीने करेंगे प्राधिकरणों के काम काज की समीक्षा। गरीबों के लिए 'छत्तीसगढ़ अमृत' नमक वितरण योजना का विस्तार आगामी 15 अगस्त 2004 से संपूर्ण छत्तीसगढ़ में गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को सिर्फ 25 पैसे प्रति किलो की दर से आयोडिन नमक बांटने की यह योजना 26 जनवरी 2004 को 85 आदिवासी विकास खण्डों में शुरू की गयी थी।
     

 

      रायपुर विकास प्राधिकरण के पुनर्गठन का फैसला

       11 अगस्त 2004

शहरों में रहने वाले कम आमदनी वाले परिवारों के लिए शुरू होगी दीनदयाल आवास योजना। इसके तहत सुव्यवस्थित कॉलोनियां बनेगी, जिनमें प्रथम चरण में दो वर्ष के भीतर दस हजार मकान बनवाए जाएंगे। इसके लिए गृह निर्माण मंडल को दी जाएगी नोडल-एजेंसी की जिम्मेदारी। प्रत्येक मकान दो लाख रूपए की लागत का होगा। रायपुर विकास प्राधिकरण का पुनर्गठन। इसे पूर्ववर्ती सरकार द्वारा ढाई साल पहले विघटित करके इसका विलय नगर निगम में कर दिया गया था। राज्य के सोलह अशासकीय कालेजों को चालू वित्तीय वर्ष में अस्सी प्रतिशत और आगामी वित्तीय वर्ष से शत-प्रतिशत अनुदान। किसानों के हित में एक और महत्वपूण फैसला निजी-भूमि पर खड़े बबूल के पेड़ों को निजी उपयोग के लिए काटने पर परिवहन परमिट की अनिवार्यता समाप्त। नीलगिरी के दस वर्ष तक आयु वाले पेड़ों की कटाई के लिए परिवहन परमिट का प्रस्ताव वन विभाग से लेकर ग्राम पंचायतों को देने का निर्णय। राज्य के पंजीकृत लघु उद्योगों को बढ़ावा देने की सार्थक पहल। राज्य शासन की भंडार क्रय सूची में लघु उद्योगों में निर्मित इक्कीस नयी वस्तुएं शामिल। इन वस्तुओं के अंतर्गत नि:शक्तजनों के इस्तेमाल योग्य कृत्रिम अंगों, सहायक उपकरणों सहित स्लेट पट्टी, पेंसिल आयल चाक, टूल किट, बिजली घरों की उड़न राख (फ्लाई क्लचर-आयटम), क्लोरिन टेबलेट, रबर निर्मित हौज-पाईप, ट्री-गार्ड, लकड़ी से निर्मित ठेला, रोल-अप बोर्ड, टीन-स्लेट, डस्टर आदि सम्मिलित।


     
     
नगर पंचायतों के चुनाव भी दलीय आधार पर विचारधीन बंदियों की पेशी वीडियों कॉन्फ्रेसिंग के जरिए

       12 अक्टूबर 2004

नगर निगमों और नगरपालिकाओं की तरह पंचायतों के चुनाव भी होंगे दलीय आधार पर। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी अब एक नवंबर से एक फरवरी 2005 तक। पहले 25 अगस्त की केबिनेट में एक नवम्बर से 31 जनवरी तक धान खरीदी का निर्णय लिया गया था। विचाराधीन बंदियों की पेशी अब वीडियों कॉन्फ्रेसिंग के जरिए कराने का निर्णय। इसके लिए मौजूदा सी.आर.पी.सी. की कुछ धाराओं में संशोधन का प्रस्ताव अनुमोदित। इसे औपचारिक स्वीकृति के लिए केन्द्र सरकार को भेजा जाएगा। पहला प्रयोग केन्द्रीय जेल रायपुर में करने की मंशा। गुजरात, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्यप्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ होगा देश का छठवां ऐसा राज्य। राज्य के औद्योगिक विकास के लिए निजी पूंजी निवेश को बढ़ावा देने राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड के नियमों में कुछ संशोधन। अब दस करोड़ रूपए तक के निवेश प्रस्ताव जिला स्तरीय समितियों को दिए जा सकेंगे। इससे अधिक राशि के निवेश प्रस्ताव राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड में प्रस्तुत किए जाएंगे। निवेशकों को जमीन, विद्युत कनेक्शन जादि जरूरी सुविधा उपलब्ध कराने आवेदन पत्रों का निबटारा एक साथ करने एकल खिड़की प्रणाली लागू करने का फैसला। इसके लिए अध्यादेश जारी किया जाएगा। आत्म समर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए पुनर्वास नीति में संशोधन का निर्णय। पुनर्वास के लिए नब्बे दिनों की समय सीमा निर्धारित। हथियारों के साथ समर्पण करने वाले नक्सलियों को नगद राशि देने की व्यवस्था। एल.एम.जी.के लिए तीन लाख रूपए, ए.के. 47 के लिए दो लाख रूपए, एस.ल.आर. के लिए एक लाख रूपए और 303 बोर की बन्दूक के साथ समर्पण करने पर 50 हजार रूपए। नक्सलियों से पीड़ित व्यक्तियों को चल-अचल सम्पत्ति के नुकसान पर दी जाने वाली मुआवजा राशि भी बढ़ाने का फैसला।   
 

 

      निजी विश्वविद्यालयों के लिए नियामक आयोग

       20 जनवरी 2004

· वनवासियों को तेन्दूपत्ते का सम्मानजनक और लाभदायक मूल्य दिलाने का फैसला- प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के संग्रहण केन्द्रों (फड़ों) में तेन्दूपत्ते की बिक्री हरे पत्ते के रूप में करने का निर्णय। संग्रहण (तोड़ाई) कार्य पहले की तरह जारी रहेगा। निजी विश्वविद्यालय के काम-काज पर निगाह रखने और छात्र-छात्राओं के हित में उनका सुचारू संचालन सुनिश्चित करने निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग बनाने का फैसला। निजी विश्वविद्यालयों से संबंधित नियम-कानून बनाने सुझाव देने के उद्देश्य से मंत्रिमण्डल उप समिति का गठन। इसमें शिक्षा मंत्री , संसदीय कार्यमंत्री , कानून मंत्री , आदिम जाति विकास मंत्री और गृह मंत्री सदस्य के रूप में शामिल। राज्य में लगाए जाने वाले एक सौ करोड़ रूपए तक की पूंजी वाले उद्योगों को अब शत-प्रतिशत ब्याज पर जमीन दी जाएगी। पहले उन्हें 50 प्रतिशत प्रब्याजी पर जमीन आवंटित की जा रही थी। अब ऐसे उद्योग जो अपनी फैक्ट्री में पचास प्रतिशत तकनीकी कर्मचारी और 80 प्रतिशत अकुशल मजदूर के रूप में छत्तीसगढ़ के लोगों को रोजगार देंगे, उन्हें नियमों का पालन करने पर तीन वर्ष बाद पचास प्रतिशत प्रब्याजी वापस कर दी जाएगी। नियमों का पालन नहीं होने पर यह प्रब्याजी जब्त कर ली जाएगी।       
20 मई 2004
      

नि:शक्तजनों के लिए वित्त विकास निगम बहादुर बच्चों के लिए राज्य वीरता पुरस्कार

      
राज्य के लगभग साढ़े तीन लाख नि:शक्तजनों को स्व-रोजगार के लिए सहायता देने पांच करोड़ रूपए की अंश पूंजी से छत्तीसगढ़ नि:शक्तजन वित्त एवं विकास निगम के गठन का निर्णय। केरल और महाराष्ट्र के बाद छत्तीसगढ़ भारत का तीसरा राज्य, जहां नि:शक्तजनों के लिए अलग से वित्त एवं विकास निगम का गठन किया गया। निगम का गठन कम्पनी अधिनियम 1956 के तहत एक जन-कल्याणकारी संस्था के रूप में । बारिश पर आधारित खेती वाले इलाकों में उपलब्ध पानी और भूमिगत जल के बेहतर इस्तेमाल के लिए जलग्रहण क्षेत्र विकास प्रकोष्ठ का गठन। विभिन्न विभागों की जल ग्रहण (वाटर शेड) विकास परियोजनाओें के सुचारू संचालन के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय का काम करेगा या प्रकोष्ठ। ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत परियोजनाओं के सुचारू संचालन के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय का काम करेगा यह प्रकोष्ठ। ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत विकास आयुक्त कार्यालय में की जाएगी इसकी स्थापना। उड़ीसा, मध्यप्रदेश और आंध्रप्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ भारत का चौथा राज्य जहां वाटर शेड परियोजनाओं के बेहतर समन्वय, सुचारू संचालन और नियमित पर्यवेक्षण के लिए बनाया गया यह प्रकोष्ठ। छत्तीसगढ़ के बहादुर बच्चों के लिए राज्य वीरता पुरस्कार की स्थापना का निर्णय। इसके लिए हर साल अट्ठारह वर्ष से कम उम्र के पांच बालक-बालिकाओं का चयन छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद के माध्यम से किया जाएगा। असाधारण वीरता, साहस और बुध्दिमता के लिए दिया जाएगा दस हजार रूपए का पुरस्कार। राज्य वीरता पुरस्कार नियम 2004 का अनुमोदन। राज्य शासन की सेवाओं के लिए संविदा नियुक्ति के लिए एकीकृत नियमों का अनुमोदन। सभी विभागों से सीधी भर्ती से संविदा नियुक्ति के लिए वित्त विभाग के परामर्श से मापदंड निर्धारित करके छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (संविदा नियुक्ति) नियम 2004 बनाया गया। इस नियम के अनुसार (संविदा नियुक्ति) नियम 2004 बनाया गया। इस नियम के अनुसार संविदा नियुक्ति सामान्यत: एक बार में एक वर्ष के लिए होगी, जबकि कोई भी संविदा नियुक्ति अधिकतम पांच वर्ष के लिए की जा सकेगी। इनमें आरक्षण नियमों का भी पालन सुनिश्चित किया जाएगा। बस्तर जिले के नारायणपुर में लगभग बीस वर्षों से कार्यरत समाज सेवी संस्था रामकृष्ण मिशन को पूर्व में स्वीकृत वार्षिक अनुदान बाईस लाख रूपए से बढ़ाकर तीस लाख रूपए करने का निर्णय।
     
     

राशन की दुकानें निजी हाथों से वापस

       20 दिसम्बर 2004

सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश 2004 को केबिनेट की मंजूरी। इसके अन्तर्गत उचित मूल्य की दुकाने निजी हाथों में नहीं सौंपने का निर्णय। राज्य की आठ हजार 892 उचित मूल्य दुकानों में से दो हजार 872 दुकानें मास्टर स्कीम 2001 के तहत निजी क्षेत्र में दी गयी थी। इनमें अनियमितताओं की एक हजार 170 शिकायतें मिली है। इन्हें देखते हुए मास्टर स्कीम में संशोधन करके अब निजी क्षेत्र से इन दुकानों को वापस लेकर ग्राम पंचायतों, प्राथमिक सहकारी समितियों, लघु वनोपज सहकारी समितियों, वन सुरक्षा समितियों, महिला स्व-सहायता समूहों, आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों (लैम्प्स) तथा अन्य उपभोक्ता सहकारी समितियों को सौंपने का निर्णय। महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत दुकानें आरक्षित रहेंगी। नवीन व्यवस्था में दुकानों का आवंटन कलेक्टर के अनुमोदन से किया जाएगा। उचित मूल्य दुकानों के लिए निगरानी समिति का भी गठन होगा। केबिनेट में स्वीकृत सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण्ा आदेश 2004 के प्रभावी क्रियान्वयन का मुख्य आधार गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों, अंत्योदय अन्न योजना और अन्नपूर्णा योजना के हितग्राहियों का चिन्हांकन है। केबिनेट द्वारा राज्य खाद्य सुरक्षा कोष बनाने का भी निर्णय।
     

 

      पशु वध निषेध कानून और कठोर बनेगा

       21 नवम्बर 2004

पशु धन के संरक्षण और संवर्ध्दन के लिए पशुवध निषेध कानून को और कठोर बनाया जाएगा। राज्य में गौ-हत्या पर प्रतिबंध के बाद अब बैलों, भैंसों की हत्या पर भी रोक लगाई जाएगी। इसके लिए दो विधेयकों के प्रारूप का अनुमोदन। अनुपयोगी मवेशियों को गौ-शालाओं में रखने के प्रावधान पर भी विचार किया गया। इसके लिए प्रारंभ में सरकार राशि उपलब्ध कराएगी, बाद में एक स्थाई निधि का भी निर्माण किया जाएगा। नगरीय निकायों में लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक सु.ढ़ बनाने नगर पालिका अधिनियम संशोधन विधेयक का प्रारूप भी केबिनेट में अनुमोदित। इसके अंतर्गत नगरीय निकायों के सदस्यों को भी शपथ दिलाने और उन्हें भी लोक आयोग के दायरे में लाने का प्रावधान। नगरीय निकायों को मिलने वाले राजस्व की दस प्रतिशत राशि से वार्डों के विकास के लिए पार्षद निधि बनाने और विकास कार्यों में पब्लिक-प्रायवेट पार्टनरशिप का प्रावधान प्रस्तावित। राज्य में सरकारी उपजाऊ जमीन के समुचित संरक्षण और बेहतर उपयोग के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य भूमि उपयोग बोर्ड गठित करने का निर्णय। कृषि, उद्योग, आवास तथा राजस्व विभागों के मंत्री और सचिव इस बोर्ड में सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे। यह बोर्ड कृषि विभाग के अंतर्गत होगा। बोर्ड अगले पच्चीस वर्षों के लिए भूमि के उपयोग की .ष्टि से एक विशेष योजना प्रस्तावित करेगा। राज्य में आवासीय कॉलोनियों, उद्योगों और कृषि विकास के लिए नए सिरे से योजनाएं बनाई जाएंगी। राज्य सरकार के अनुपूरक बजट का अनुमोदन।           

शिक्षा कर्मियों, संवदिा शिक्षकों, पंचायत कर्मियों के हित में अनेक फैसले

       28 फरवरी 2004

राज्य विद्युत मंडल के एक हजार 158 करोड़ रूपए के बकाया राजस्व की वसूली के लिए तीन महीने का विशेष पैकेज। यह राजस्व भारत-सरकार तथा राज्य शासन के विभिन्न उपक्रमों और स्थानीय निकायों पर बकाया है। इसमें 563 करोड़ रूपए का मूल-धन और 595 करोड़ रूपए का अधिभार शामिल है। पैकेज के तहत बकाया राजस्व अदा करने वाली संस्थाओं से लिया जाने वाला ढाई प्रतिशत सरचार्ज घटाकर सिर्फ एक प्रतिशत किया गया। लंबित मुकदमें वापस लेने और बकाया राजस्व का दो प्रतिशत हिस्सा जमा करने पर मिलेगा इसका फायदा। शिक्षा-कर्मियों की भर्ती के लिए अधिकतम आयु-सीमा  तीस वर्ष से बढ़ाकर पैंतालिस वर्ष करने का फैसला। पंचायत-कर्मियों, शिक्षा-कर्मियों और संविदा शिक्षकों की समस्याओं तथा मांगों पर विचार करने अन्तर विभागीय समिति बनेगी। पंचायत-कर्मियों की सेवा शर्तों का निर्धारण किया जाएगा। संविदा शिक्षकों को बेहतर सुविधाएं देने विचार-विमर्श के लिए विभाग प्रमुख्चा की अध्यक्षता में अलग से बनेगी समिति। इसमें संविदा शिक्षकों के प्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे। राज्य के दस नगर निगम क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम करने और परिवहन व्यवसाइयों  को सुविधा के लिए प्रस्तावित 0056 ट्रांसपोर्ट नगरों को मिलेंगी सभी जरूरी सुविधाएं। सिर्फ एक रूपए प्रति वर्ग फूट की टोकन राशि के साथ विकास शुल्क लेकर आवंटित की जाएगी जमीन। मेहनतकश रिक्श चालकों की सुविधा के लिा राज्य के सभी दस नगर निगम क्षेत्रों में बनावाए जाएंगे रिक्शा-स्टैंड। उनमें पेयजल और छाया के लिए शेड की व्यवस्था रहेगी। इन रिक्शा स्टैडों में सिर्फ पांच रूपए में भरपेट भोजन के लिए खोले जाएंगे अन्नपूर्ण दाल-भात केन्द्र। गोकुल नगरों में दी जाएगी सभी जरूरी सुविधाएं पशु पालकों को इन गोकुल नगरों में प्रति पशु एक एक सौ वर्ग फुट के हिसाब से अधिकतम दस हजार वर्गफुट भूमि दी जाएगी। एक रूपए प्रति वर्ग फुट की टोकन राशि के साथ विकास शुल्क लेकर आवंटित की जाएगी यह जमीन। पशु-पालकों को शेड निर्माण और पशु-बीमा के लिए नगर निगमों के सहयोग से ऋण दिलाया जाएगा। राज्य के दस नगर निगम क्षेत्रों में डेयरियों की सुव्यवस्थित बसाहट के लिए शुरू की गई है यह योजना। पशु-पालकों की आर्थिक बेहतरी और दूध तथा उससे बनने वाले पौष्टिक पदार्थों के उत्पादन को बढ़ावा देने एक महत्वपूर्ण फैसला-राज्य में मिल्क रूट विकसित किए जाएंगे। राष्ट्रीय सम विकास योजना वाले जिलों में से प्रत्येक में कम से कम पच्चीस पशु-धन केन्द्र स्थापित करने का निर्णय। राज्य के दूर-दराज इलाकों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अनाज की नियमित और सुगम आपूर्ति सुनिश्चित करने राज्य में बनेगा राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा कोष। इसके लिए पच्चास करोड़ रूपए का प्रावधान। उचित मूल्य की दुकानों में चावल और गेहूं की मूल्य वृध्दि किए बिना दुकानदारों के कमीशन में वृध्दि करने का निर्णय। लीड सहकारी संस्थाओं की दरों के युक्तियुक्तकरण का फैसला।


           संविदा शिक्षकों का वेतन बढ़ा-पुनर्नियुक्ति भी होगी

       28 जून 2004

राज्य में 21 हजार 973 नये संविदा शिक्षकों की नियुक्ति होगी। वर्तमान में कार्यरत सभी 16 हजार 463 संविदा शिक्षकों को तीन वर्ष की पुनर्नियुक्ति के साथ उनके वेतन में पांच सौ रूपए का इजाफा। संविदा शिक्षकों को तीन वर्ष की पुनर्नियुक्ति के लिए दो वर्ष के भीतर बी.एड या डी.एड. (डिप्लोमा इन एजुकेशन) करना होगा। इसके लिए राज्य शासन द्वारा इंदिरा गांधी मुक्त (ओपन) विश्वविद्यालय सहित रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय तथा बिलासपुर के गुरू घासीदास विश्वविद्यालय से संपर्क करके संविदा शिक्षकों को सुविधा देने के बारे में विचार किया जाएगा। किसानों के हित में दो महत्वपूर्ण फैसले-बकाया सिंचाई टैक्स की साठ प्रतिशत राशि जमा करने पर चालीस प्रतिशत की विशेष छूट का लाभ अब 31 जुलाई तक। इसी तरह लघु और सीमांत किसानों के लिए ढाई हजार रूपए तक ऋण मुक्ति योजना की समय-सीमा भी 31 जुलाई तक बढ़ायी गयी। पहले इन दोनों योजनाओं के लिए अंतिम तारीख 31 मार्च 2004 तय की गयी थी। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण कारीगरों-बढ़ई, बुनकर, लोहार आदि के कला-कौशल को बढ़ावा देने और उन्हें अच्छा बाजार मुहैय्या कराने राज्य हस्त शिल्प विकास बोर्ड गठित किया जाएगा।          

डामर घोटाले पर सख्त कार्रवाई-विधायक निधि की वहाली

       29 जुलाई 2004

डामर घोटाले को राज्य सरकार ने गभीरता से लिया। केबिनेट की बैठक में 165 ठेकेदारों पर कार्रवाई का फैसला। इनमें से चार प्रमुख ठेकेदारों पर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में प्रकरण दर्ज करने और 161 ठेकेदारों से 54 करोड़ रूपए की वसूली का निर्णय। सामान्य प्रशासन विभाग की एक तकनीकी समिति बनाकर इस घोटाले में अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। राज्य में पाठय पुस्तक निगम का गठन किया जाएगा। राजधानी रायपुर से लगभग 20 किलोमीटर दूर मंदिर हसौद के पास ग्राम परसदा में बनेगा विशाल अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम। इसके लिए राज्य सरकार देगी 39 करोड़ रूपए। लगभग अड़तालिस एकड़ के रकबे में दो वर्ष के भीतर इसे बनाने का लक्ष्य। इसके लिए खेल मंत्री की अध्यक्षता में निर्माण समिति का गठन। विधायकों के लिए विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना फिर से शुरू करने का निर्णय। पूर्ववर्ती सरकार ने इसे बंद कर दिया था। अब इस योजना के तहत विधायक अपने क्षेत्र के विकास के लिए प्रति वर्ष 20 लाख रूपए तक के कार्यो की अनुशंसा कर सकेंगे, जबकि दस-दस लाख रूपए के कार्य प्रभारी मंत्रियों द्वारा स्वीकृत होंगे।        

प्राकृतिक विपदा पीड़ितों के लिए राहत राशि में ढाई गुना वृध्दि

       29 सितम्बर 2004

प्राकृतिक विपदा पीड़ित परिवारों के लिए राहत राशि में ढाई गुना वृध्दि। इसके लिए राजस्व पुस्तक परिपत्र के प्रावधानों में संशोधन किया जाएगा। प्राकृतिक विपदाओं में मारे गए लोगों के आश्रित परिवारों को प्रति परिवार राहत राशि बीस हाजर रूपए से बढ़ाकर पचास हजार रूपए करने का फैसला। किसी आपदा में विकलांग हुए व्यक्तियों के लिए मुआवजा राशि अब दस हजार से बढ़ाकर पच्चीस हजार रूपए की जाएगी। मकान क्षतिग्रस्त होने पर अब अधिकतम दस हजार रूपए का मुआवजा जो पहले केवल चार हजार रूपए मिलता था। फसल क्षतिग्रस्त होने पर मुआवजा राशि प्रति हेक्टेयर छह सौ रूपए से बढ़कर एक हजार रूपए। सरकारी कर्मचारियों को एक अक्टूबर 2004 से मिलेगा चार प्रतिशत अतिरिक्त महंगाई भत्ता। अब महंगाई भत्ता बढकार 59 प्रतिशत। इसके लिए राज्य सरकार हर साल खर्च करेगी 52 करोड़ रूपए। मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, मुख्य सचिव और वित्त सचिव के साथ कर्मचारी संगठनों की बातचीत के बाद राज्य सरकार ने लिया निर्णय। केबिनेट की बैठक में राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए केन्द्र की तरह अंशदायी पेंशन योजना प्रारभ करने का निर्णय। यह योजना एक अक्टूबर 2004 के बाद नियुक्त होने वाले कर्मचारियों के लिए। इस योजना में कर्मचारी के वेतन से दस प्रतिशत राशि अंशदान के रूप में ली जाएगी, जबकि इतनी ही  राशि राज्य सरकार  भी देगी। दोनों के अंशदान से निर्मित होने वाले कोष से रिटायर्ड कर्मचारियों को दी जाएगी पेंशन।  यह नयी पेंशन योजना नगरीय निकायों और निगम मंडलों में भी लागू होगी। सचिवों और उनसे वरिष्ठ अधिकारियों सहित पुलिस और प्रशासन के मैदानी अधिकारी भी अपनी सरकारी गाड़ियों में लगाएंगे पीली बत्ती। केबिनेट का अनुमोदन।        

किसानों को नई सौगात-सिर्फ नौ प्रतिशत ब्याज पर ऋण

       29 अक्टूबर 2004

छत्तीसगढ़ के मेहनतकश किसानों को राज्य निर्माण की चौथी वर्षगांठ (एक नवम्बर 2004) पर मिलेगी एक महतवपूर्ण सौगात। राज्य की प्राथमिक सहकारी समितियों के ग्यारह लाख सदस्य किसानों को सिर्फ नौ प्रतिशत ब्याज पर मिलेगा कृषि ऋण इतने कम ब्याज पर किसानों को ऋण दिलाने वाला भारत का पहला और अकेला राज्य है छत्तीसगढ़। इतने कम ब्याज पर ऋण देने पर सहकारी बैकों को होने वाले आर्थिक नुकसान की प्रतिपूर्ति के लिए राज्य सरकार देगी बारह करोड़ रूपए। ऋण लेने के लिए दस्तावेज पर लगने वाले पचास रूपए के स्टाम्प शुल्क की अनिवार्यता भी समाप्त। किसानों को सिंचाई पम्प कनेक्शनों पर मिलने वाला अनुदान अब तीस हजार रूपए से बढ़ाकर चालीस हजार रूपए करने का फैसला। प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों में तेन्दूपत्ता संग्राहकों को वर्ष 2003 के लाभांश का वितरण एक नवम्बर 2004 से (राज्योत्सव के मौके पर) प्रारंभ करने का निर्णय। पूरे राज्य में लगभग 36 करोड़ रूपए का लाभांश मिलेगा वनवासियों को। गृह निर्माण सहकारी समितियों के लिए लागू होंगे नये नियम। अब कॉलोनाईजरों से गरीबों के लिए पन्द्रह प्रतिशत जमीन लेने के बजाय वसूल किया जाएगा आश्रय शुल्क। इससे राज्य सरकार को हर साल मिलेगा पन्द्रह करोड़ रूपए का राजस्व। इस राशि से सरकार बनवाएगी गरीबों के लिए मकान। अब किसी भी कॉलोनी का नक्शा ले-आऊट पास करने के लिए अथवा संबंधित कॉलोनाईजर द्वारा आश्रय शुल्क जमा करना अनिवार्य। यह शुल्क पूरी कालोनी के लिए प्रस्तावित जमीन पर निर्धारित दर से लिया जाएगा। राशि स्थानीय निकायों में जमा की जाएगी। किसानों के हितों को ध्यान में रखकर लेव्ही नीति में संशोधन की स्वीकृति। राईस मिलरों से ली जाने वाली लेव्ही पांच अनुपात तीन के बजाए अब पांच अनुपात पांच के हिसाब से ली जाएगीं अर्थात मिलिंग के लिए जितना धान राईस मिलरों को दिया जाएगा, सरकार उसकी बराबर मात्रा में लेव्ही लेगी। लेव्ही ज्यादा लेने से अब व्यापारी किसानों से सीधे धान खरीद सकेंगे। इससे किसानों को उनकी उपज का ज्यादा मूल्य प्राप्त हो सकेगा। यदि व्यापारी नहीं खरीदेंगे तो किसानों का धान समर्थन मूल्य पर सरकार तो खरीदेगी ही । राज्य में खनिजों के संतुलित दोहन के लिए खनन कार्य निजी क्षेत्र के लिए खोलने का ऐतिहासिक निर्णय। राज्य सरकार और संयुक्त क्षेत्र की भागीदारी से होने वाले खनन कार्य में सरकार की भागीदारी कम से कम छब्बीस प्रतिशत और अधिकतम पचास प्रतिशत होगीं छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम (सी.एम.डी.सी) की भूमिका का विस्तार किया जाएगा। राज्य सरकार के इस सार्वजनिक उपक्रम द्वारा अब कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साईट, कोरण्डम, टिन-अयस्क, हीरा और अन्य बहुमूल्य खनिजों के उत्खनन लायसेंस और पट्टे भी लीज पर प्राप्त किए जाएंगे। निगम द्वारा अपने लीज (पट्टे) की खदानों में निजी कम्पनियों को ठेका देकर या उनके साथ संयुक्त उपक्रम बनाकर खनिजों का उत्पादन किया जा सकेगा। इस निर्णय पर अमल के लिए निगम द्वारा तीन वर्ष की मध्यम अवधि कार्य योजना और दस वर्ष की दीर्घकालीन कार्य योजना तैयार की जाएगी। अभी तक सिर्फ खनिजों की रायल्टी से ही राज्य को राजस्व मिलता है, जबकि इस निर्णय पर अमल शुरू होने पर उत्खनन कार्य से भी प्रदेश सरकार को अच्छी आमदनी हो सकेगी।           

राज्य सरकार खोलेगी तीन नए विश्वविद्यालय

       29 नवम्बर 2004

राज्य शासन द्वारा खोले जाएंगे तीन नये विश्वविद्यालय-स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता और जन-संचार विश्वविद्यालय तथा पंडित सुन्दरलाल शर्मा खुला (ओपन) विश्वविद्यालय अगले शिक्षा सत्र से प्रारंभ करने का लक्ष्य। स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय से राज्य के सभी इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों तथा फार्मेसी महाविद्यालयों को सम्बध्द किया जाएगा। इसका मुख्यालय भिलाई में होगा। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता और जन-संचार विश्वविद्यालय की स्थापना रायपुर में की जाएगी। पंडित सुन्दरलाल शर्मा खुला विश्वविद्यालय बिलासपुर में स्थापित किया जाएगा। इन विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए विधेयक का प्रारूप अनुमोदित इन्हें मिलाकर राज्य में सरकारी क्षेत्र में विश्वविद्यालयों और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर, गुरू घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर और इंदिरा संगीत एवं कला विश्वविद्यालय खैरागढ़ में संचालित है।

मंत्रिपरिषद के निर्णय-2005

     बायोफ्यूल  प्राधिकरण बनेगा दस लाख हेक्टेयर में होगी रतनजोत, करंज की खेती

      12 जनवरी 2005

डीजल के विकल्प के रूप में प्रदूषण रहित बायोडीजल के उत्पादन को बढ़ावा देने राज्य बायोफ्यूल प्राधिकरण में बनेगा। मुख्य सचिव इसके अध्यक्ष होंगें। राज्य में वर्ष 2012 तक लगभग दस लाख हेक्टेयर में रतनजोत, करंज आदि ऐसे पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, जिनसे बायोडीजल प्राप्त किया जा सकेगा। लगभग चार लाख किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा, जबकि दस लाख लोगों को रोजगार भी उपलब्ध हो सकेगा। इससे राज्य की हरियाली में लगभग पन्द्रह प्रतिशत की वृध्दि होगी। किसानों को टे्रक्टर, सिंचाई पम्प आदि के लिए सस्ती दर पर प्रदूषणरहित डीजल (बायोडीजल) मिल सकेगा। इसी खेती के लिए किसानों और निजी क्षेत्र के लोगों को खाली बंजर जमीन भी उपलब्ध कराने का निर्णय। छत्तीसगढ़ वर्ष 2005 में ही बायोडीजल के उत्पादन की स्थिति में आ जाएगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाले राज्य बायोफ्यूल प्राधिकरण में प्रमुख सचिव या सचिव स्तर के समकक्ष एक विशेषज्ञ अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। इस प्राधिकरण में वित्त, पंचायत और ग्रामीण विकास, राजस्व, आदिम जाति विकास विभाग और बायोटेक्नालॉजी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे। केबिनेट द्वारा जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर में प्राध्यापकों की कमी को देखते हुए सहायक प्राध्यापक से प्राध्यापक के पद पर पदोन्नति के लिए न्यूनतम पांच वर्ष के अनुभव के अनिवार्यता को समाप्त करके तीन वर्ष के अनुभव का प्रावधान किया गया है। इस मेडिकल कॉलेज में सहायक प्राध्यापक के बाईस और प्राध्यापकों के छह पद रिक्त हैं। सहायक प्राध्यापकों की भर्ती राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से की जा रही हैं

एक लाख सिंचाई पम्पों को मिलेगा बिजली का कनेक्शन गाय वितरण 26 फरवरी से शुरू करने का निर्णय     

07 फरवरी 2005

राज्य में अगले तीन वर्ष में एक लाख सिंचाई पम्पों को दिए जाएंगे विद्युत कनेक्शन। प्रत्येक किसान को पांच हॉर्स पावर के सिंचाई पम्प कनेक्शन के लिए चालीस हजार रूपए का अनुदान मिलेगा। इस हिसाब से राज्य सरकार चार सौ करोड़ रूपए खर्च करेगी। अगले वित्तीय वर्ष 2005-06 से इसके लिए किया जाएगा। सालाना बजट प्रावधान। प्रथम वर्ष में 25 हजार, द्वितीय वर्ष में 35 हजार और तीसरे वर्ष में  चालीस हजार पम्प कनेक्शन दिए जाएंगे। सिंचाई पम्पों को चौबीसों घंटे मिलेगी बिजली। वृष्टिछाया वाले क्षेत्रों में लम्बित सिंचाई पम्प कनेक्शनों के लिए ग्यारह करोड़ रूपए की स्वीकृति। राज्य में विगत साढ़े पांच दशकों में सिर्फ एक लाख 05 हजार सिंचाई पम्पों को कनेक्शन दिया गया था जबकि नयी सरकार एक लाख किसानों को सिर्फ तीन वर्ष में एक लाख सिंचाई पम्पों को कनेक्शन देगी। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब आदिवासी परिवारों को नि:शुल्क गाय वितरण की योजना छब्बीस फरवरी 2005 से प्रारंभ होगी। जगदलपुर (बस्तर) से किया जाएगा शुभारंभ। प्रथम चरण में मिल्क रूट के दस विकासखण्ड-जगदलपुर, पखांजूर (बस्तर), कोंडागांव (बस्तर) कांकेर, (उत्तर बस्तर) नगरी (जिला-धमतरी), बागबाहरा (महासमुन्द) गौरेला (जिला-बिलासपुर), अम्बिकापुर, सूरजपुर और राजपुर (जिला-सरगुजा) इस योजना में शामिल किए गए हैं। योजना के तहत प्रत्येक हितग्राही को दस हजार रूपए की गाय नि:शुल्क (शत-प्रतिशत अनुदान पर) दी जाएगी। इसमें तेरह सौ रूपए का बीमा शुल्क भी शामिल रहेगा। योजना का संचालन राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के माध्यम से होगा। इसके लिए राज्य शासन द्वारा बोर्ड के साथ समझौता पहले ही किया जा चुका है। प्रत्येक हितग्राही को कम से कम सात लीटर दूध देने वाली गाय दी जाएगी। गाय हरियाणा से मंगवायी जा रही हैं। इस वर्ष दस हजार गायों का वितरण किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2004-05 में इस योजना के लिए 25 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। गन्ना किसानों को वित्तीय वर्ष 2004-05 में दस रूपए प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन राशि (बोनस) देने का  निर्णय। अब किसानों गन्ने का रेट 95 रूपए (पंचानवे रूपए) प्रति क्विंटल की दर से मिलेगा। पुलिस महानिरीक्षक के तीन नये पद स्वीकृत। होमगार्ड  महानिदेशक का पद समाप्त।

 

बैठक स्थल-विधानसभा समिति कक्ष

      17 मार्च 2005

छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल के गठन का फैसला इसके माध्यम से पी.एम.टी., पी.ई.टी परीक्षाओं का आयोजन किया जाएगा। व्यावसायिक परीक्षा मंडल के अध्यक्ष सहित अधिकारियों और कर्मचारियों के पद स्वीकृत।

    

19 अप्रैल 2005

       गरीबी-रेखा से नीचे के परिवारों की शादी-योग्य कन्याओं के लिए सामूहिक विवाह प्रोत्साहन योजना प्रारंभ करने का निर्णय। योजना के तहत यदि दस अथवा उससे अधिक जोड़े (वर-वधु) तैयार हों, तो ऐसे प्रत्येक जोड़े की शादी पर राज्य सरकार पांच हजार रूपए खर्च करेगी। इसमें से चार हजार रूपए शादी के सामानों के लिए खर्च किए जाएंगे, जबकि एक हजार रूपए का अनुदान होगा। सामूहिक विवाह समारोह प्रत्येक तीन महीने में आयोजित करने का प्रयास। एक वर्ष में पांच हजार जोड़ों की शादी कराने का लक्ष्य। इसके लिए प्रत्येक जिले में समितियों का गठन किया जाएगा। सभी शादियां संबंधित परिवारों के धार्मिक और सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार होंगेी। झारखंड की तर्ज पर चलेगी योजना।        

राज्य की सूचना प्रौद्योगिकी नीति का अनुमोदन। अब राज्य में पांचवी कक्षा से कॉलेज स्तर तक छात्र-छात्राओं के लिए अनिवार्य कम्प्यूटर शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी। सरकारी स्कूलों को कम्प्यूटर शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी। सरकारी स्कूलों को कम्प्यूटर प्रयोग शाला की सुविधा देने और उच्च स्तरीय कम्प्यूटर नेटवर्क के माध्यम से (ई-कोष परियोजना) के तहत राज्य से सभी विभागों में बजट प्रावधान के दिन-प्रतिदिन का हिसाब रखने की व्यवस्था होगी। रायपुर, भिलाई, बिलासपुर, जगदलपुर (बस्तर) रायगढ़ कोरबा अंबिकापुर बनेंगे सूचना प्रौद्योगिकी नगर। राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों में कम्प्यूटर दक्षता बढ़ाने प्रशासन की क्षमता बढ़ायी जाएगी।     

     

जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों में तीन स्तरीय प्रणाली समाप्त होगी

       14 जून 2005

छत्तीसगढ़ के सभी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों का विलय राज्य सहकारी बैंक (एपेक्स बैंक) में करने का सैध्दांतिक फैसला भारतीय रिजर्व बैंक से अनुमति के बाद किया जाएगा। इस पर अमला इससे सहकारी बैंकों में तीन स्तरों वाली व्यवस्था के बदले द्विस्तरीय लागू होगी। इससे राज्य की एक हजार 333 प्राथमिक सहकारी साख समितियों के सदस्य किसानों को अपनी समिति से सीधे और कम ब्याज पर जल्द से जल्द ऋण मिल सकेगा। वर्तमान में सहकारी बैंकों में तीन स्तरों की व्यवस्था के तहत राज्य सहकारी बैंक (एपेक्स बैंक), जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक और प्राथमिक साख सहकारी समितियां कार्यरत है। त्रि-स्तरीय प्रणाली से ऋण वितरण में अनावश्यक देरी होती हैं जिला सहकारी बैंकों का अपेक्स बैंक में विलय होने पर अब प्रणाली से ऋण वितरण में अनावश्यक देरी होती है। जिला सहकारी बैंकों का अपेक्स बैंक में विलय होने पर अब किसानों को सीधे अपनी प्राथमिक समिति से ऋण मिल सकेगा। उन्हें इसके लिए जिला सहकारी बैंक में नही आना पड़ेगा। ऋण के लिए सभी औपचारिकताएं किसानों के गांव में या उसकी नजदीकी प्राथमिक सहकारी समिति में पूरी हो सकेगी। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक अब अपेक्स बैंक की शाखा के रूप में काम करेंगे। अपेक्स बैंक में उनके विलय से इन बैंकों में संचालक-मंडल तथा प्रचार-प्रसार आदि पर हर साल हो रहे लगभग दो करोड़ 24 लाख रूपए के खर्च की सालाना बचत होगी। इनमें जमा 532 करोड़ रूपए का उपयोग ऋण बांटने में किया जा सकेगा। इससे करीब ढाई करोड़ रूपए की अतिरिक्त आमदनी संभावित है।        
राज्य में बायो-डीजल के उत्पादन के लिए रतनजोत की खेती के वास्ते निजी निवेशकों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए इच्छुक निवेशकों को पांच सौ एकड़ तक जमीन दस वर्षीय पट्टे पर देने का निर्णय। इस फैसले पर अमल से राज्य में फिलहाल खाली पड़ी लगभग दस लाख हेक्टेयर सरकारी जमीन का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। निवेशकों को बायोडीजल प्रोसेसिंग यूनिट सहित भूमि सुधार और पौधे लगाने का खर्च स्वयं करना होगा। प्रोसेसिंग यूनिट लगाना अनिवार्य होगा। निवेशक इस जमीन को बेच नहीं सकेंगे और ना ही किसी प्रकार अन्य को हस्तांतरित करेंगे या सब-लीज पर देंगे। उन्हें दस लाख रूपए भी सरकार के पास जमा करना होगा।
       
राज्य में कक्षा पहली से आठवीं तक सभी छात्र-छात्राओं को और नवमीं-दसवीं की सभी बालिकाओं को नि:शल्क पाठयपुस्तकें दी जाएगी। इस पर लगभग पचास करोड़ रूपए खर्च किए जाएंगे। अब तक सिर्फ अनुसूचित जातियों और जन-जातियों के स्कूली बच्चों को नि:शुल्क पुस्तकें मिलती थी, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने जाति बंधन से ऊपर उठकर सभी वर्गों के बच्चों को पाठयपुस्तकें नि:शुल्क देने का निर्णय लिया है। यह फैसला सर्व शिक्षा अभियान की भावना के अनुरूप है। लगभग पैंतीस लाख स्कूली बच्चों को इसका लाभ मिलेगा।

   

प्रस्तावित नया रायपुर उप-नगर के लिए उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी टोनही प्रताड़ना रोकथाम विधेयक 2005 का प्रारूप अनुमोदित

      

25 जून 2005       

राजधानी के लिए नया रायपुर उप-नगर बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी 3 (हाई पॉवर कमेटी) गठित करने का निर्णय।

छत्तीसगढ़ राज्य कृषि प्रशिक्षण अकादमी बनाने का फैसला।

छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना रोकथाम विधेयक 2005 के प्रारूप का अनुमोदन।

नगर निगम बिलासपुर की प्रमुख सड़कों के विकास के लिए बिल्ट, ऑपरेट एण्ड ट्रांसफर (बी.ओ.टी.) पध्दति के अन्तर्गत दो विशेष पैकेज स्वीकृत।

संस्कृति और पुरातत्व संचालनालय के संचालक पद का उन्नयन करके आयुक्त का पद स्वीकृत।    

 

निजी विश्वविद्यालयों के लिए मॉडल एक्ट

      

8 जुलाई 2005

छत्तीसगढ़ के निजी निश्वविद्यालयों के लिए आदर्श अधिनियम (मॉडल एक्ट) का अनुमोदन।

अनुदान आयोग के निर्धारित मापदंड़ों का ध्यान रखा जाएगा। अनुमोदित मॉडल एक्ट के तहत राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में निजी विश्वविद्यालय स्थापना के लिए एक करोड़ रूपए और सामान्य क्षेत्रों में तीन करोड़ रूपए की अमानत राशि संबंधित निजी विश्वविद्यालयों के प्रबंधन से ली जाएगी।

राज्य के शासकीय विश्वविद्यालयों की व्यवस्था में सुधार के लिए विधान-सभा के वर्षाकालीन सत्र 2005 में तीन संशोधन विधेयक लाए जाएंगे। 

 

आदिवासी परिवारों की सहमति से गाय के बदले बैल

      18 जुलाई 2005       

बस्तर अंचल में आदिवासी परिवारों को गाय के बदले उनकी सहमति लेकर बैल उपलबध कराने का निर्णय।

राज्य के 43 वर्ष से अधिक उम्र के डिप्टी कलेक्टरों और अपर कलेक्टरों को उच्च वेतनमान देने का फैसला।     

 

सरकारी नौकरी में भर्ती की आयु सीमा एक वर्ष और बढ़ाने का निर्णय

      8 अगस्त 2005       

राज्य के स्थानीय बेरोजगारों के लिए सरकारी नौकरी में भर्ती की आयु-सीमा में एक वर्ष की और छूट देने का फैसला। पिछले साल लिए गए निर्णय के तहत वर्तमान में यह छूट पैंतीस वर्ष की आयु तक थी, इसे बढ़ाकर छत्तीस वर्ष करने का प्रस्ताव अनुमोदित। यह निर्णय 31 मार्च 2007 तक प्रभावशील रहेगा। उल्लेखनीय है कि राज्य के अधिकांश विभागों में नौकरियों के लिए भर्ती की आयु-सीमा तीस वर्ष थी, जिसे 19 जुलाई 2004 को पांच वर्ष और बढ़ाकर 35 वर्ष करने का निर्णय लिया गया था। अब इसमें एक वर्ष और छूट देने का निर्णय 8 अगस्त 2005 को लिया गया। यह छूट अनूसूचित जातियों, जन-जातियों, महिलाओं और सरकारी कर्मचारियों को दी जाने वाली छूट के अतिरिक्त होगी।

राजधानी रायपुर के पत्रकारों की गृह निर्माण सहकारी समिति को सात एकड़ जमीन आबंटित करने का प्रस्ताव अनुमोदित।

 

       तकनीकी शिक्षा संस्थाओं को 17 करोड़ रूपए स्वीकृत

      3 सितम्बर 2005

राजधानी रायपुर सहित बिलासपुर और जगदलपुर के शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों तथा रायपुर, दुर्ग और रायगढ़ के तीन पॉलीटेक्निक संस्थाओं के विकास के लिए 17 करोड़ रूपए की स्वीकृत।

रायपुर के शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में केरल से सबसे बड़े श्रीधरीयम आयुर्वेदिक नेत्र चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र प्रायवेट लिमिटेड के सहयोग से नेत्र चिकित्सालय और पंचकर्म केन्द्र प्रारंभ करने का फैसला। यह केन्द्र पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप के आधार पर स्थापित किया जाएगा।        

 

छत्तीसगढ़ राज्य की आदर्श पुनर्वास नीति

(केबिनेट की बैठक 24 सितम्बर 2005 में अनुमोदित)     

24 सितम्बर 2005

अविभाजित मध्यप्रदेश में कोई पुनर्वास नीति नहीं थी, वरन् विभिन्न विभागों एवं परियोजनाओं के लिए पैकेज हुआ करते थे।

छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा अविभाजित मध्यप्रदेश के विभिन्न पैकेजों और गुजरात, महाराष्ट्र राजस्थान, बिहार, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा आदि राज्यों की नीतियों का समावेश करते हुए एवं कुछ बिन्दुओं को जोड़ते हुए नवीन पुनर्वास नीति तैयार की गयी है, जिसके प्रावधान इस प्रकार हैं - विस्थापितों को रोजगार एवं स्व-रोजगार देने का प्रयास किया जाएगा। पुनर्विस्थापित परिवारों को पुनर्वास अनुदान के रूप में ग्यारह हजार रुपए एवं पुनर्विस्थापना अनुदान के रूप में एक हजार रूपए का अनुदान प्रदान किया जाएगा। अतिक्रामकों को भूमि का मुआवजा नहीं मिलेगा वरन् उन पर निर्मित मकान, इत्यादि का मुआवजा दिया जाएगा।

 

अधिसूचित क्षेत्र में जहां आदिवासी व्यक्ति द्वारा 1990 के पूर्व कब्जा किया गया है उसे पूर्ण मुआवजा दिया जाएगा। भूमि के बदले भूमि प्रदाय करने का प्रयास किया जाएगा। पुनर्बसाहट हेतु आदर्श ग्राम एवं आदर्श नगर बनाए जाएंगे। आदर्श ग्रामआदर्श नगर में भूमि के पट्टे दिए जाएंगे। सभी भूमि धारकों के परिवारों को वाणिज्यिक एवं औद्योगिक इकाईयों में अर्हतानुसार रोजगार देने का प्रयास किया जाएगा। विस्थापितों को मछलीपालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। जलाशयों का पानी छोड़ने के पश्चात उपलब्ध भूमि के पट्टे विस्थापितों को दिए जाएंगे। व्यवसाय हेतु दुकान इत्यादि का निर्माण किया जाएगा। तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी की शासकीय सेवा में विस्थापितों को आयु सीमा में दो वर्ष की छूट दी जाएगी।

संबंधित परियोजनाविभाग के द्वारा राज्य शासन से मान्यता प्राप्त करने के पश्चात कलेक्टर से एक एम.ओ.यू.हस्ताक्षर किया जाएगा, जिसमें पुनर्वास नीति के पालन की अनिवार्यता रहेगी। पुनर्बसाहट के क्षेत्र में संबंधित इकाई द्वारा अपने शुध्द लाभ का न्यूनतम तीन प्रतिशत सामुदायिक विकास हेतु दिया जाएगा। नीति के पालन एवं विवादों के निराकरण हेतु राज्य स्तरीय एवं जिला स्तरीय सलाहकार समिति का गठन किया गया है।

नीति में सामाजिक पुनर्वास, पर्यावरण पुनर्वास, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पुनर्वास तथा आर्थिक पुनर्वास की पूर्ण व्यवस्था की गयी है। यह नीति केवल नई परियोजनाओं अर्थात जिनमें भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही पूर्ण नहीं हुई है, पर लागू होगी। पुनर्वास का पूरा व्यय संबंधित परियोजनाविभाग द्वारा किया जाएगा। राजस्व एवं वन भूमि में कोई अन्तर नहीं रखा गया है। यदि संबंधित परियोजनाविभाग द्वारा 10 वर्ष तक भूमि का उपयोग नहीं किया जाता है, तो भूमि वापस लेने का प्रावधान है। जिन परियोजनाओं में निजी भूमि के अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होगी उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।

वाणिज्यिकऔद्योगिक परियोजनाओं के विस्थापितों को असिंचित (पड़त) भूमि हेतु न्यूनतम पचास हजार रूपए प्रति एकड़, एक फसली भूमि हेत न्यूनतम 75 हजार रूपए प्रति एकड़ एवं सिंचित दो फसली भूमि हेतु एक लाख रूपए का मुआवजा दिया जाएगा।

शासकीय परियोजनाओं से विस्थापित भू-स्वामियों को असिंचित (पड़त) भूमि हेतु न्यूनतम तीस हजार रूपए प्रति एकड, एक फसली भूमि के लिए न्यूनतम 45 हजार रूपए तथा दो फसली सिंचित भूमि हेतु न्यूनतम रूपए साठ हजार रूपए का मुआवजा दिया जाएगा। शासकीय परियोजनाओं के विस्थापित भू-स्वामियों को भूमि के बदले भूमि देने का प्रयास किया जाएगा। पुनर्बसाहट के स्थान पर विस्थापित स्थान की तुलना में बेहतर सुविधा दी जाएगी। विस्थापितों को हटाने के पूर्व समस्त मुआवजे का भुगतान कर दिया जाएगा एवं पुनर्वास स्थल का विकास कर लिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की आदर्श पुनर्वास नीति बनाने के लिए अन्य राज्यों की नीतियों का समावेश करते हुए और कुछ बिन्दुओं को जोड़ते हुए नवीन नीति तैयार की गयी है। नीति के प्रारूप के परीक्षण हेतु मंत्रि-मंडलीय उप समिति का गठन किया गया था जिसमें माननीय वित्त मंत्री, माननीय कृषि, सहकारिता, विधि विधायी एवं राजस्व मंत्री, माननीय आदिम जाति कल्याण मंत्री, माननीय वन एवं पर्यावरण मंत्री, माननीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री सदस्य थे।

तत्पश्चात वैधानिक एवं अन्य पहलुओं पर परीक्षण कर परिमार्जन करने हेतु निम्नलिखित समिति गठित की गई, जिसमें मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, वाणिज्य उद्योग एवं खनिज संसाधन विभाग, प्रमुख सचिव, विधि-विधायी विभाग और सचिव, राजस्व विभाग शामिल थे।

राज्य में 25 अक्टूबर 2005 से 31 जनवरी 2006 तक समर्थन मूल्य पर धान और मक्का खरीदी का फैसला। लगभग 30 लाख मीटरीकटन धान खरीदने का लक्ष्य।     

वनवासियों को मिली एक नई सौगात ढ़ाई लाख से अधिक वन-प्रकरणों का खात्मा

      14 अक्टूबर 2005       

राज्य में भारतीय वन अधिनियम 1927 की विभिन्न धाराओं के अन्तर्गत वनवासियों के विरूध्द में चल रहे दो लाख 57 हजार 226 छोटे-छोटे प्रकरणों को समाप्त करने का ऐतिहासिक फैसला। इसके फलस्वरूप राज्य के एक लाख 62 हजार 692 वनवासियों को मुकदमों के बोझ से राहत मिलेगी। ये प्रकरण वर्ष 1952-53 से 30 जून 2004 तक लगभग 51 वर्षों की अवधि में दर्ज किए गए थे। इनमें बारह करोड़ 91 लाख रूपए का जुर्माना भी माफ किया जाएगा। समाप्त किए जाने वाले मामले निजी उपयोग के लिए छोटे-छोटे पेड़ों की कटाई, जंगल में गिरी पड़ी सूखी लकड़ी लाने और सिरबोझाा अथवा बैल गाड़ियों द्वारा उनके परिवहन से संबंधित है लेकिन मोटर चालित वाहन जैसे ट्रक-ट्रैक्टर आदि से अवैध लकड़ी परिवहन के मामले चलते रहेंगे। ऐसे प्रकरणों की संख्या लगभग चार हजार 232 हैं।

प्रदेश सरकार सूचना एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग के गठन का फैसला। अब विभागों की संख्या 23 हो जाएगी।

छत्तीसगढ़ में पोहा और मुरमुरा तथा राज्य से बाहर निर्यात किए जाने वाले चावल पर चार प्रतिशत टैक्स समाप्त करने का निर्णय। 

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य मंत्रीपरिषद की बैठक में निम्नानुसार निर्णय लिए गए

      7 दिसम्बर 2005

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल के संबंध में लिए गए निर्णय के अनुसार विद्युत मंडल के निगमीकरण की अंतरण योजना 30 अप्रैल 2006 के पूर्व अधिसूचित कर दी जाएगी। इसके साथ ही एक जून 2006 को नियत दिनांक से पुर्नगठन के अनुसार नये निगम कार्य करना प्रारंभ कर देंगे। अत: यह निर्णय लिया गया कि केन्द्र सरकार से छह माह का समय विद्युत मंडल के पुनर्गठन के लिए प्राप्त किया जाए।

मल्टीप्लेक्स एवं सितारा होटल स्थापना के लिए प्रस्तावित मापदण्डों एवं विकास नियमन का अनुमोदन किया गया। यह भी निर्णय लिया गया कि मल्टीप्लेक्स एवं सितारा होटल के लिए प्रस्ताव अनुसार वाणिज्यिक, आवासीय एवं कृषि भू-उपयोग की भूमि पर स्वीकार्य उपयोग की सारणी में सम्मिलित करने हेतु रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई एवं कोरबा की विकास योजनाओं में आवष्यक उपांतरण की कार्यवाही की जाएगी। छत्तीसगढ़ में मल्टीप्लेकस के लिए निम्नानुसार प्रावधान प्रस्तावित है :-

वाणिज्यिक क्षेत्र (मध्यक्षेत्र से बाहर)

आवासीय क्षेत्र, (मध्यक्षेत्र से बाहर)

 कृषि (रायपुर हेतु व्ही.आई.पी. मार्ग पर स्थित भूमि तथा उससे जुड़े पहुंच मार्ग पर स्थित भूमि एवं विधान सभा मार्ग (बड़ी लाईन से विधान सभा तक) से 100 मीटर तक की भूमि को छोड़कर )

मल्टी प्लेक्स के लिए मापदण्ड एवं विकास नियमन निम्नानुसार होंगे :-

मल्टीप्लेक्स में न्यूनतम 2 सिनेमा हॉल एवं एकीकृत कुल न्यूनतम क्षमता 400 दर्षक होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा इसमें वीडियो गेम आर्केड, फास्ट फूड केन्द्र, बच्चों के खेलने एवं मनोरंजन हेतु स्थान एवं सुविधा, वाहन पार्किंग हेतु स्थान, म्यूजिक स्टोर, वीडियो थियेटर, श्री डायमेंषन सिनेमा हॉल, आडिटोरियम, डिस्कोथेक, साइबर कैफे, रेस्टारेंट आइसक्रीम पार्लर, काफी शॉप, बेकरी, बाउलिंग ऐली, कॉटेजसूट, शापिंग आर्केंड तथा अन्य वाणिज्यिक गतिविधियां जो शासन द्वारा अनुज्ञेय हों, स्वीकार्य होंगी।

सितारा होटल के न्यूनतम मापदंड 100 कमरे, स्वीमिंग पूल, रेस्टोंरेंट, हेल्थ क्लब, दो कान्फ्रेंस हाल, लॉन, जिम खाना और इंटरनेट सुविधा होगी। अग्नि शमन की व्यवस्था के लिए भूमि विकास नियम 1984 के समस्त प्रावधान लागू होंगे। इनमें भूकम्परोधी सरंचना के प्रावधानों का भी पालन करना होगा।

राज्य शासन ने राज्य में स्थापित लघु उद्योगों को प्रोत्साहित करने एवं राज्य के समग्र विकास में उनके योगदान को मान्यता प्रदान करने के लिए प्रतिवर्ष चयनित लघु उद्योगों को 'राज्य लघु उद्योग पुरस्कार' देने का निर्णय लिया है। इनमें तीन पुरस्कार दिए जाएंगे। प्रथम पुरस्कार 51 हजार रूपए, द्वितीय पुरस्कार 31 हजार रूपए तथा तृतीय पुरस्कार 21 हजार रूप्ए का होगा। नगद राषि के अलावा चयनित इकाईयों को प्रषस्ति पत्र भी दिए जाएंगे। पुरस्कार के चयन के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार समिति मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित की गई है, जिसमें अपर मुख्य सचिव वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, भारतीय स्टेट बैंक रायपुर के आंचलिक कार्यालय के प्रमुख, प्रबंध संचालक सी.एस.आई.डी.सी. निदेषक लघु उद्योग सेवा संस्थान रायपुर, छत्तीसगढ़ लघु उद्योग महासंघ के प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ लघु एवं सहायक उद्योग संघ और लघु उद्योग भारती छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि सदस्य होंगे। उद्योग आयुक्त इस समिति के सदस्य सचिव होंगे।

मंत्री परिषद ने छत्तीसगढ़ निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2005 के प्रारूप का भी अनुमोदन किया। इस विधेयक के अनुसार छत्तीसगढ़ में गैर बैंकिग वित्तीय कम्पनियों और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) अपंजीकृत कम्पनियों एवं वृक्षारोपण में निवेष कराने वाली कम्पनियों द्वारा जमा कर्ताओं के धन वापस करने में चूक की स्थिति में उन पर कानूनी कार्यवाही की जा सकेगी। यह निर्णय भारतीय रिजर्व बैंक के आग्रह पर राज्य शासन द्वारा लिया गया है। उल्लेखनीय है तमिलनाडू, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, गोवा, हिमाचल, मध्यप्रदेष आदि राज्यों में निक्षेपों के हितों के सरंक्षण तथा प्रदेष में अनिगमित वित्तीय स्थापनाओं पर अंकुष रखने के लए अधिनियक पारित किए गए हैं।     

     

12 हजार शिक्षा कर्मियों की भर्ती का फैसला

14 दिसम्बर 2005

 आगामी शिक्षा सत्र से पहले 12 हजार शिक्षा कर्मियों की भर्ती होगी। इसके तहत चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा। चयन प्रक्रिया भी निर्धारित। मेरिट के आधार पर 70 प्रतिशत और अनुभव के लिए 10 प्रतिशत अंक मिलेंगे, शेष अंक साक्षात्कार, बी.एड. उपाधि, स्काउट-गाइड प्रमाण पत्र और खेलों के लिए अलग-अलग निर्धारित होंगे।

कबीरधाम जिले के भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने के लिए गन्ने की खेती का रकबा बढ़ाने और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए समर्थन मूल्य पर बोनस देने का निर्णय। केंद्र सरकार द्वारा 8.5 प्रतिशत झड़ती वाले गन्ने का समर्थन मूल्य 78 रूपए 95 पैसे और 10 प्रतिशत झड़ती वाले गन्ने का 86 रूपए 82 पैसे प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। राज्य सरकार इसमें क्रमश: पांच रूपए और दस रूपए प्रति क्ंविटल का बोनस देगी। इससे दस हजार किसान लाभान्वित होंगे और राज्य सरकार पर तीन करोड़ रूपए का अतिरिक्त खर्च आएगा।  

मंत्रिपरिषद के निर्णय-2006

केबिनेट की बैठक

अब 1997 के बाद के मृत्यु प्रकरणों में भी अनुकम्पा नियुक्ति
राज्य का तीसरा मेडिकल कॉलेज नये सत्र से जगदलपुर में
केबिनेट की बैठक में आधा दर्जन महत्वपूर्ण निर्णय
रायपुर, शुक्रवार, दिनांक 27 जनवरी 2006      

     

रायपुर 28 जनवरी 06
  •  अनुकम्पा नियुक्ति के पुराने नियमों को शिथिल कर नये नियम बनाए गए। अब राज्य गठन के तीन वर्ष पहले अर्थात् एक नवम्बर 1997 के बाद छत्तीसगढ़ में पदस्थ रहे शासकीय कर्मचारियों की मृत्यु के प्रकरणों में भी दिवंगतों के कानूनी आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति की पात्रता होगी। अब तक एक नवम्बर 2000 के बाद के ऐसे प्रकरणों में अनुकम्पा नियुक्ति की पात्रता थी।
  •  राज्य का तीसरा ऐलोपेथिक मेडिकल कॉलेज नये शिक्षा सत्र 2006-07 से आदिवासी बहुल बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में खोला जाएगा । वर्तमान में ऐसे दो शासकीय मेडिकल कॉलेज रायपुर और बिलासपुर में संचालित हैं। जगदलपुर में खुलने वाले इस कॉलेज के प्रारंभिक व्यय के लिए राज्य शासन द्वारा एक करोड़ 20 लाख रूपए स्वीकृत। यह मेडिकल कॉलेज एक सौ सीटों का होगा। इसमें पी.एम.टी. के माध्यम से प्रवेश दिया जाएगा। इस मेडिकल कॉलेज की स्थापना में एक सौ करोड़ रूपए की लागत आएगी। इसमें से 50 करोड़ रूपए राज्य सरकार द्वारा और शेष 50 करोड़ रूपए राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एन.एम.डी.सी.) द्वारा दी जाएगी। जगदलपुर का महारानी शासकीय जिला अस्पताल इस मेडिकल कॉलेज को हस्तांतरित किया जाएगा।
  • राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए 25 अक्टूबर-2005 से संचालित तीन महीने का विशेष अभियान 31 जनवरी- 2006 तक चलेगा। इसके बाद एक फरवरी-2006 से 15 फरवरी -2006 तक लिंकिंग के माध्यम से धान खरीदी की जाएगी। लिंकिंग प्रक्रिया के तहत किसान अपने सहकारी ऋणों की अदायगी धान के रूप में कर सकेंगे।
  • राज्य में वाणिज्य कर न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) का गठन जल्द किया जाएगा। उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अथवा जिला न्यायाधीश स्तर के न्यायिक अधिकारी इसके अध्यक्ष होंगे। प्रशासनिक संवर्ग का एक अधिकारी इसका सदस्य होगा।
  • नवीन राजधानी क्षेत्र ने निर्माणाधीन अंतर्राष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट स्टेडियम के बंद निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए 72 करोड़ 28 लाख रूपए स्वीकृत। इसकी निर्माण प्रक्रिया में प्रशासकीय स्वीकृति और तकनीकी स्वीकृति देने में अनियमितताओं के बारे में प्राप्त शिकायतों की जांच करायी जाएगी।
  • राज्य के सोलह में से ग्यारह जिलों में दो फरवरी 2006 से प्रारंभ होगी रोजगार गारंटी योजना। शेष पांच जिलों - रायपुर, महासमुंद, जांजगीर-चांपा, कोरबा और दुर्ग को भी इस योजना में शामिल करने का अनुरोध प्रधान मंत्री से किया जाएगा। योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत क्षेत्र में बेरोजगारों का पंजीयन करके उन्हें एक सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। रोजगार की उपलब्धता नहीं होने पर संबंधितों को बेरोजगारी भत्ता मिलेगा।      

मंत्रिपरिषद के निर्णय            

      रायपुर 8 फरवरी 2006

          
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में निम्नानुसार निर्णय लिए गए। 

(1) न्यायालयों में लंबित साधारण प्रकृति के प्रकरणों को वापस लिये जाने का निर्णय लिया गया है। इससे न्यायालयों को गंभीर प्रकरणों का तत्परता से निराकरण करने का समय मिल सकेगा। प्रकरण वापस लेने के लिए प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है, जिसके अन्तर्गत जिला दंडाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जायेगा, जिसमें पुलिस अधीक्षक सदस्य तथा जिला अभियोजन अधिकारी सदस्य सचिव होंगे। समिति किसी भी विभाग से संबंधित प्रकरणों की वापसी के संबंध में विचार हेतु संबंधित जिला स्तर के अधिकारी को चुनने के लिए अधिकृत होगी। सर्वाधिक प्राथमिकता विचाराधीन बंदियों के ऐसे प्रकरणों में दी जाएगी, जिनमें निरोध की अवधि उनकी संभावित सजा से अधिक हो चुकी हो। उन प्रकरणों पर भी विचार किया जाएगा ,जिनमें अभियोजन पक्ष के गवाह विरोधी करार दिये जा चुके हाें अथवा अन्य किसी कारण से लोक अभियोजक की राय में न्यायालय में प्रकरण की सफलता की कोई आशा नहीं हो। समिति केवल दिनांक 31 दिसम्बर 2003 के प्रकरणों को वापस लेने के संबंध में विचार करेगी। अनुशंसा करते समय समिति स्पष्ट राय का उल्लेख करेगी तथा किन कारणों से प्रकरण वापसी योग्य पाया गया है, का उल्लेख करेगी।
समिति निम्न अधिनियमों एवं धाराओं के अन्तर्गत प्रकरणों का परीक्षण करेगी:-
1-भारतीय दण्ड विधान के अन्तर्गत धारा 294, 323, 279, 336, 341, 342, 337, 447, 448 एवं 506 के प्रकरण।
-आबकारी अधिनियम की धारा 34 ए. के अन्तर्गत ऐसे प्रकरण जिनमें जब्त की गई वस्तुओं की मात्रा 10 लीटर से कम हो तथा धारा 36 के अन्तर्गत आने वाले प्रकरण
-मोटर व्हीकल एक्ट के तहत सवारी वाहनों, निजी वाहनों में ओव्हर लोंडिग के प्रकरण, पुलिस एक्ट के प्रकरण, सार्वजनिक द्यूत अधिनियम धारा 13 के अन्तर्गत आने वाले प्रकरण, अन्य ऐसे सभी अपराध जिनमें छह माह का कारावास तथा अर्थदण्ड का प्रावधान है।
-ग्रामीण न्यायालय के क्षेत्र में आने वाले ऐसे सभी  विवाद जो भादवि की धारा 379,411, 374 एवं 509 को छोड़कर जो न्यायायिक मजिस्टे्रट के न्यायालय में लंबित हो। आयुध अधिनियम के अन्तर्गत ऐसे प्रकरण जिनमें चाकू या छुरी आदि गैर आग्नेय अस्त्र जप्त हुए हों, अधिकतम तीन वर्ष के कारावास एवं जुर्माने से दंडित होने वाले अपराध एवं छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34 के अन्तर्गत आदिवासी उपयोजनाअनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के विरूध्द दर्ज प्रकरण।
(2)  वर्ष 2006-07 के लिए प्रदेश में देशी-विदेशी मदिरा की फुटकर व्यवस्थापन के लिए नीति का अनुमोदन किया गया।
वर्ष 2005-06 में 899 देशी-विदेशी मदिरा दुकानों के 190 समूह थे। वर्ष 2006-07 हेतु इन दुकानों के अतिरिक्त 121 नई दुकाने जोड़ कर समूहों के प्रस्ताव तैयार किये गए हैं। सामान्यत: दो दुकानों तथा अधिकतम तीन दुकानों के समूह व्यवस्थापन हेतु तैयार किए गए हैं। अब 2006-07 में पूर्व वर्ष के 190 समूहों के स्थान पर 436 समूह आबंटन हेतु उपलब्ध रहेंगे।
कम दुकानों के छोटे समूह होने के कारण समूहों का राजस्व लक्ष्य पूर्व वर्ष के रूपये 10 करोड़ से अनधिक प्रति समूह के स्थान पर वर्ष 2006-07 हेतु सामान्यत: रूपये 3 करोड़ से अनधिक प्रस्तावित है। इसके कारण कम पूंजी धारण करने वाले आवेदकों को भी चयन प्रक्रिया में भाग लेना सुलभ होगा।
वर्ष 2006-06 में देशी विदेशी मदिरा दुकान के आवंटन की पात्रता धारण करने के लिए प्रत्येक आवेदकों को आवेदन पत्र के साथ ही आयकर विभाग द्वारा उसे जारी पैन नम्बर की प्रति ली जाएगी। इससे आवेदक की विश्वसनीयता और आर्थिक सक्षमता सुनिश्चित होगी।
वर्तमान में देशीविदेशी मदिरा के फुटकर विक्रय हेतु न्यूनत्तम दरों के साथ-साथ अधिकतम दरें भी निर्धारित की जाएगी, जिससे अत्यधिक दरों पर मदिरा विक्रय की प्रवृतियों पर अंकुश लगेगा। एक आवेदक को प्रदेश के एक जिले में देशीविदेशी मदिरा का अधिकतम एक समूह का आवंटन प्राप्त करने की पात्रता का प्रावधान है।
2006-08 के लिए देशी मदिरा के थोक प्रदाय की व्यवस्था में निम्नांकित परिवर्तन किए गए हैं:-
देशी मदिरा का प्रदायकर्ता, देशी मदिरा की बोतलों में भराई जिलों में स्थित विनिर्माण भण्डारगारों में करने के बजाय अब आसवनी परिसर में ही किया जाएगा। देशी मदिरा की भराई, बोतल बंद करने व होलोग्राम आदि लगाने के बाद मास्टर कार्टन पैक में पेकिंग कर जिलों के भण्डारण भाण्डागारों को सील बंद बोतलों में परिवहनआयात करेगा। भण्डारण भाण्डागारों से सील बंद बोतलों में देशी मदिरा के फुटकर लायसेंसियों को दी जाएगी। आगामी ठेका अवधि में सीलिंग चार्ज के स्थान पर प्रदाय दर 750 एमएल बोतल के लिए 5.40 रूपये प्रति नग, 375 एमएल के लिए 4 रूपये प्रति नग एवं 180 एमएल के लिए 2.20 रूपये प्रति नग तय की गई है। खाली बोतलें आसवानी तक पंहुचाना सुलभ नहीं होने के कारण अब खाली शीशी वापसी  का प्रावधान समाप्त किया गया है।
मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंध विधेयक 2005 में किये गये संशोधन का अनुमोदन किया गया है। संशोधित विधेयक विधानसभा के आगामी सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा।      
 

तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 26 करोड़ से अधिक राशि का बोनस जल्द मिलेगा

      मंत्रिपरिषद की बैठक में निर्णय

      

     रायपुर   19-03-06

      छत्तीसगढ़ में वर्ष 2004 के तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य के लिए संग्राहकों को छब्बीस करोड़ रूपए से अधिक राशि का बोनस बहुत जल्द वितरित कर दिया जाएगा। इस आशय का महत्वपूर्ण निर्णय आज यहां मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित केबिनेट की बैठक में लिया गया। 

बैठक में लिए गए एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले के अनुसार वर्ष 2003 के साल बीज संग्रहण कार्य में राज्य लघु वनोपज संघ को हुए 30 करोड़ 90 लाख रूपए के घाटे की आधी राशि 15 करोड़ 45 लाख रूपए की प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा की जाएगी। ज्ञातव्य है कि इस घाटे की आधी राशि की प्रतिपूर्ति प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2004 में की जा चुकी है। इससे राज्य लघु वनोपज संघ को वर्ष 2004 के तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए बोनस वितरण में काफी मदद मिलेगी। प्रदेश के लाखों वनवासी परिवारों और ग्रामीणों को राज्य शासन द्वारा आज लिए गए इन दो अहम फैसलों का लाभ मिलेगा।     

    मुख्यमंत्री ने बैठक में वन विभाग के अधिकारियों को तेन्दूपत्ता संग्राहकों के लिए वर्ष 2004 की प्रोत्साहन राशि (बोनस) का वितरण एक समयबध्द कार्यक्रम बनाकर जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए।

 

केबिनेट की बैठक

      छह महत्वपूर्ण निर्णय

           

रायपुर,  28 अप्रैल 2006     
  •   आदिवासी युवाओं को पुलिस भर्ती में व्यापक अवसर देने की नयी पहल-
  •   राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस जवानों की भर्ती के लिए निर्धारित शारीरिक मापदण्ड में आंशिक संशोधन । अब पुरूष तथा महिला     आरक्षकों की भर्ती में शारीरिक लम्बाई 158 सेन्टीमीटर से घटाकर 153 सेन्टीमीटर करने का फैसला। अन्य सभी नियम यथावत् रहेंगे।
  •  अनियमित कॉलोनियों का नियमितीकरण :-
  •   राज्य में दिसम्बर 2005 तक निर्मित सभी अनियमित कॉलोनियों को नियमित किया जाएगा। इसके लिए छत्तीसगढ़ कॉलोनाइजर अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव अनुमोदित । इसके पहले दिसम्बर 2002 तक निर्मित कॉलोनियों को नियमित किया गया था। अब यह समय-सीमा दिसम्बर 2005 तक बढ़ा दी गयी। नियमितीकरण के लिए निर्धारित आश्रय शुल्क संबंधित कॉलोनाइजर स्थानीय कलेक्टोरेट के बदले अब स्थानीय नगरीय निकाय (नगर-निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत) में जमा करेंगे। यह राशि झुग्गी बस्तियों में सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च की जाएगी।
  •   सड़क निर्माण में निजी-पूंजी निवेश को बढावा :-
  •   राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग एक हजार 500 किलोमीटर लम्बी दो और चार लेन सड़क निर्माण के लिए प्रदेश सरकार निजी कम्पनियों के साथ मिलकर संयुक्त उपक्रम बनाएगी। इसके लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे और जिसकी निविदा अधिकतम होगी, उसके साथ संयुक्त उपक्रम बनाया जाएगा। राज्य शासन का अंशदान 26 (छब्बीस) प्रतिशत और निजी क्षेत्र का 74 (चौहत्तर) प्रतिशत होगा। निजी कम्पनी को इन सड़कों का रख-रखाव पन्द्रह साल तक करना होगा। निर्माण के लिए सड़कों को चिन्हांकित करने मंत्रियों की एक कमेटी बनेगी। इसमें वित्त मंत्री, कृषि मंत्री, राजस्व मंत्री, पंचायत, और ग्रामीण विकास मंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री शामिल रहेंगे। संयुक्त उपक्रम बनाकर इन सड़कों के निर्माण पर दो वर्ष में तीन हजार करोड़ रूपए के निवेश का लक्ष्य। निजी कम्पनी जितनी राशि खर्च करेगी, राज्य शासन द्वारा ब्याज सहित उसका भुगतान पन्द्रह वर्षों में किश्तों पर किया जाएगा।
  •   अटल आवास योजना अब गांवों में भी :-
  •   गरीबों के लिए संचािलत अटल आवास योजना में शहरों के साथ अब गांवों को भी शामिल किया जाएगा। योजना के स्वरूप में कुछ संशोधन भी किए जाएंगे। अब इस योजना के तहत प्रत्येक मकान में एक कमरे की जगह दो कमरे होंगे और रसोईघर की भी व्यवस्था रहेगी। संशोधित स्वरूप में मकान की लागत 60 हजार से बढ़कर एक लाख 10 हजार रूपए होगी। अब यह योजना नगरीय प्रशासन विभाग के स्थान पर आवास एवं पर्यावरण विभाग के तहत छत्तीसगढ़ राज्य गृह निर्माण मंडल द्वारा संचालित की जाएगी। हितग्राही को 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। शेष 50 प्रतिशत राशि ऋण के रूप में होगी, जिसका भुगतान आसान किश्तों में करने की सुविधा हितग्राही को मिलेगी।
  •   बेरोजगार इंजीनियरों को टेंडर पध्दति से मिलेंगे ठेके :-
  •  लोक निर्माण विभाग में बेरोजगार इंजीनियरों को बिना टेंडर (सिर्फ आवेदन और लॉटरी पध्दति से) दस लाख रूपए तक का ठेका देने की योजना में आंशिक संशोधन करने का निर्णय। यह योजना 15 सितम्बर 2005 से शुरू की गयी थी। अब इस योजना में टेंडर पध्दति से ठेके दिए जाएंगे। प्रत्येक बेरोजगार इंजीनियर को एक निश्चित सीमा तक कार्य सौंपे जाएंगे। राज्य में लोक निर्माण विभाग द्वारा फिलहाल इस योजना के तहत 178 बेरोजगार इंजीनियरों को ठेके दिए गए हैं।
  •   पुरी मठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद जी को राजधानी रायपुर के मोवा क्षेत्र में आश्रम निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन सिर्फ एक रूपए प्रति वर्गफुट के किफायती मूल्य पर देने का फैसला।      

 

मंत्रि परिषद के निर्णय 25 मई 2006

      शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की नीति

            

रायपुर,  25 मई, 2006

      सामान्य एवं वनांचल क्षेत्रों की शालाओं में 40 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक। प्रायमरी स्कूल में कम से कम दो शिक्षक। मिडिल स्कूल में कम से कम तीन शिक्षक। हाईस्कूल में 4 शिक्षक। हायर सेकेण्डरी स्कूलों में कम से कम छह शिक्षक। शिक्षकों की संख्या उन स्कूल के लिए स्वीकृत पदों की संख्या से अधिक नहीं होगी। हाई स्कूल में आधे शिक्षक कला और आधे शिक्षक विज्ञान संकाय में स्नातक होंगे । हायर सेकेण्डरी स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों का स्नातकोत्तर होना आवश्यक है। युक्तियुक्तकरण की यह नीति स्कूल शिक्षा विभाग तथा आदिम जाति कल्याण विभाग दोनों ही विभागों के स्कूलों में लागू होगी।

परन्तु इस नीति के तहत शिक्षाकर्मियों का स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। किसी भी स्कूल में कार्यरत कुल शिक्षकों की गणना उस स्कूल में कार्यरत शिक्षाकर्मियों को जोड़कर की जाएगी। प्रायमरी एवं मिडिल स्कूलों में जिला स्तर पर युक्तियुक्तकरण कलेक्टर के द्वारा किया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग के हाईस्कूलों एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों के लिए संचालक लोक शिक्षण तथा आदिम जाति कल्याण विभाग के हाईस्कूलों एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों के शिक्षकों का युक्तिकरण आयुक्त आदिम जाति विकास विभाग द्वारा किया जाएगा।
युक्तियुक्तकरण के अंतर्गत संबंधित शिक्षक को स्थानांतरण आदेश प्राप्त होते ही कार्यमुक्त माना जाएगा और सात दिन के भीतर उसे अपने नये पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना होगा।
उद्योगों के हित में महत्वपूर्ण फैसले :-
औद्योगिक नीति 2004-09 के अंतर्गत विशेष थ्रस्ट सेक्टर उद्योगों की श्रेणी में 10 नये उद्योगों को शामिल किया जाएगा जो इस प्रकार है :-
फलाई एश उत्पाद, रेडीमेड गारमेंटस, सिंगल सुपर फास्फेट, कागज उद्योग, टेक्सटाईल (स्पिनिंग, वीवींग, पावरलूम एवं फेब्रिक्स एवं अन्य प्रक्रिया) शत-प्रतिशत निर्यातक उद्योग, बायोडीजल उत्पादन, कोल्ड रोल्ड स्ट्रिप्स प्रोफाईल्स एवं पाईप फिटिंग, वैगन कोच स्पेयर्स एवं फिटिंग और कटिंग टूल डाइज एवं फिक्चर्स।
इन उद्योगों को विशेष थ्रस्ट सेक्टर के अंतर्गत रियायतें इस प्रकार होंगी ब्याज अनुदान के अंतर्गत लघु उद्योगों की श्रेणी में विशेष थ्रस्ट सेक्टर के अंतर्गत आने वाले उद्योगों को पांच वर्ष की अवधि के लिए कुल भुगतान किए गए ब्याज का 75 प्रतिशत अधिकतम दस लाख रूपए वार्षिक अनुदान दिया जाएगा। अभी सामान्य उद्योगों के लिए यह कुल भुगतान का 40 प्रतिशत अधिकतम पांच लाख देय है। अति पिछड़े अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों में विशेष थ्रस्ट सेक्टर के अंतर्गत आने वाले उद्योगों को ब्याज अनुदान पांच से बढ़ाकर सात वर्ष कर दिया गया है। मध्यम वृहद उद्योगों की श्रेणी में आने वाले उद्योगों को ब्याज अनुदान 5 से बढ़ाकर 7 वर्ष और छूट की अधिकतम सीमा 20 लाख रूपए वार्षिक से बढ़ाकर 40 लाख रूपए की गई है।
2.    अधोसंरचना लागत-स्थायी पूंजी निवेश अनुदान -
लघु उद्योगों की श्रेणी में आने वाले थ्रस्ट सेक्टर के उद्योगों को सामान्य क्षेत्रों में सकल पूंजी निवेश का 25 प्रतिशत अधिकतम 25 लाख रूपए देय है। मध्यम एवं वृहद श्रेणी के उद्योगों को सामान्य क्षेत्र सकल पूंजी निवेश का 35 प्रतिशत अधिकतम 7 वर्ष के वाणिज्यिक कर भुगतान की राशि अनुदान के रूप में दिया जाएगा। वर्तमान में यह 25 प्रतिशत और पांच वर्ष के लिए देय है। अति पिछड़े अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्र में सकल पूंजी निवेश का 45 प्रतिशत अधिकतम 9 वर्ष के वाणिज्यिक कर भुगतान की राशि देय है।
3.    विद्युत शुल्क से छूट:-
लघु एवं मध्यम उद्योगों की श्रेणी में सामान्य क्षेत्र में विशेष थ्रस्ट सेक्टर में आने वाले उद्योगों को छूट की सीमा 10 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दी गई है।
4.    प्रवेश कर से छूट-
लघु, मध्यम एवं मेगा प्रोजेक्ट को सामान्य क्षेत्रों में प्रवेश कर से छूट 5 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष और अति पिछड़े अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में 7 वर्ष से बढ़ाकर 9 वर्ष की गई है।
5.    औद्योगिक क्षेत्रों में भू-आवंटन में भू-प्रीमियम में छूट-
औद्योगिक क्षेत्रों में भू-आवंटन में भू-प्रीमियम पर विशेष थ्रस्ट सेक्टर के अंतर्गत आने वाले लघु एवं मध्यम-वृहद उद्योगों को भू-प्रब्याजि में 50 प्रतिशत की छूट दी गई है।
पांच राजस्व जिलों में जिला एवं सत्र न्यायालयों की स्थापना
पांच राजस्व जिलों, उत्तर बस्तर (कांकेर), कोरिया, महासमुंद, धमतरी एवं जांजगीर-चांपा में नये सिविल जिला एवं सत्र न्यायालय की स्थापना का निर्णय। जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पांच पदों की स्वीकृति।
तबादला नीति वर्ष 2006-07 का अनुमोदन    

मंत्रि-परिषद के निर्णय      

                                                            रायपुर 20 जून 2006

    राज्य मंत्रि-परिषद की आज यहां मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में निम्नानुसार निर्णय लिए गए:-

छत्तीसगढ़ में अपारम्परिक ऊर्जा स्रोतों विशेषकर पवन ऊर्जा से विद्युत उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए ''पवन ऊर्जा नीति'' का अनुमोदन किया गया। पवन ऊर्जा के विकास हेतु नोडल एजेंसी छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (क्रेडा) होगी, जो पवन ऊर्जा की संभावनाओं का पता लगाने के लिए पवन ऊर्जा अध्ययन कराएगी। पवन ऊर्जा अध्ययन हेतु निजी इकाईयों की सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाएगा। भारत सरकार के अपारम्पारिक ऊर्जा स्रोत मंत्रालय में पंजीबध्द एवं वायु अध्ययन में रूचि रखने वाली इकाई किसी भी इकाई को राज्य में पवन ऊर्जा अध्ययन की अनुमति दी जाएगी।
क्रेडा द्वारा चिन्हाकिंत पात्र कार्य स्थल पर पवन ऊर्जा संयंत्र की स्थापना हेतु खुली निविदा के माध्यम से निवेशक का चयन किया जाएगा, किन्तु उन्हीं इकाईयों के वे ही निवेशक या इकाई संयंत्र स्थापना हेतु अधिकृत होंगे, जिन्हें देश में कम से कम तीन मेगावाट क्षमता के वायु ऊर्जा चलित संयंत्र स्थापना का अनुभव हो। ग्रिड इंटरफेसिंग और संधारण का कार्य छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल के मापदण्डों के अनुसार पात्र इकाई को स्वयं के व्यय पर करना होगा। अनुरोध करने पर यह कार्य राज्य विद्युत मंडल द्वारा निर्धारित दरों पर भी किया जा सकेगा। संयंत्र से उत्पादित विद्युत क्रय का प्रथम अधिकार छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित दरों पर राज्य शासन या उसके द्वारा नामांकित एजेंसी का होगा। इनके द्वारा विद्युत क्रय नहीं करने पर तीसरे पक्ष को विद्युत ब्रिकी के लिए निवेशक स्वतंत्र होगा। पवन ऊर्जा संयंत्र द्वारा उत्पादित विद्युत ग्रिड में पारेषण छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित दर पर किया जाएगा।

 
पवन ऊर्जा संयंत्र हेतु इकाई को शासकीय भूमि के उपयोग का अधिकार 30 वर्ष या परियोजना अवधि जो पहले हो, के लिए प्रदाय किया जाएगा। निजी भूमि पर किसी इकाई द्वारा संयंत्र की स्थापना किए जाने पर भूमि स्वामी को पांच हजार रूपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से भू-भाटक क्षतिपूर्ति दिया जाएगा। परियोजना के लिए सभी विभागों से आवश्यक स्वीकृतियां छत्तीसगढ़ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन अधिनियम के तहत दी जाएंगी। पवन ऊर्जा से विद्युत उत्पादन करने वाली इकाईयां राज्य की उद्योग नीति के तहत नये उद्योगों को दी जाने वाली सभी रियायतों की पात्र रहेंगी।
बैठक में लिए गए एक अन्य निर्णय के अनुसार छत्तीसगढ़ मंत्री (वेतन तथा भत्ता ) अधिनियम 1972 एवं छत्तीसगढ़ मंत्री (यात्रा तथा दैनिक भत्ता ) नियम 1972 के नियम 10 के उपनियम के खंड पांच में संशोधन किया गया। इसके अनुसार मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्यमंत्री, उपमंत्री और संसदीय सचिवों के हवाई यात्रा में एक अनुरक्षक के साथ प्रति वित्तीय वर्ष में पांच बार आने-जाने के प्रावधान को बढ़ाकर दस बार किया गया है।      
 

 

केबिनेट का निर्णय

      जगदलपुर मेडिकल कॉलेज के लिए कंसलटेन्ट नियुक्त किया जाएगा

             रायपुर 04 जुलाई 2006

    राज्य शासन द्वारा जगदलपुर में खोले जा रहे मेडिकल कॉलेज के लिए 'इंटर नेशनल कंसोरटियम फॉर मेडिकल एजुकेशन एण्ड रिसर्च (आई.सी.एम.ई.आर.) नई दिल्ली को कंसलटेन्ट नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय कल रात यहां मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित केबिनेट की बैठक में लिया गया।

इस निर्णय के अनुसार कंसलटेन्ट छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर के पैटर्न पर नियुक्त किया जाएगा। सिम्स में छह प्रतिशत परियोजना व्यय पर नई दिल्ली की हॉस्पिटेक मैनेजमेन्ट कन्सलटेन्ट प्रायवेट लिमिटेड नामक संस्था को कन्सलटेन्ट नियुक्त किया गया है जिसके  सहयोग से सिम्स द्वारा बिलासपुर में पिछले चार वर्षों तक मेडिकल कॉलेज के संचालन के लिए अनुमति प्राप्त करते हुए पांचवे वर्ष के लिए भी इस वर्ष अनुमति प्राप्त कर ली गयी है। कन्सलटेन्ट के सहयोग से बिलासपुर में सिम्स द्वारा मेडिकल कॉलेज का संचालन सफलता पूर्वक किया जा रहा है।
इसे ध्यान में रखकर केबिनेट द्वारा बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में भी शासकीय मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने के लिए कन्सलटेन्ट नियुक्त करने का फैसला किया गया है। कार्य के महत्व एवं शासन की प्राथमिकता को देखते हुए आई.सी.एम.ई.आर. संस्था को छह प्रतिशत परियोजना व्यय पर कंसलटेन्ट नियुक्त किया जाएगा। कंसलटेन्ट द्वारा मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया के मापदंड़ों को पूर्ण करने के लिए आवश्यक प्राध्यापकों, सह-प्राध्यापकों तथा अन्य टीचिंग स्टॉफ की व्यवस्था सहित भवन निर्माण के लिए आवश्यक ड्राइंग, डिजाइनिंग एवं आर्किटेक्चरल सेवाएं भी उपलब्ध करायी जाएगी। समय-समय पर मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया के सफल निरीक्षण के लिए भी कंसलटेन्ट जवाबदार होंगे। प्राध्यापकों सह-प्राध्यापकों, सहायक प्राध्यापकों एवं अन्य टीचिंग स्टाफ को शासकीय वेतनमान के अतिरिक्त, बाजार-दर के अन्तर की राशि का भुगतान स्व-शासी समिति द्वारा एक्चुअल बेसिस पर किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि जगदलपुर में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एन.एम.डी.सी.) के सहयोग से मेडिकल कॉलेज स्थापना के लिए राज्य सरकार और एन.एम.डी.सी. के बीच विगत एक जुलाई को एम.ओ.यू. भी हो चुका है। जन-प्रतिनिधियों के अनुरोध पर इस मेडिकल कॉलेज की स्थापना का निर्णय विगत 09 सितम्बर 2004 को कांकेर (उत्तर बस्तर) में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बस्तर आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में लिया गया था। मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया के निरीक्षण दल इस समय इस मेडिकल कॉलेज के तीसरे निरीक्षण के लिए छत्तीसगढ़ प्रवास पर है। राज्य शासन द्वारा उन्हें जगदलपुर प्रवास के लिए अपने विमान द्वारा भेजा गया है। मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को और मुख्य सचिव श्री आर.पी.बगाई ने केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव को पत्र भेजकर जगदलपुर में मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने की अनुमति शीघ्र प्रदान करने का अनुरोध किया है।      
 

केबिनेट के फैसले      

                                      बैठक दिनांक 25 अगस्त 2006      

     

  •    शिक्षाकर्मियों की भर्ती में साक्षात्कार की अनिवार्यता समाप्त
  •    रतनजोत और बायोडीजल के लिए जमीन अब संयुक्त उपक्रमों को
  •    आयुर्वेदिक डॉक्टरों की संविदा नियुक्ति सहित कुल 06 अहम् फैसले

1. शिक्षाकर्मियों की भर्ती में साक्षात्कार की अनिवार्यता समाप्त। शिक्षाकर्मी नियम 1997 संशोधित। साक्षात्कार में चयन समिति के सदस्यों द्वारा दिए जाने वाले 07 अंकों का प्रावधान खत्म। ये अंक अब आवेदकों की योग्यता और अनुभव में जोड़े जाएंगे। इस प्रकार अब शिक्षाकर्मियों का चयन मेरिट के आधार पर होगा। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष शिक्षाकर्मी वर्ग-एक, दो और तीन के साढ़े ग्यारह हजार पदों पर भर्ती प्रस्तावित है।
2. रतनजोत और बायो-डीजल के लिए सरकारी जमीन के आवंटन नियमों में संशोधन। अब शासकीय भूमि किसी निजी निवेशक को अकेले नहीं, बल्कि शासकीय संस्था की भागीदारी वाले संयुक्त उपक्रम को दी जाएगी। इसके लिए विगत 03 सितम्बर 2005 को राजपत्र में अधिसूचित नियम 2005 को आज की बैठक में संशोधित करने का फैसला। पूर्व में निजी संस्थाओं को दो सौ हेक्टेयर तक भूमि आवंटित करने का प्रावधान था, जो अब समाप्त हो जाएगा। संयुक्त उपक्रमों को भूमि बीस वर्ष के लिए लीज पर दी जाएगी, जिसे दस वर्ष और बढ़ाया जा सकेगा। संयुक्त उपक्रमों में शासकीय संस्थाओं की 26 प्रतिशत अनिवार्य भागीदारी होगी। आवंटित भूमि के लिए संयुक्त उपक्रमों से प्रति हेक्टेयर की दर से निर्धारित वार्षिक किराया और प्रति हेक्टेयर पांच हजार रूपए की वार्षिक सुरक्षा निधि भी प्राप्त की जाएगी। किराया प्रथम एक वर्ष के लिए पांच सौ रूपए, दो वर्ष से पांच वर्ष के लिए 625 रूपए छह से सात वर्ष के लिए 900 रूपए और सात वर्ष बाद 1400 रूपए, प्रति हेक्टेयर की दर से लिया जाएगा। प्रत्येक दस वर्ष में पट्टे का नवीनीकरण अनिवार्य होगा।
3. आयुर्वेदिक डॉक्टरों के 185 पदों पर एक माह के भीतर संविदा नियुक्ति होगी। चयनितों को आठ हजार रूपए का तयशुदा मासिक वेतन दिया जाएगा।
4. तत्कालीन अविभाजित मध्यप्रदेश के समय अनुभव के आधार पर दवा वितरण का काम करने वाली फार्मासिस्टों का पंजीयन अब छत्तीसगढ़ में भी किया जा सकेगा। मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन के बाद फार्मेसी काउंसिल ने छत्तीसगढ़ सरकार को यहां के 4894 फार्मासिस्टों की सूची सौंपी थी, जिनमें सिर्फ 718 ही बी. फार्मा और डी. फार्मा हैं। बाकी लोगों का पंजीयन सिर्फ अनुभव के आधार पर है, जिनके पंजीयन के लिए ट्रिब्यूनल बनाया गया था, जिसे हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था। उसके बाद से पंजीयन की प्रक्रिया रूकी हुई थी। मध्यप्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ को लिखित में सूचना दी है कि फार्मासिस्टों के लायसेंसों के सारे रिकार्ड उपलब्ध नहीं है। इसलिए पुराने लायसेंसों की जांच में दिक्कत हो रही है। छत्तीसगढ़ केबिनेट की आज की बैठक में इन समस्याओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। इसके तहत तत्कालीन अविभाजित मध्यप्रदेश के समय अनुभव के आधार पर दवा वितरण का काम करने वाले फार्मासिस्टों का पंजीयन छत्तीसगढ़ में भी किया जा सकेगा।
5. नक्सल प्रभावित इलाकों में किसी दुर्घटना में विशेष सुरक्षा अधिकारी (एस.पी.ओ.) की मृत्यु पर दी जाने वाली मुआवजा राशि एक लाख रूपए से बढ़ाकर दो लाख रूपए करने का फैसला।
6. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत वन-भूमि प्रत्यावर्तन के मामलों में प्रत्याशा मूल्य वसूली में छूट की व्यवस्था खत्म करने का निर्णय। तत्कालीन छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद द्वारा 12 नवम्बर 2002 को लिए गए निर्णय में यह छूट देने का प्रावधान किया था, जिसे आज की बैठक में निरस्त कर दिया गया।    

 

 केबिनेट के फैसले

            इस वर्ष 40 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य-कोरबा में शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज

                    रायपुर, दिनांक 19 सितम्बर 2006       

  •  खरीफ विपणन वर्ष 2006-07 मेंं राज्य शासन द्वारा सहकारी समितियों के माध्यम से चालीस लाख मीटरिक टन धान और 15 हजार मीटरिक टन मक्का, समर्थन मूल्य पर खरीदने का लक्ष्य। धान खरीदी एक नवम्बर 2006 से शुरू होकर 31 जनवरी 2007 तक चलेगी, लिकिंग प्रक्रिया के तहत खरीदी 15 फरवरी तक होगी। धान खरीदी के लिए राज्य सरकार रिजर्व बैंक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम से कुल 3017 करोड़ रूपए का ऋण लेगी। इस वर्ष समर्थन मूल्य मोटे धान के लिए 580 रूपए, उत्तम श्रेणी के धान के लिए 610 रूपए और मक्का के लिए 540 रूपए होगा। धान खरीदी पर केन्द्र सरकार 40 रूपए प्रति क्ंविटल बोनस देगी। राज्य की एक हजार 333 प्राथमिक सहकारी समितियों द्वारा उपार्जन केन्द्र बनाकर धान की खरीदी की जाएगी। सांसदों, विधायकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सुझाव पर जिला कलेक्टर द्वारा धान खरीदी के लिए उप केन्द्र भी स्वीकृत किए जा सकेंगे।
  •  प्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जाति आयोग का गठन किया जाएगा। इसमें एक अध्यक्ष और दो सदस्य होंगे।
  •  औद्योगिक शहर कोरबा में शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की जाएगी। इसके लिए तकनीकी शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में स्व-शासी समिति का गठन किया जाएगा। कोरबा में प्रस्तावित इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना में 60 करोड़ रूपए की लागत अनुमानित है। शासन द्वारा इसकी स्थापना के लिए कोरबा के औद्योगिक प्रतिष्ठानों का भी सहयोग लिया जाएगा।
  •  राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की परिकल्पना के अनुरूप रायपुर जिले के विकासखण्ड मुख्यालय आरंग के नजदीक 'पुरा' परियोजना के तहत 21 गांवों को शामिल कर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण बनाया जाएगा। इन गांवों में शहरों की तरह सभी बुनियादी सुविधाएं देने की कोशिश की जाएगी। इस परियोजना में गोढ़ी, मुरेठी, मुनेसर, जुगेसर, सोनपैरी, कुटेसर आदि गांव शामिल होंगें। इस परियोजना के लिए राज्य सरकार पांच करोड़ रूपए देगी। शेष राशि केन्द्र सरकार द्वारा दी जाएगी।
  •   महिलाओं की अनुकम्पा नियुक्ति के प्रकरणों में टायपिंग और कम्प्यूटर परीक्षा पास करने की अनिवार्यता से छूट मिलेगी। इन पदों पर नियुक्ति से पहले सरकार उन्हें प्रशिक्षण दिलाएगी। पटवारी और पंजीयन लिपिक जैसे कार्यपालिक पदों पर भी अनुकम्पा नियुक्ति दी जाएगी।
  •  रायपुर जिले के तहसील मुख्यालय गरियाबंद में अतिरिक्त सत्र न्यायालय की स्थापना की जाएगी।
  •  नक्सली क्षेत्रों में पुलिस महानिरीक्षक के दो नये पद स्वीकृत किए जाएंगे।      

 

  केबिनेट के फैसले  

शादी पंजीयन को मंजूरी       
रायपुर, दिनांक 30 अक्टूबर 2006      

      राज्य में विवाह पंजीयन प्रस्ताव को मंजूरी। विवाह पंजीयन नियम सभी जातियों, धर्मो और सम्प्रदायों को मानने वाले लोगों पर समान रूप से लागू होगा। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की सलाह पर लिया गया है। नियम जल्द लागू होगा। उसके बाद अगर किसी ने विवाह पंजीयन नहीं कराया तो उसके विवाह को कानूनी मान्यता नहीं होगी। ऐसे लोगों को सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा। पूर्व में विवाह कर चुके लोग इस नियम से मुक्त रहेंगे।

             रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट

      प्रस्तावित नया रायपुर उप-नगर क्षेत्र के किसानों को राहत देते हुए सरकार ने उन किसानों के लिए रजिस्ट्रेशन शुल्क माफ करने फैसला किया जो मुआवजा राशि से कहीं और जाकर भू-खंड खरीदना चाहेंगे। सरकार प्रभावित किसानों के लिए मुआवजा तय कर चुकी है और अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

             गरीबी रेखा सूची का प्रकाशन जल्द

      राज्य में गरीबी रेखा सूची का प्रकाशन जल्द किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2002-03 में गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले लोगों का सर्वे किया गया था, लेकिन देश भर में गरीबी रेखा सर्वे पर स्टे लगा दिया गया था, जिससे पूरे देश में गरीबी रेखा से संबंधित योजनाओं और सुविधाओं से वास्तविक गरीब वंचित हो गए थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने स्टे हटा लिया है, तो छत्तीसगढ़ सरकार भी शीघ्र इस सर्वे के आधार पर गरीबी रेखा सूची का प्रकाशन करेगी।

            बैलाडीला का खनिज पट्टा

      लगभग 354 मिलियन टन लौह अयस्क वाले बैलाडीला डिपॉजिट क्रमांक 13 का खनिज पट्टा राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) को 51 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (सीएमडीसी) को 49 प्रतिशत के मान से संयुक्त क्षेत्र की कंपनी (जेव्हीसी) के रूप में देने की अनुशंसा केन्द्र सरकार को भेजी जाएगी। राज्य शासन की पहल पर हाल ही में एनएमडीसी और सीएमडीसी के बीच जेव्हीसी गठित करने के एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जा चुके है। इस डिपाजिट से प्रतिवर्ष 10 मिलियन टन लौह अयस्क का उत्खनन किया जाएगा। स्थानीय स्पांज आयरन और स्टील आयरन वाले उद्योगो को इसकी पूर्ति सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ की जाएगी। इससे राज्य के लघु और मध्यम उद्योग विशेष रूप से लाभान्वित होंगे। योजना के अनुसार इस डिपाजिट से अगले 4 वर्षों में उत्पादन प्रारंभ हो जाएगा।

             टाटा और एस्सार को लौह अयस्क

      बैलाडीला डिपाजिट क्रमांक 1 समूह के 2500 हे. क्षेत्र की पूर्वेक्षण अनुज्ञप्ति बस्तर जिले में प्रस्तावित टाटा स्टील प्लांट और बैलाडीला डिपाजिट 3 समूह के 2477 हे. क्षेत्र की पूर्वेक्षण अनुज्ञप्ति दक्षिण बस्तर में प्रस्तावित एस्सार स्टील उद्योग को देने की अनुशंसा केन्द्र से की जाएगी। इन अनुशंसाओं के स्वीकृत होने पर उनकी लगभग 20 वर्ष की लौह अयस्क की आवश्यकता की पूर्ति हो सकेगी। सरकार ने इन दोनों कंपनियों के साथ हुए एमओयू में यह पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि दोनों कंपनियां बस्तर के लौह अयस्क का उपयोग केवल बस्तर अंचल में ही कर सकेंगी। उन्हें लौह अयस्क बाहर ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

     

केबिनेट के फैसले      

      केबिनेट का ऐतिहासिक फैसला  

ऋण मुक्ति से हजारों बुनकरों को मिलेगा फायदा
      
शासन द्वारा अदा की जाएगी 6.41 करोड़ की बकाया ऋण राशि

                    रायपुर, दिनांक 08 दिसम्बर 2006

            राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ के हजारों बुनकरों को कर्ज के बोझ से मुक्ति दिलाने का ऐतिहासिक निर्णय लेकर हाथकरघा वस्त्र उद्योग को नया जीवन देने का फैसला किया है। प्रदेश की 151 हाथकरघा बुनकर सहकारी समितियों को शासन के इस फैसले का लाभ मिलेगा। इन समितियों की छह करोड़ 41 लाख रूपए की ऋण राशि राज्य शासन द्वारा अदा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में आयोजित केबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

     प्रदेश सरकार के इस फैसले से बुनकर सहकारी समितियों को अपने व्यवसाय की प्रगति के लिए दोबारा ऋण लेने की सुविधा मिल सकेगी। इस निर्णय से 77 कार्यशील, 28 अकार्यशील और 46 परिसमापन वाली समितियों को लाभ मिलेगा। इनमें से चार कालातीत समितियों-छुई खदान बुनकर समिति पर 66 लाख 91 हजार, बिलासपुर बुनकर समिति पर 53 लाख रूपए, दुर्ग जिला बुनकर सहकारी संघ पर 71 लाख 38 हजार रूपए और छत्तीसगढ़ बुनकर सहकारी समिति 35 लाख 83 हजार रूपए का कर्ज बकाया था। बैठक में अकार्यशील और परिसमापन वाली समितियों को एक वर्ष के भीतर कार्यशील करने के लिए भी आवश्यक पहल करने का निर्णय लिया गया।
 

मंत्रि परिषद के निर्णय_2007

 केबिनेट के निर्णय

                   रायपुर, 03 जनवरी 2007

  •  मोटर यान अधिनियम 1998 की धारा 194 में वर्ष 2003 में हुए संशोधन को समाप्त करने का निर्णय। अब पुराना जुर्माना यानी निर्धारित क्षमता से अधिक भार ढोने पर दो हजार रूपए दण्ड और प्रति टन पर एक हजार रूपए का जुर्माना देय होगा। इस अधिनियम में 27 सितंबर 2003 को किए गए संशोधन के अनुसार ओवर लोडिंग पर निर्धारित क्षमता से अधिक लोडिंग पर तीन टन तक प्रति टन 600 रुपए तथा तीन टन से छह टन तक 300 रुपए प्रति टन जुर्माने का प्रावधान किया गया था। छह टन से अधिक ओवर लोड होने पर 500 रूपए प्रति टन जुर्माना तय था।
  •  वर्ष 1991 से 2001 तक जनगणना के कार्य में अस्थायी तौर पर लगे कर्मचारियों को स्थायी किया जाएगा। इससे सौ से अधिक कर्मचारी लाभान्वित होंगे।
  •  नगर सैनिकों के लिए नगर सेना से पुलिस बल में आरक्षकों की भर्ती में 15 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया जाएगा। उन्हें वन और आबकारी में होने वाली भर्तियों में दस-दस प्रतिशत और जेल प्रहरियों की भर्ती में 15 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।

मंत्रि परिषद के निर्णय

             रायपुर, 30 अप्रैल 2007     

  • मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित मंत्रि परिषद की बैठक में सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के हितग्राहियों को व्यक्तिगत पारिवारिक शौचालयों के सुपर स्ट्रक्चर के निर्माण के लिए अतिरिक्त अनुदान प्रदान करने, नया रायपुर परियोजना के लिए आपसी करार द्वारा निजी भूमि खरीदने पर न्यू रायपुर डेव्हलपमेन्ट अथारिटी (नारडा) को मुद्रांक शुल्क से छूट की अवधि मार्च 2007 से बढ़ाकर मार्च 2008 करने सहित अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
  • मंत्रि परिषद के फैसले के मुताबिक राज्य में अब सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत व्यक्तिगत पारिवारिक शौचालयों के पक्के सुपर स्ट्रक्चर बनवाने के लिए गरीबी रेखा (बी.पी.एल.) श्रेणी के परिवारों को एक-एक हजार रूपये और गरीबी रेखा से ऊपर (ए.पी.एल.) श्रेणी वालों को छह: सौ रूपए प्रति परिवार की दर से अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। इस अभियान के तहत व्यक्तिगत पारिवारिक शौचालय निर्माण के लिए जारी भारत सरकार के दिशा-निर्देशों को यथावत रखते हुए राज्य शासन द्वारा यह राशि दी जाएगी।
  • अचयनित आपाती सहायक प्राध्यापकों के नियमितीकरण के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। कुल 128 में से 104 अचयनित आपाती सहायक प्राध्यापकों को आदेश जारी होने के दिनांक से नियमित किया जा चुका था, शेष 24 में से 2 की मृत्यु हो जाने के कारण तथा 2 का अन्य कारणों से विचारण नही किया गया। शेष आपाती सहायक प्राध्यापकों को न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता में छूट देते हुए इन्हें 24 दिसम्बर 1998 से नियमित करने का निण्र्ाय लिया गया। छत्तीसगढ़ उच्चतर न्यायिक सेवा नियम 2006 में उच्च न्यायालय द्वारा परीक्षा लिए जाने की प्रक्रिया में उच्च न्यायालय द्वारा किए गए संशोधन को मंत्रि परिषद द्वारा अपना अनुसमर्थन दिया गया। उच्चतर न्यायिक सेवा के सदस्यों का चयन उच्च न्यायालय द्वारा किया जाता है।
  • मंत्रि परिषद की बैठक में वनों के संरक्षण एवं विकास में जन सहयोग प्राप्त करने के लिए राज्य में गठित वन सुरक्षा समिति एवं ग्राम वन समिति के स्थान पर अब एक ही 'वन प्रबंध समिति' रखने का निर्णय लिया गया।
  • नया रायपुर परियोजना हेतु आपसी करार द्वारा निजी भूमि क्रय करने पर न्यू रायपुर डेव्हलपमेन्ट अथारिटी (नारडा) को मुद्रांक शुल्क से दी गयी छूट की अवधि मार्च 2007 से बढ़ाकर मार्च 2008 करने का निर्णय भी केबिनेट की बैठक में लिया गया। कुटुम्ब न्यायालय के लिए उच्च न्यायिक सेवा के न्यायाधीशों के तीन पद - जांजगीर-चाम्पा, राजनांदगांव और कोरिया के लिए सृजित करने का निर्णय लिया गया।
  • बैठक में विशेष थ्रस्ट सेक्टर उद्योगों के संबंध में राज्य शासन द्वारा 14 जुलाई 2006 को प्रकाशित अधिसूचना को औद्योगिक नीति 2004-09 के लागू होने के दिनांक एक नवम्बर 2004 से प्रभावशील करने का निर्णय लिया गया। इसके अंतर्गत (1) फ्लाई एश उद्योग (सीमेंट को छोड़कर), (2) रेडीमेड गारमेन्ट्स, (3) सिंगल सुपर फॉस्फेट, (4)कागज उद्योग, (5) टेक्सटाईल्स (स्पिनिंग, वीविंग, पावरलूम एवं फ्रेबिक्स व अन्य प्रक्रिया) (6) शत्-प्रतिशत निर्यातक उद्योग (7) बायोडीजल उत्पादन (8) कोल्ड रोल्ड स्ट्रिप्स फोफाईल्स एवं पाईप फिटिंग (9) वैगन कोच स्पेयर्स एवं फिटिंग और (10) कटिंग टूल्स डाईज एवं फिक्चर्स उद्योगों को एक नवम्बर 2004 की स्थिति से भूतलक्षी प्रभाव से विशेष थ्रस्ट सेक्टर उद्योग की मान्यता मिलेगी।      

मंत्रिपरिषद की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय

 छत्तीसगढ़ पर्यटन प्रोत्साहन योजना 2006 का अनुमोदन

नवीन पर्यटन परियोजनाओं के लिए 20 लाख रूपए तक अनुदान

राज्य में घरेलू विमान सेवा शुरू करने वाले निवेशकों को

न्यूनतम यात्री उपलब्ध होने की गारंटी मिलेगी

राज्य शासन की तबादला नीति वर्ष 2007-08 भी अनुमोदित


 
रायपुर, 07 जून 2007

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज शाम यहां मंत्रालय में आयोजित केबिनेट की बैठक में छत्तीसगढ़ पर्यटन प्रोत्साहन योजना 2006 का कुछ संशोधनों के साथ अनुमोदन कर दिया गया। एक अप्रैल 2006 से लागू यह योजना 31 मार्च 2016 तक प्रभावशील रहेगी। बैठक में राज्य शासन की स्थानांतरण नीति वर्ष 2007-08 का भी अनुमोदन किया गया। इसके तहत राज्य स्तरीय तबादले 16 जून से 30 जून तक और जिला स्तरीय तबादले एक जुलाई से पन्द्रह जुलाई 2007 तक होंगे। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के स्थानांतरण जिला स्तरीय होंगे जिनकी संख्या अधिकतम 10 प्रतिशत होगी। प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी के कार्यपालिक पदों पर कार्यरत अधिकारियों आौर कर्मचारियों के स्थानांतरण राज्य स्तरीय होंगे। इनकी भी संख्या अधिकतम 10 प्रतिशत होगी।
  • बैठक में छत्तीसगढ़ पर्यटन प्रोत्साहन योजना 2006 पर विस्तृत चर्चा के बाद उसे आंशिक संशोधनों के साथ अनुमोदित किया गया। राज्य की पर्यटन नीति में निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन, अधोसंरचना विकास पर्यटन परियोजनाओं को उद्योगों के समतुल्य सहायता सुविधा, विद्युत दरों में रियायत, पर्यटन परियोजनाओं में निजी पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह प्रोत्साहन योजना लागू की गयी है। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार नवीन पर्यटन परियोजनाओं के शीघ्र अनुमोदन और उनमें गतिरोध दूर करने के उद्देश्य से एकल खिड़की प्रणाली के अंतर्गत राज्य शासन के वरिष्ठ अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति के गठन का भी प्रावधान किया गया है। इस समिति के माध्यम से प्रकरणों में गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेकर त्वरित कार्रवाई की जा सकेगी, जो राज्य शासन का अंतिम अनुमोदन माना जाएगा। अधिसूचित क्षेत्र के जिलों में विलासिता कर में दस वर्ष की छूट दी जाएगी। अन्य राज्यों से छत्तीसगढ़ में अस्थायी तौर पर आने वाले छत्तीस सीटर पर्यटक यात्री वाहनों को परिवहन विभाग द्वारा मासिक करों की प्रचलित दर में सामान्य क्षेत्र में 50 प्रतिशत तक और अनुसूचित जनजाति क्षेत्रपिछड़े क्षेत्र में 75 प्रतिशत तक छूट मिलेगी। इसके अनुसार आकस्मिक तौर पर तीन दिवस के लिए प्रचलित 12, 600 रूपए के स्थान पर सामान्य क्षेत्र में 6,300 रूपए और अनुसूचित जनजातिपिछड़े क्षेत्र में 3,150 रूपए की राशि संबंधित पर्यटक वाहन मालिक की ओर से देय होगी। आकस्मिक तौर पर छह दिवस के लिए प्रचलित 25,200 रूपए के मासिक कर के स्थान पर सामान्य क्षेत्र में 12,600 और अनुसूचित जनजाति पिछड़ा क्षेत्र में 6, 300 रूपए देय होंगे। सात दिवस तक के लिए नियमित संचालन मानकर एक माह का कर जो 31,500 रूपए प्रचलित है वह सामान्य क्षेत्र में 15,750 रूपए और अनुसूचित जनजातिपिछड़ा क्षेत्र में 7,875 रूपए देय होगा। छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा स्वीकृत अनुज्ञा पत्र के तहत मासिक कर की प्रचलित 28,000 रूपए की दर अधिसूचित क्षेत्र के जिलों में 25 प्रतिशत की छूट के हिसाब से 21 हजार रूपए होगी। छत्तीसगढ़ राज्य के भीतर घरेलू हवाई यातायात सेवा शुरू करने की इच्छुक वायुयान कम्पनियों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें न्यूनतम यात्री उपलब्ध होने की गारंटी दी जाएगी। अधिसूचित क्षेत्रों के जिलों में पर्यटन के विकास के लिए निजी निवेशकों को नवीन परियोजना के पूंजीगत व्यय का पन्द्रह प्रतिशत अनुदान मिलेगा जो अधिकतम 20 लाख रूपए होगा। अधिसूचित क्षेत्र के जिलों में ही होटलमोटल को विद्युत शुल्क से छूट भी मिलेगी।
  • मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के अनुसार नक्सली हिंसा में शहीद अविवाहित पुलिस कर्मचारियों समेत अन्य विभागों के भी शहीद अविवाहित कर्मचारियों के किसी एक आश्रित (भाईबहन) को शासकीय सेवा में नियुक्ति देने पर राज्य शासन द्वारा विचार किया जा सकेगा, बशर्ते उसके परिवार में कोई और कमाऊ सदस्य ना हो।

मंत्रिपरिषद का निर्णय

           रायपुर, 02 जुलाई 2007

      मंत्रिपरिषद की बैठक आज यहां मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। मंत्रिपरिषद कीA बैठक में निम्नलिखित निर्णय लिए गए।

अल्पकालीन सहकारी शाख संरचना के पुनरूज्जीवन हेतु भारत सरकार द्वारा प्रोफेसर ए. बैद्यनाथन की अध्यक्षता में गठित टास्कफोर्स की अनुशंसाओं को छत्तीसगढ़ में लागू करने हेतु आदर्श समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) करने का निर्णय लिया गया। यह एम.ओ.यू. राज्य शासन, केन्द्र शासन और नाबार्ड के मध्य किया जाना है। सहकारी बैंकों सहित जहां वैद्यनाथन कमेटी की अनुशंसा लागू होंगी, उनमें अन्य सभी सहकारी संस्थाओं में सभी जमाकर्ताओं एवं ऋण ग्राहकों को पूर्णमताअधिकार सदस्यता सुनिश्चित करना, जो पंजीयक द्वारा समय-समय पर जारी किए गए न्यूनतम जमा राशि एवं कालावधि के मानदण्ड के अध्यधीन होगा। सी.सी.एस. की किसी भी इकाई को किसी भी स्तर पर प्रवेश एवं निर्गमन की स्वतंत्रता हो एवं इसके परिचालन हेतु भौगोलिक सीमाओं का कोई कानूनी बंधन न हो, जहां राज्य शासन किसी सहकारी सोसायटी में अथवा सहकारी बैंक में उनके पेडअप कैपिटल के 25 प्रतिशत से अधिक इक्विटी रखता है तो ऐसी अधिक इक्विटी को राज्य शासन को उस सहकारी समिति अथवा सहकारी बैंक को अनुदान के रूप में देना होगा। राज्य स्तरीय क्रियान्वयन समिति (एस.एल.आई.सी.) द्वारा निर्णय लिए जाने के पश्चात शीघ्र राज्य शासन द्वारा ऐसी सहकारी समितियों के क्लोजर अथवा मर्जर पर उपयुक्त निर्णय लिया जाएगा, जो पैकेज के अन्तर्गत सहायता हेतु अपात्र हैं।
निवेशक यदि प्राथमिक सहकारी सोसायटी के अलावा राज्य सहकारी बैंक अथवा जिला सहकारी बैंकों की किसी अन्य समिति का प्रतिनिधित्व करता है तो समिति द्वारा 90 दिन से अधिक समय की बकायादारी करने पर उसे अपात्र घोषित किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति किसी बकायादार प्राथमिक कृषि सहकारी समिति का बकायादार रहा है अथवा पदधारक रहा है तो वह समिति अथवा बैंक जिसका भी हो के निदेशक मंडल में चुने जाने हेतु पात्र नहीं होगा, बशतर्ें वह एक वर्ष के भीतर अपने बकायों का निपटान करे। पंजीयक सहकारी संस्थाएं द्वारा राज्य सहकारी बैंक (ए.सी.बी.) एवं जिला सहकारी बैंक (सी.सी.बी.) के निदेशक मंडलों का अधिक्रमण छत्तीसगढ़ सोसायटी अधिनियम एवं छत्तीसगढ़ स्वायत्त अधिनियम के अन्य किसी क्लॉज के अन्तर्गत मात्र आर.बी.आई. के परामर्श से किया जाएगा। इसी प्रकार प्राथमिक कृषि सोसायटी के बोर्ड का अधिक्रमण पंजीयक सहकारी संस्थाएं द्वारा इन परिस्थितियों में किया जाएगा, यदि कोई सोसायटी तीन वर्ष तक लगातार घाटे में रहती है या यदि गंभीर वित्तीय अनियमिताएं या धोखाधड़ी पायी जाती है, या यदि इस बारे में कोई वैधानिक निर्देश है, या हमेशा कोरम में कमी रहती है। किसी भी सहकारी सोसायटी के बोर्ड की अवधि में पूर्व यथा समय किसी भी बोर्ड के अधिक्रमण के दो माह के भीतर चुनाव कराना सुनिश्चत करना होगा और यदि पंजीयक सहकारी संस्थाएं (आर.सी.एस.) द्वारा आवश्यक समझा जाता है तो अधिकतम छह माह तक बढ़ाया जा सकता है।       
      
निवेशक यदि प्राथमिक सहकारी सोसायटी के अलावा राज्य सहकारी बैंक अथवा जिला सहकारी बैंकों की किसी अन्य समिति का प्रतिनिधित्व करता है तो समिति द्वारा 90 दिन से अधिक समय की बकायादारी करने पर उसे अपात्र घोषित किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति किसी बकायादार प्राथमिक कृषि सहकारी समिति का बकायादार रहा है अथवा पदधारक रहा है तो वह समिति अथवा बैंक जिसका भी हो के निदेशक मंडल में चुने जाने हेतु पात्र नहीं होगा, बशतर्ें वह एक वर्ष के भीतर अपने बकायों का निपटान करे। पंजीयक सहकारी संस्थाएं द्वारा राज्य सहकारी बैंक (ए.सी.बी.) एवं जिला सहकारी बैंक (सी.सी.बी.) के निदेशक मंडलों का अधिक्रमण छत्तीसगढ़ सोसायटी अधिनियम एवं छत्तीसगढ़ स्वायत्त अधिनियम के अन्य किसी क्लॉज के अन्तर्गत मात्र आर.बी.आई. के परामर्श से किया जाएगा। इसी प्रकार प्राथमिक कृषि सोसायटी के बोर्ड का अधिक्रमण पंजीयक सहकारी संस्थाएं द्वारा इन परिस्थितियों में किया जाएगा, यदि कोई सोसायटी तीन वर्ष तक लगातार घाटे में रहती है या यदि गंभीर वित्तीय अनियमिताएं या धोखाधड़ी पायी जाती है, या यदि इस बारे में कोई वैधानिक निर्देश है, या हमेशा कोरम में कमी रहती है। किसी भी सहकारी सोसायटी के बोर्ड की अवधि में पूर्व यथा समय किसी भी बोर्ड के अधिक्रमण के दो माह के भीतर चुनाव कराना सुनिश्चत करना होगा और यदि पंजीयक सहकारी संस्थाएं (आर.सी.एस.) द्वारा आवश्यक समझा जाता है तो अधिकतम छह माह तक बढ़ाया जा सकता है।

 

मंत्रि परिषद के निर्णय     

रायपुर, 07 जुलाई 2007

           
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज शाम यहां मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए -

राज्य के शहरी निकायों को चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि में 30 प्रतिशत की वृध्दि करने का निर्णय लिया गया। अब अगले माह से नगरीय निकायों को चुंगी क्षतिपूर्ति जनसंख्या के मान से दी जाएगी। अभी तक लगभग 97 करोड़ 68 लाख रूपए की धनराशि इन्हें दी जा रही थी, जो अब बढ़कर लगभग 130 करोड़ रूपए हो जाएगी। इससे नगरीय निकायों को न केवल विकास कार्यों को करने में सुविधा होगी, बल्कि कुछ नगरीय निकायों को वेतन भत्ते आदि देने में जो असुविधा होती थी, वह भी दूर हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि इस निर्णय से राज्य की 72 नगर पंचायतों को काफी लाभ होगा, क्योंकि इन्हें चुंगी कर की क्षतिपूर्ति के रूप में अब तक पर्याप्त राशि नहीं मिल पा रही थी। यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य बनने के बाद इस दिशा में पहली बार प्रदेश सरकार ने नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के लिए इतना बड़ा कदम उठाया है।
भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना कवर्धा के विज्ञापित क्षेत्र में शेष बचे गन्ने की खरीदी और शक्कर रिकव्हरी प्रतिशत में गिरावट होने पर कारखाने को हानि से बचाने के लिए क्षति-पूर्ति हेतु वित्तीय अनुदान प्रदान किया जाएगा। इसके अंतर्गत राज्य शासन द्वारा कारखाने को 10 करोड़ 51 लाख रूपए की सहायता दी जाएगी। इसमें से 5 करोड़ 88 लाख रूपए कारखाने द्वारा किसानों से शेष बचे गन्ने की खरीदी के भुगतान के लिए होंगे। उल्लेखनीय है कि चालू वर्ष में कबीरधाम (कवर्धा) जिले के अधिसूचित क्षेत्र से 30 जून 2007 तक कुल 370582 मीटरिक टन गन्ना खरीदा गया। इसमें से कारखाने द्वारा 309350 टन गन्ने की पेराई की गयी। पेराई के बाद 61232 टन गन्ना शेष है।
राज्य शासन द्वारा सहकारी बैंकों से सम्बध्द किसानों को वर्ष 2007-08 में छह प्रतिशत की ब्याज दर पर कृषि ऋण उपलब्ध कराने के लिए पूर्व में लिए गए निर्णय के तहत आज की बैठक में कृषकों को सहकारी कृषि ऋणों (अल्पकालीन, मध्यमकालीन एवं दीर्धकालीन) पर ब्याज अनुदान नियम 2007 का कार्योत्तर अनुमोदन किया गया।

बैठक में छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई हेतु भिलाई स्टील प्लांट से 250 एकड़ जमीन प्राप्त करने के संबंध में बीएसपी द्वारा विश्वविद्यालय को यह भूमि उपलब्ध कराने तथा सहयोग राशि रूपए 50 करोड़ में से उक्त भूमि की राशि कम करते हुए शेष राशि विश्वविद्यालय को प्रदाय करने की सहमति मंत्रि परिषद ने व्यक्त की।

 

केबिनेट के निर्णय

        शिक्षाकर्मी वर्ग एक में भी सीधी भर्ती होगी

      रायपुर, 01 अगस्त 2007    

  •  शिक्षाकर्मियों के वििभन्न संवर्गों के रिक्त ग्यारह हजार 671 पदों की सीधी भर्ती की जाएगी। इसमें शिक्षाकर्मी (वर्ग एक संवर्ग के ) विषय विशेषज्ञों के साढ़े तीन हजार पद भी शामिल होंगे। अब तक शिक्षाकर्मी वर्ग एक के 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से तथा 50 प्रतिशत पद प्रमोशन से भरे जाते थे। लेकिन योग्य शिक्षाकर्मी नहीं मिलने से विषय विशेषज्ञों के पद बड़ी संख्या में रिक्त रह जाते है। इस वजह से राज्य सरकार ने शिक्षाकर्मी एक संवर्ग में सीधी भर्ती का निर्णय लिया। अब जितने पद प्रमोशन के होंगे उन्हें पहले भरा जाएगा। शेष रिक्त पदों के लिए सीधी भर्ती की जाएगी।
  •  राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अब सरकारी नौकरी दी जाएगी। इसके लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है। खेल मंत्री, खेल सचिव तथा सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव इसके सदस्य होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने परिपत्र जारी कर सभी विभागों से उत्कृष्ट खिलाड़ियों को नौकरी देने के लिए अपने सेवा नियमों में तीन महीने में संशोधन करने के निर्देश दिए है।
  •  बस्तर और सरगुजा में पदस्थ विकास आयुक्तों को राज्य सरकार ने वित्तीय, विकास और कल्याण के अधिकार प्रदान किए जाएंगे। दोनों संभागों के विकास आयुक्त अब विकास व कल्याण कार्यक्रमों का पर्यवेक्षण व निरीक्षण कर सकेंगे। उन्हें राजस्व मंडल का पदेन सदस्य भी बनाया गया है। आयुक्तों को जिला पंचायत और जनपद पंचायत का निरीक्षण, विकास व कल्याण विभाग में द्वितीय श्रेणी तक के तथा कार्यपालिक तृतीय श्रेणी के कर्मियों को दंडित करने का अधिकार तथा कुछ वित्तीय अधिकार भी सौंपे गए हैं।

 

केबिनेट के निर्णय

      रायपुर, 23 अगस्त 2007



  •  कर्मचारियों के हित में ब्रम्हस्वरूप कमेटी की सिफारशें लागू होंगी।
  •  नया हेलीकॉप्टर खरीदने का फैसला। इटली की अगुस्ता कम्पनी का हेलीकॉप्टर खरीदने पर मंत्रिमंडल ने सहमति दी। दो इंजनों वाला नया हेलीकॉप्टर सप्लाई करने के लिए कम्पनी ने 26 करोड़ 11 लाख रूपए का टेंडर भरा है।
  •  सहकारिता कानून की खामियों को दूर करने और सहकारी बैंक के संचालकों के विरूध्द कार्रवाई का कानूनी अधिकार प्राप्त करने के लिए छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिभार (नुकसान की प्रतिपूर्ति करने के लिए) अध्यादेश 2007 को अधिसूचित करने का फैसला। वर्तमान में जिस बैंक में शासन का अंशदान नहीं होता उसमें कार्रवाई का अधिकार शासन को नहीं होता।
  •  मंत्रालय सेवा के अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नति के लिए नियमित अर्हता में छूट मिलेगी।
  •  किसानों की समस्याओं के निराकरण के लिए राज्य कृषक कल्याण परिषद गठन करने का निर्णय । मुख्यमंत्री, परिषद के अध्यक्ष तथा कृषि मंत्री उपाध्यक्ष होंगे। परिषद में कुल चालीस सदस्य होंगे। परिषद में वित्त, जलसंसाधन, वन ग्रामीण विकास, राजस्व, ऊर्जा, सहकारिता तथा आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के मंत्री व सचिव, विभागाध्यक्ष और विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे। विशेषज्ञों में पांच राष्ट्रीय स्तर के और पांच राज्य स्तर के विशेषज्ञ होंगे। परिषद में प्रत्येक जिले से एक-एक सदस्य शामिल किया जाएगा। परिषद की बैठक छह माह में होगी।
  •  मछली नीति में संशोधन को मंजूरी, जिसके अनुसार पंजीकृत मछुआ समितियों को तालाब आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी।
  •  चिकित्सा शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष तथा चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का निर्णय। संविदा डॉक्टरों को एक साल की सेवा वृध्दि देने का फैसला।

     

केबिनेट के निर्णय

      रायपुर, 12 सितम्बर 2007     
      

  •     उच्च शिक्षा विभाग द्वारा लोक सेवा आयोग से अनुमति लेकर सहायक प्राध्यापकों के 754 पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी।
  •     अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदक के परिवार की वार्षिक आमदनी सीमा 35 हजार रूपए से बढ़ाकर 60 हजार रूपए करने का निर्णय। पिछले वर्ष विभिन्न विभागों में पद रिक्त नहीं होने पर दस हजार से अधिक आवेदकों को शिक्षा-कर्मी के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति दी गयी।
  •    गन्ना आयुक्त द्वारा अधिसूचित क्षेत्र शक्कर कारखाने से 25 किलोमीटर दायरे से बाहर प्रदेश में गन्ना किसानों द्वारा कहीं भी खांडसारी उद्योग लगाया जा सकेगा।
  •    विभिन्न विभागों में सीधी भर्ती के पदों पर भर्ती के लिए अब लोक सेवा आयोग की मंजूरी के बाद सिर्फ मुख्यमंत्री का अनुमोदन पर्याप्त होगा। केबिनेट से मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। विभिन्न विभागों में पदों के खाली रहने से सरकारी काम-काज में हो रही दिक्कतों को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया गया। इसी कड़ी में उच्च शिक्षा विभाग में सहायक प्राध्यापकों के 754 पदों की सीधी भर्ती करने का निर्णय।
  •    स्वास्थ्य विभाग की दवा-खरीद नीति में परिवर्तन। अब अक्टूबर 2007 से केन्द्रीय खरीदी होगी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी इसका फैसला करेगी। कमेटी में प्रमुख सचिव वित्त, स्वास्थ्य विभाग के सचिव और छत्तीसगढ़ इन्फोटेक एवं बायोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे। कमेटी द्वारा साल में दो बार प्रदेश की जरूरतों को ध्यान में रखकर ई-प्रोक्योरमेंट की प्रक्रिया के तहत खरीदी की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। दवाईयों के पैकेट पर छत्तीसगढ़ शासन की सील-मुहर सहित 'नॉट फॉर सेल' भी अंकित रहेगा। विशेष परिस्थिति (आपात स्थिति) में सी.एम.ओ. को 25 हजार रूपए तक दवा खरीदने का अधिकार होगा। दवाईयां सीधे संबंधित जिले को सप्लाई की जाएगी। राज्य में सरकारी अस्पतालों के लिए अभी 60 प्रतिशत  दवाईयों  की केन्द्रीय खरीदी होती है और 40 प्रतिशत खरीदी जिला स्तर पर की जाती है। परिवर्तित व्यवस्था में पूरे प्रदेश में केन्द्रीय खरीदी होगी। इसमें जेनरिक दवाईयां खरीदी जाएगी। ब्रांडेड दवाईयां महंगी होती है, इसलिए जेनरिक दवाईयां खरीदने का निर्णय लिया गया।



केबिनेट के निर्णय

 धान पर लेव्ही अनिवार्य होगी

राज्योत्सव एक नवम्बर से सात नवम्बर तक

छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी का गठन

अन्त्यावसायी निगम द्वारा राष्ट्रीय निगमों को 1186.50 लाख की स्टेट ब्लॉक गारंटी

रायपुर, 29 सितंबर 2007
  •  वर्ष 2007-08 के लिए समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन, कस्टम मिलिंग और लेव्ही नीति पर विचार करते हुए भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप लेव्ही को अनिवार्य किया जाएगा। राज्य में धान उपार्जन प्रक्रिया का कम्प्यूटरीकरण् करने की सहमति। इससे संबंधित बिन्दुओं पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग अपने स्तर पर निर्णय कर सकता है। धान उपार्जन , कस्टम मिलिंग एवं लेव्ही नीति के शेष बिन्दु पिछले वर्ष के अनुसार ही रहेंगे।
  •   छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस 'राज्योत्सव' का आयोजन इस वर्ष भी राजधानी रायपुर में एक नवम्बर से सात नवम्बर तक किया जाएगा। पुरस्कार वितरण समारोह पांच नवम्बर को आयोजित किया जाएगा। राज्य के जिलों में 2 नवम्बर से 4 नवम्बर तक राज्योत्सव के तीन दिवसीय समारोह आयोजित किए जाएंगे। पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 31 अक्टूबर और एक नवम्बर की रात्रि में प्रदेश के सभी मुख्य सरकारी भवनों में रोशनी की जाएगी।
  •  राज्य शासन द्वारा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर में पूर्व में पंडित सुन्दरलाल शर्मा, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और पंडित लखनलाल मिश्र के नाम पर स्थापित तीनों शोध-पीठों का विलय करते हुए छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी की स्थापना की जाएगी। यह अकादमी एक पंजीकृत संस्था होगी, जो साहित्य, पुरातत्व और स्थापत्य कला पर शोध कार्य करेगी। इसका मुख्यालय राजधानी रायपुर में होगा। अकादमी के संचालन के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में प्रबंध मंडल का गठन किया जाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री प्रबंध मंडल के उपाध्यक्ष होंगे। प्रबंध मंडल में उच्च शिक्षा और वित्त विभाग के सचिव, जनसम्पर्क विभाग के आयुक्त, साहित्य अकादमी नई दिल्ली के सचिव, हिन्दी ग्रन्थ अकादमी छत्तीसगढ़ के संचालक आदि सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।
  •  अनुसूचित जातियों, जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यक समुदायों के आर्थिक विकास के लिए छत्तीसगढ़ राज्य अन्त्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम की कार्ययोजना हेतु पांच राष्ट्रीय निगमों के लिए वर्ष 2007-08 में 1186 लाख 50 हजार रूपए की स्टेट ब्लॉक गारंटी दी जाएगी। इन राष्ट्रीय निगमों में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम, राष्ट्रीय अनुसूचित जन-जाति वित्त एवं विकास निगम, राष्ट्रीय पिछड़ा
  • वर्ग वित्त एवं विकास निगम, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम तथा राष्ट्रीय सफाई कामगार वित्त एवं विकास निगम शामिल हैं।

मंत्रिपरिषद का निर्णय_2008

मंत्रिपरिषद का निर्णय

 रायपुर 24 जनवरी 2008

  • वर्ष 1997 के पहले सेवा में आए दैनिक वेतन भोगियों को नियमित किया जाएगा। इस निर्णय का लाभ उन्हीं दैनिक वेतन भोगियों को मिलेगा जिनकी दस वर्ष
  •  की सेवाएं पूरी हो चुकी हैं। लगभग 15 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को इस निर्णय का लाभ मिलेगा।
  •   किसानों को माह दिसम्बर 2007 तक बकाया सिंचाई टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इस निर्णय से लगभग आठ लाख किसान लाभान्वित होंगे।
  •  शासन ने अपने आदेश में उस व्यक्ति को किसान की परिभाषा के दायरे में लिया है, जो भू-स्वामी, मौरूसी काश्तकार, शासकीय पट्टेदार या सेवा भूमि के
  •  मामले में कृषि भूमि धारित करता हो। इसके आलावा यदि वह अन्य किसी व्यक्ति की कृषि भूमि पर खेती करता हो, तो उसे भी इसका लाभ मिलेगा।
  •  छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजने का निर्णय।
  •   पंचायत कर्मियों को पंद्रह सौ रुपए प्रतिमाह के बजाए 2750 रूपए से 3700 रूपए का नियमित वेतनमान दिया जाएगा। इस निर्णय से 7656
  •  पंचायतकर्मी लाभान्वित होंगे। प्रदेश में कार्यरत 2164 सहायक ग्राम पंचायत अधिकारियों को 4000 से 6000 रुपए का वेतनमान दिया जाएगा।
  •  राजधानी रायपुर के जवाहर लाल नेहरु चिकित्सा महाविद्यालय में क्षेत्रीय नेत्र चिकित्सा संस्थान खोला जाएगा। संस्था के लिए संचालक के पद की स्वीकृति।
  •   मेडिकल कालेजों के शैक्षणिक स्टॉफ की तरह ही शासकीय आयुर्वेद कालेज के स्टॉफ की सेवा अवधि 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने का निर्णय।
  •  रायपुर और बिलासपुर मेडिकल कालेज के उन्नयन का निर्णय।
  •  फसलों को वन भैंसा, सांभर और चीतल से नुकसान होने पर भी प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा देने का निर्णय।
  •  रतनजोत की खेती के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को 30 साल के लिए दिये जाने वाले पट्टे की अवधि दस साल बढ़ाने का निर्णय। क्योंकि रतनजोत की औसत आयु 40 वर्ष मानी जाती है।
  • वित्तीय वर्ष 2008-09 के लिए राज्य के बजट को केबिनेट की मंजूरी।
  •   स्वास्थ्य विभाग में आगामी एक अप्रेल 2008 तक पुरानी दवा खरीदी नीति के अनुसार औषधि खरीदी का निर्णय।

 

 मंत्रिपरिषद का निर्णय        

             रायपुर, 26 फरवरी 2008     

मंत्रि परिषद की आज यहां संपन्न हुयी बैठक में निम्नानुसार महत्वपूर्ण निर्णय लिए गये :-
  • मंत्रि परिषद द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना प्रदेश के 6 जिलों रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव सरगुजा, तथा बस्तर में क्रियान्वित करने का निर्णय लिया गया। योजना का क्रियान्वयन स्वास्थ्य विभाग नोडल विभाग के बतौर करेगा। ज्ञात रहे कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना पूरे देश में लागू किया जाना प्रस्तावित किया गया है। योजनांतर्गत बीमित परिवार को बीमा कम्पनी द्वारा एक स्मार्ट कार्ड जारी किया जाएगा जिसके आधार पर परिवार का कोई भी सदस्य छत्तीसगढ़ राज्य के साथ-साथ देश के किसी भी चिन्हांकित निजी एवं सरकारी अस्पतालों में अपना उपचार करा सकेगा।
  •  बिलासपुर शहर एवं शहर के आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक विकास एवं विद्यालयों की स्थापना होने के कारण बिलासपुर से सीपत, बिलासपुर से सिरगिट्टी, बिलासपुर से मस्तूरी को पार्श्वस्थ क्षेत्र घोषित करने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय से पार्श्वस्थ क्षेत्र के लिए नगर वाहन सेवा के रूप में परमिट स्वीकृत किए जाने एवं बस संचालन करने से शासन को त्रैमासिक कर के रूप में राजस्व की प्राप्ति होगी तथा आम जनता को सस्ती एवं सुलभ परिवहन सेवा का लाभ मिलेगा।
  • बस्तर क्षेत्र के आंतरिक मार्गों पर यात्री परिवहन के लिए देय मासिक कर में आंशिक छूट देने का निर्णय मंत्रि परिषद ने लिया। यह मार्ग हैं - दोरनापाल से जगरगुंडा, किरंदुल से जगरगुंडा, बीजापुर से मिरतुर, बीजापुर से जगरगुंडा, बीजापुर से पुजारीकांकेर तथा इंजरम से भेज्जी।
  •  छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर के लिए चिकित्सा महाविद्यालय जगदलपुर के लिए गठित स्वशासी समिति के अनुरूप स्वशासी समिति गठित करने की अनुमति दी गयी।
  • पंडित रविशंकर शुक्ल हास्पीटल बूढ़ापारा को कतिपय शर्तों के अधीन भू-आवंटन का निर्णय लिया गया।
  •  महानिदेशक छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सी.ए.एफ.) का एक्स केडर पद निर्मित करने का अनुमोदन मंत्रि परिषद द्वारा किया गया।

 केबिनेट के फैसले 

रायपुर, 12 मार्च 2008  
  •  संविदा डाक्टरों को पी.एस.सी. से भरे जाने वाले पदों के लिए आयु सीमा में छूट देने का निर्णय। संविदा में जितने साल डाक्टर सेवा देंगे, उन्हें उतने ही साल छूट मिलेगी। यह छूट अधिकतम पांच साल की होगी। केबिनेट ने यह निर्णय जिला अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में भर्ती के संबंध में लिया है। मेडिकल कालेजों में यह नियम लागू नहीं होगा।
  •  तीन विधेयकों के प्रारूप को मंजूरी इनमें पंचायतों में महिलाओं को पचास प्रतिशत आरक्षण देने और महिलाओं के नाम से अचल संपति खरीदने पर मुद्रांक शुल्क में दो प्रतिशत की छूट देने संबंधी विधेयक शामिल है। अचल संपत्ति खरीदने पर सात प्रतिशत मुद्रांक शुल्क लगता है।  

मंत्रिपरिषद का निर्णय      

      रायपुर, 31 मार्च 2008

    •  प्रदेश में राजस्व संभागायुक्त प्रणाली लागू करने का निर्णय। आयुक्त प्रणाली से संबंधित छत्ताीसगढ़ भू-राजस्व संशोधन अध्यादेश 08 को मंजूरी । (23 नवम्बर 2002 को आयुक्त प्रणाली समाप्त कर दी गयी थी) नये संभाग मुख्यालय एवं शामिल जिले  रायपुर- रायपुर, धमतरी, महासमुन्द, दुर्ग, राजनांदगांव, कवर्धा  बस्तर- बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर, बीजापुर  बिलासपुर- बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, चांपा-जांजगीर  सरगुजा- सरगुजा, कोरिया, जशपुर
    • चिकित्सा शिक्षा के डाक्टरों व शिक्षकों को केन्द्र सरकार की अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (ए.आई.सी.टी.ई.) के पैमाने के अनुरूप वेतनमान देने का निर्णय
    • डाक्टरों की मांग अनुरूप विशेष भत्ता देने के लिए हाई पावर कमेटी बनाई गयी। इस कमेटी के अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे। प्रमुख सचिव वित्त और स्वास्थ्य सचिव सदस्य हैं। कमेटीएक माह में अपनी रिपोर्ट देगी।

मंत्रिपरिषद का निर्णय

 रायपुर, 02 मई 2008    
  •     टाटा के विस्थापितों को अधिग्रहित भूमि के बराबर भूमि देने के साथ भूमि समतलीकरण और संवर्धन के लिए दस हजार रूपए प्रति एकड़ की दर से राशि देने का फैसला।
  •      सरकारी भर्ती के लिए आयु सीमा दो साल बढ़ी। अब 37 वर्ष की आयु सीमा वाले भी सीधी भर्ती में भाग ले सकते हैं। कुछ माह पहले आयु सीमा 35 वर्ष कर दी गयी थी।
  •     जमाखोरी और काला बाजारी रोकने छत्तीसगढ़ अनुसूचित वस्तु (अनुज्ञापन एवं जमाखोरी पर निर्बंधन) आदेश 2008 लागू किया जाएगा।
  •     बड़े व्यापारियों को गेहूं, चावल और तेल का स्टाक घोषित करना होगा और निर्धारित मात्रा से अधिक खाद्यान्न रखने के लिए कलेक्टर से व्यापार का लाइसेंस लेना होगा।
  •    प्रदेश में ग्रीष्म कालीन धान अब 10 जून तक समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी।
  •    चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सहायक ग्रेड तीन में पदोन्नत होने पर कम्प्यूटर डिप्लोमा करने के लिए अब पांच साल की छूट मिलेगी। अभी 40 वर्ष की आयु तक डिप्लोमा करना अनिवार्य था। अब यह सीमा 45 वर्ष होगी। इसके लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
  •     सभी प्रकार के कार्ड धारियों को राशन दुकान से एक किलो सोयाबीन तेल 55 रुपए प्रति किलो की रियायती दर पर प्रति माह उपलब्ध कराने का फैसला।
  •     निजी क्षेत्र के कलिंग विश्वविद्यालय की स्थापना की मंजूरी। यह प्रदेश का तीसरा निजी विश्वविद्यालय होगा। इसके पहले करगीरोड कोटा (बिलासपुर) स्थित डॉ. सी.वी.रमन विश्वविद्यालय और मैटस विश्वविद्यालय गुल्लू (आरंग) को मंजूरी दी गई है। प्रस्ताव प्राप्त होने पर बस्तर और सरगुजा में निजी विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी देने का फैसला।
  •     तेंदूपत्ता संग्रहण में जुटे वनवासियों के लिए जनश्री बीमा योजना का दायरा बढाने का निर्णय। अब तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार के सभी संग्राहक व्यक्ति को इस योजना का लाभ मिलेगा। अब तक केवल परिवार के मुखिया को ही इस योजना का लाभ मिलता था।
  • राज्य की 14 विभिन्न जातियों को अनुसूचित जाति-जनजाति की सूची में शामिल करने संबंधी छत्तीसगढ़ आदिम जाति अनुसंधान प्रशिक्षण संस्थान रायपुर के प्रस्ताव को मंजूर कर केन्द्र सरकार को भेजने का फैसला।

मंत्रिपरिषद का निर्णय      

       रायपुर, 22 मई 2008

      राज्य मंत्रि-परिषद की आज संपन्न बैठक में निम्नानुसार महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए :-

  •    छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक से संबध्द जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों से कृषकों को न्यूनतम ब्याज दर पर कृषि ऋण उपलब्ध कराने हेतु नाबार्ड से अल्पकालीन कृषि साख सीमा प्राप्त करने के लिए नाबार्ड के पक्ष में रूपए 200 करोड़ की गारंटी शुल्क मुक्त शासकीय प्रत्याभूति प्रदाय की जाए।
  •   छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक मर्यादित रायपुर द्वारा जिला विकास बैंकों के लिए वर्ष 2008-09 में दीर्घकालीन ऋणों के वित्त प्रबंधन के लिए रूपए 20.00 करोड़ का ऋण पत्र निर्गमन करने के लिए राज्य शासन द्वारा नाबार्ड के पक्ष में दी गयी गारंटी पर शुल्क में छूट प्रदान की जाए।
  •  राज्य में गठित समस्त वन प्रबंधन समितियों का वनों के संरक्षण एवं विकास में वांछित सहयोग प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त लाभ राशि के आवंटन का निर्णय लिया गया।
  •  उप पुलिस महानिरीक्षक सी.आई.डी. नक्सल ऑपरेशन के दो असंवर्गीय पदों के सृजन संबंधी निर्णय का अनुमोदन किया गया।
  •  स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अन्तर्गत वेतनमान रूपए 18400-500-22400 में आयुक्त, स्वास्थ्य सेवाएं का एक पद निर्मित करने तथा सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को पदेन आयुक्त, स्वास्थ्य सेवाएं नियुक्त करने का निर्णय लिया गया।
  •  कैबिनेट द्वारा संसदीय सचिवों की वार्षिक स्वेच्छानुदान की सीमा रूपए बीस लाख को बढ़ाकर 25 लाख करने तथा एक प्रकरण में स्वीकृति की    अधिकतम सीमा दस हजार रूपए से बढ़ाकर पन्द्रह हजार करने का निर्णय लिया गया।
  •  इसके अतिरिक्त कैबिनेट द्वारा मीसा बंदियों को सम्मान निधि पेंशन राशि स्वीकृत करने के मुद्दे पर सैध्दांतिक सहमति व्यक्त की गयी। यह भी निर्णय लिया गया कि जिन राज्यों में यह योजना क्रियान्वित है, वहां से योजना का विस्तृत विवरण प्राप्त किया जाए। बैठक में डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन के मांगपत्र पर गठित श्री पी.जॉय ओमेन समिति की रिपोर्ट तथा वन क्षेत्रपाल संवर्ग में त्रिस्तरीय वेतनमान के प्रस्तावों पर भी विचार किया गया।

 

मंत्रि-परिषद् के निर्णय

जन-समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर करने के निर्देश

      

रायपुर, 12 जून 2008
      

 
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित मंत्रि-परिषद् की बैठक में निम्नानुसार महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए :-
  •  छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा-73 के तहत एकीकृत उपनगर की स्थापना के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग के नीति प्रस्ताव को सैध्दांतिक सहमति।
  •  छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (संविदा नियुक्ति) नियम 2004 में संशोधन करते हुए संविदा पर नियुक्त महिला कर्मचारियों को तीन माह अथवा संविदा की अवधि समाप्ति, जो भी पहले हो, तक की अवधि के लिए प्रसूति अवकाश (सवैतनिक) देने का निर्णय लिया गया। यह अवकाश दूसरे प्रसव के बाद देय नहीं होगा।
  •  शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के शिक्षकों के वेतनमान में सुधार तथा अन्य सुविधाएं देने संबंधी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।      

 

मंत्रि-परिषद् के निर्णय

 रायपुर, 02 जुलाई 2008      

  •  प्रदेश के स्कूल-कॉलेजों की परीक्षाओं में नकल रोकने संबंधी विधेयक को मंजूरी। सामूहिक नकल कराने वालों को एक वर्ष से पांच वर्ष तक सजा और दस हजार रूपए से 50 हजार रूपए जुर्माने का प्रावधान। यह गैर जमानतीय अपराध होगा, इसमें छात्रों के लिए सिर्फ जुर्माने का प्रावधान है। नकल करते पकड़े जाने पर परीक्षार्थियों को पांच हजार रूपए तक जुर्माना देना होगा। नकल रोकने के वर्तमान में प्रचलित प्रावधान यथावत रहेंगे।
  •  विकास यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा की गयी घोषणा के अनुरूप बस्तर और सरगुजा में एक-एक शासकीय विश्वविद्यालय और रायपुर में छत्तीसगढ़ आयुष एवं स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय। बस्तर में मां दंतेश्वरी विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा।
  •  छत्तीसगढ़ आयुष एवं स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में एलोपैथी, होम्योपैथी, आयुर्वेदिक, योग, यूनानी, दंत चिकित्सा, फार्मेसी, फिजियोथेरेपी, नर्सिंग और प्राकृतिक चिकित्सा से संबंधित पाठयक्रम संचालित किए जाएंगे।
  •  निजी विश्व विद्यालय स्थापना अधिनियम की अनुसूची में दो निजी विश्वविद्यालय कलिंग विश्वविद्यालय (आरंग) और आईसीएफएआई विश्वविद्यालय (धमधा) को शामिल करने की अनुमति।
  •  सार्वजनिक पुस्तकालय विधेयक 2008 को मंजूरी।
  •  लगभग तेरह सौ करोड़ रूपए के प्रथम अनुपूरक बजट को स्वीकृति।
  •  संभागीय राजस्व आयुक्त प्रणाली से संबंधित कानून विधानसभा में प्रस्तुत करने का निर्णय।
  •  तबादले के लिए सात दिन की समय-सीमा बढ़ाई गयी। पहले इसके लिए 30 जून तक की समय-सीमा थी, जो अब बढाकर सात जुलाई तक की गयी।
  •  पदोन्नति से वंचित रहने वाले रेंजरों और सब इंजीनियरों को सेवाकाल में तीन बार क्रमोन्नत वेतनमान देने का निर्णय। इस फैसले में तीन हजार से अधिक क0र्मचारी लाभान्वित होंगे। रेंजरों को सात साल की सेवा अवधि के बाद 6500-200-10,500 रूपए, सत्रह साल बाद 8275-13500 रूपए और 27 वर्ष की सेवा अवधि के बाद 10325-275-15200 रूपए का वेतनमान दिया जाएगा। उप अभियंताओं को दस साल बाद 6500-200-10500 रूपए, बीस साद बाद 8275-250-13500 रूपए और पच्चीस साल बाद 10325-275-15200 रूपए वेतमान दिया जाएगा। लोक निर्माण, सिंचाई, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और ग्रामीण अभियांत्रिकी विभाग के सब इंजीनियरों को इसका लाभ मिलेगा।
  •  छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी संशोधन विधेयक के प्रारूप को मंजूरी। अब तक कृषि उपज मंडियों के निर्वाचन की याचिका राज्य सरकार द्वारा सुनी जा रही थी। अब मंडी निर्वाचन याचिकाओं की सुनवाई का अधिकार राज्य शासन द्वारा संभागीय आयुक्तों को दिए जाएंगे।
  •  छत्तीसगढ़ नि:शक्तजन वित्त एवं विकास निगम को राज्य शासन से प्राप्त प्रत्याभूति राशि पर प्रत्याभूति शुल्क से छूट का अनुमोदन।
  •  छत्तीसगढ़ कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनंसचार विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2008 को स्वीकृति।

मंत्रिपरिषद का निर्णय

                          दिनांक 31 जुलाई 2008   

  •      प्रदेश के किसानों को एक अप्रैल 2008 की स्थिति में सिंचाई टैक्स की बकाया राशि के पचास प्रतिशत का भुगतान आगामी 31 दिसम्बर 2008 तक किए जाने पर शेष 50 प्रतिशत की छूट देने का निर्णय। निर्णय से छत्तीसगढ़ के ग्यारह लाख किसानों को 39 करोड़ 05 लाख रूपए के टैक्स के बोझ से राहत मिलने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि राज्य में एक अप्रैल 2008 की स्थिति में सिंचाई जल कर की 78 करोड़ 10 लाख रूपए की राशि बकाया है। इस पर 31 दिसम्बर 2008 तक पचास प्रतिशत की छूट देने से लगभग ग्यारह लाख किसानों को लाभ मिलेगा। यह भी उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 31 मई 2008 तक दो लाख 12 हजार 421 किसानों ने 50 प्रतिशत की छूट का लाभ प्राप्त किया है, जिन्हें सात करोड़ 82 लाख रूपए के टैक्स के बोझ से राहत मिली है।
  •        मीसाबंदियों के लिए एक अगस्त 2008 से सम्मान निधि पेंशन राशि स्वीकृत करने का निर्णय ।एक माह से अधिक लेकिन छह महीने से कम निरूध्द रहने वालों को तीन हजार रूपए और उससे अधिक अवधि तक निरूध्द रहे व्यक्ति को छह हजार रूपए प्रति माह की दर से सम्मान निधि दी जाएगी। इसके लिए आवेदन पत्र निर्धारित प्रारूप में जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्राप्त किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि मंत्रि परिषद की विगत 22 मई 2008 की बैठक में छत्तीसगढ़ के मीसाबंदियों को सम्मान निधि#पेंशन राशि स्वीकृत करने के विभागीय प्रस्ताव पर सैध्दांतिक सहमति व्यक्त करते हुए अन्य राज्यों से विस्तृत जानकारी प्राप्त करने और नियम बनाने की आगामी कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया था। इस संबंध में मध्यप्रदेश में मीसा#डी.आई.आर. के अंतर्गत राजनीतिक या सामाजिक कारणों से निरूध्द व्यक्तियों को पेंशन देने तथा यदि व्यक्ति की मृत्यु हो गई है तो उसके पति#पत्नि को पेंशन देने के लिए लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि नियम 2008 बनाया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी मध्यप्रदेश के नियमों का अध्ययन कर उसके अनुरूप छत्तीसगढ़ में मीसा बंदियों को सम्मान निधि पेंशन देने का निर्णय लिया है।
  •        नक्सल हिंसा की वारदातों में शहीद पुलिस कर्मियों के परिवारजनों को अनुकम्पा नियुक्ति देने के लिए अनुकम्पा नियुक्ति के वर्तमान नियमों को शिथिल करने का निर्णय । इसके अनुरूप अब शहीद पुलिसकर्मी के परिवार के किसी एक सदस्य को शासकीय सेवक के होते हुए भी अनुकम्पा नियुक्ति दी जाएगी। शहीद पुलिस कर्मी के परिवार के किसी भी सदस्य को चतुर्थ श्रेणी के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति हेतु शैक्षणिक योग्यता में छूट का प्रावधान किया जाएगा। नक्सली हिंसा में शहीदों के प्रकरणों में अनुकम्पा नियुक्ति के आवेदन प्रस्तुत करने की समय सीमा को एक वर्ष निर्धारित किया जाएगा। शहीद सहायक उप-निरीक्षक या उससे उच्च स्तर के पुलिसकर्मियों के प्रकरण में उनके परिवार के किसी भी एक सदस्य (महिला या पुरूष) को विकल्प के आधार पर अनुकम्पा नियुक्ति देने का प्रावधान किया जाएगा। शहीद पुलिस कर्मी यदि अविवाहित अथवा विधुर है और उसके कोई पुत्र#पुत्री नहीं हैं तो ऐसी स्थिति में उसके माता-पिता द्वारा प्राधिकृत अपने पुत्र#पुत्री को आरक्षक पद की वांछित योग्यता के आधार पर पात्रता के अनुसार उपयुक्त पद पर अनुकम्पा नियुक्ति दी जाएगी।
  •       छत्तीसगढ़ मोटर यान कराधान नियम 1991 की धारा-4 से संबंधित तृतीय अनुसूची के अंतर्गत विनिर्माता# व्यापारी (वाहन विक्रय करने वाले व्यवसायी) के आधिपत्य की वाहनों के लिए वार्षिक कर की दर में वृध्दि के लिए वर्तमान प्रावधान में संशोधन करने का निर्णय । मोपेड एवं मशीनयुक्त सायकल (इंजन क्षमता 50 सीसी से अनधिक) पर बीस रूपए, मोपेड एवं मशीनयुक्त सायकल से भिन्न मोटर सायकल पर 30 रूपए, तिपहिया वाहन के लिए एक सौ रूपए, हल्के मोटरयान जिसमें चेचिस भी शामिल है पर छह सौ रूपए, मध्यम यात्री वाहन जिसमें चेचिस भी शामिल है, पर सात सौ रूपए, मध्यम माल वाहन, जिसमें चेचिस सम्मिलित है पर सात सौ रूपए, भारी यात्री वाहन जिसमें चेचिस भी सम्मिलित है, पर 1250 रूपए, चेचिस सहित भारी माल वाहन पर भी 1250 रूपए और विशेष विवरण की अन्य मोटरयानों पर एक हजार रूपए वार्षिक कर निर्धारित करने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय से राज्य शासन को तीन करोड़ 70 लाख रूपए का राजस्व प्राप्त होगा, जबकि वर्तमान में प्रचलित कर की दरों के अनुसार सिर्फ छह लाख 22 हजार का राजस्व मिलता है।
  •         छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग-राज्य सेवा परीक्षा नियम 2003 में और चयन प्रक्रिया में संशोधन करने का निर्णय । वर्तमान नियमों के अनुसार प्रारंभिक परीक्षा में वस्तुनिष्ठ दो प्रश्नपत्र होते हैं, जिनमें से एक सामान्य अध्ययन और दूसरा ऐच्छिक विषय है। कुल अंक 450 होते हैं, जबकि आज लिए गए निर्णय के अनुसार नये नियमों में प्रारंभिक परीक्षा में एक वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्र 300 (तीन सौ) अंकों का होगा इसमें सामान्य अध्ययन एवं मानसिक योग्यता से संबंधित प्रश्न होंगे। ऐच्छिक विषय अब नहीं रहेगा। मुख्य परीक्षा (लिखित तथा साक्षात्कार) के अंतर्गत वर्तमान में लिखित परीक्षा में निबंधात्मक सात प्रश्न होते हैं। प्रत्येक प्रश्न पत्र 300 अंकों का तथा कुल 2100 होते हैं। दो सामान्य अध्ययन, एक सामान्य हिन्दी तथा दो ऐच्छिक विषय के चार प्रश्नपत्र इसप्रकार कुल सात प्रश्नपत्र होते हैं। साक्षात्कार में 250 अंक होते हैं। केबिनेट में आज लिए गए निर्णय के अनुसार प्रस्तावित नये नियमों में मुख्य परीक्षा में अब चार प्रश्नपत्र होंगे। प्रत्येक प्रश्नपत्र 300 (तीन सौ) अंकों का होगा। कुल 1200 अंक होंगे। साक्षात्कार में 150 अंक होंगे। चार प्रश्नपत्रों में एक सामान्य अध्ययन, दूसरा सामान्य हिन्दी और सामान्य अंग्रेजी तथा शेष दो प्रश्नपत्र एक ऐच्छिक विषय के होंगे।
  •        छत्तीसगढ़ मंत्रालय में सहायक ग्रेड-3 के पद पर नियुक्ति के बाद सेवा से त्याग पत्र तथा सेवा समाप्ति के फलस्वरूप रिक्त हुए पदों को प्रतीक्षा सूची में रखे गए उम्मीदवार से भरने का निर्णय। इसी तरह छत्तीसगढ़ सिविल सेवा संविदा (नियुक्ति) नियम 2004 के नियम चार में संशोधन करने का निर्णय। इसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ भवन नई दिल्ली में नियुक्ति अवधि की समय सीमा पांच वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष करने का प्रावधान किया गया है। यह प्रावधान केवल आवासीय आयुक्त छत्तीसगढ़ भवन के कार्यालय के लिए होगा।      

केबिनेट के निर्णय

दिनांक 27 अगस्त 2008  
  •        केबिनेट की बैठक में सैध्दांतिक निर्णय लिया गया कि छठवें वेतन आयोग की अनुशंसा और केन्द्र सरकार द्वारा यथासंशोधित वेतन ढांचे को राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए लागू किया जाए और उन्हें नये वेतन ढांचे के अनुसार वेतन भुगतान सितम्बर 2008 से किया जाए। राज्य के दो लाख से अधिक कर्मचारियों को यह सौगात मिलेगी। बैठक में जानकारी दी गयी कि पे-बेंड तथा ग्रेड-पे आधरित नये वेतनमान की वास्तविक गणना में समय लगना स्वाभाविक है। केन्द्र सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों के संबंध में आदेश जारी होने पर राज्य शासन द्वारा भी इसका सम्यक परीक्षण कर इसे लागू किया जाएगा। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति भी गठित की गई।
  •       मध्यप्रदेश पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन लिमिटेड से छत्तीसगढ़ राज्य को आवंटित अधिकारियों और कर्मचारियों को संविलियन निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल में करने का प्रस्ताव अनुमोदित किया गया। राज्य पुनर्गठन के तहत मध्यप्रदेश पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन से छत्तीसगढ़ को 47 अधिकारी और कर्मचारी प्राप्त हुए थे। इनमें से 18 सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वर्तमान में 29 कार्यरत हैं। इनमें से 15 अधिकारी-कर्मचारी पुलिस मुख्यालय में पदस्थ हैं और पांच कर्मचारी विभिन्न नगरीय निकायों में प्रतिनियुक्ति पर हैं, जबकि नौ कर्मचारी छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल में पदस्थ हैं।
  •        केन्द्र प्रवर्तित योजना के तहत वर्ष 1988-89 में दस धन दो पध्दति के व्यावसायिक शिक्षा पाठयक्रम के लिए नियुक्त 211 अंशकालिक शिक्षकों को आयु सीमा में विशेष छूट देकर शिक्षा कर्मी वर्ग-तीन के पद पर नियुक्त करने की सहमति दी गई।
  •          राज्य के शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलीटेक्निक संस्थाओं में त्रि-वर्षीय संविदा नियुक्त 61 व्याख्याताओं को सीधी भर्ती के पदों के लिए निर्धारित 35 वर्ष की आयु सीमा में एक बार के लिए दस वर्ष की विशेष छूट दी जाएगी।
  •         मुख्यमंत्री द्वारा 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य के किसानों को वित्तीय वर्ष 2008-09 में सहकारी समितियों में सिर्फ तीन प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा के क्रियान्वयन के लिए केबिनेट की बैठक में ब्याज अनुदान नियम 2007 में संशोधन स्वीकृत करते हुए ब्याज अनुदान नियम 2008 का अनुमोदन किया गया। प्रदेश के किसानों को पहले तेरह प्रतिशत ब्याज पर समितियों से ऋण मिलता था। मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं के तहत एक अक्टूबर 2004 से 31 मार्च 2006 तक नौ प्रतिशत और वित्तीय वर्ष 2006-07 में सात प्रतिशत की ब्याज दर पर ऋण सुविधा देने के बाद वित्तीय वर्ष 2007-08 से सिर्फ छह प्रतिशत की ब्याज दर पर यह सुविधा थी।
  •       दुर्ग जिले के ग्राम रूंआबांधा#आमदी में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के लिए कृषि विभाग की 78.08 एकड़ जमीन की अदला-बदली भिलाई इस्पात संयंत्र के साथ करने के प्रस्ताव का औपचारिक अनुमोदन किया गया। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल दुर्ग को विनिमय (अदला-बदली) करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विभाग और भिलाई इस्पात संयंत्र के बीच समझौता हो चुका है। भारतीय इस्पात प्राधिकरण ने भी भिलाई इस्पात संयंत्र की 78.08 एकड़ भूमि अदला-बदली के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र दिया है। कृषि विभाग द्वारा ग्राम रूंआबांधा#आमदी स्थित अपनी 78.08 एकड़ भूमि में से 58.85 एकड़ रिक्त जमीन का सशर्त आधिपत्य गृह निर्माण मंडल को दिया जा चुका है।     

मंत्रि परिषद के निर्णय

दिनांक 10 सितम्बर 2008
 
  •   चालू खरीफ वर्ष 2008-09 में समर्थन मूल्य नीति के तहत राज्य की एक हजार 333 प्राथमिक सहकारी समितियों के डेढ़ हजार से अधिक उपार्जन केन्द्रों में किसानों से धान खरीदी आगामी 20 अक्टूबर 2008 से शुरू की जाएगी। धान सहित मक्के की नगद खरीदी 20 अक्टूबर 08 से 31 जनवरी 2009 तक होगी और लिंकिंग प्रक्रिया के तहत 15 फरवरी तक खरीदी की जाएगी। उपार्जन केन्द्रों में जितना भी धान आएगा, खरीदा जाएगा। चालू वर्ष के लिए धान का समर्थन मूल्य सामान्य अथवा कॉमन धान के लिए 850 रूपए, ग्रेड-ए के धान के लिए 880 रूपए और मक्के के लिए 840 रूपए प्रति क्विंटल निर्धारित है।धान उपार्जन के लिए इस वर्ष आठ करोड़ 75 लाख नग बारदानों की जरूरत होगी। इसके लिए भारत सरकार की अधिकृत एजेंसी डी.जी.एस. एण्ड डी. को अग्रिम दे दिया गया है। इस वर्ष की लेव्ही नीति पिछले वर्ष की तरह रहेगी। राज्य में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए चावल की उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता होगी। धान उपार्जन के लिए राज्य सरकार को इस वर्ष 4013 करोड़ रूपए की आवश्यकता होगी। इसका प्रस्ताव भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक को भेजा जा चुका है। 
  •  प्रदेश सरकार की औद्योगिक नीति वर्ष 2004-2009 के विशेष थ्रस्ट सेक्टर की सूची में उल्लेखित हर्बल तथा वनौषधि प्रसंस्करण के अंतर्गत बांस आधारित उद्योग और लाख आधारित उद्योग सहित हर्बल एवं मेडिसनल पार्क में स्थापित होने वाली प्रोसेसिंग यूनिटों और अन्य स्थलों में स्थापित होने वाली प्रोसेसिंग यूनिटों का भी उल्लेख स्पष्ट रूप से किया जाएगा। इनकी मशीनरी लागत 25 लाख रूपए से अधिक होनी चाहिए।
  •  औद्योगिक नीति वर्ष 2004-2009 की कंडिका 4.4.10 को स्पष्ट किया गया है कि इस औद्योगिक नीति में अति वृहद उद्योगों (रूपए एक हजार करोड़ से अधिक सकल पूंजीगत लागत वाले उद्योग) को भी औद्योगिक नीति में निर्धारित निर्दिष्ट प्रोत्साहन प्राप्त होंगे। अति वृहद उद्योगों को निर्दिष्ट प्रोत्साहन की पात्रता मेगा उद्योगों के लिए उपलब्ध अधिकतम निर्दिष्ट प्रोत्साहन (अति पिछड़े अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र के लिए निर्धारित प्रोत्साहन) के समतुल्य होगी।
  • औद्योगिक नीति 2004-2009 के परिशिष्ट 2 में शामिल उद्योगों की निगेटिव लिस्ट के क्रमांक 33 में कोयला आधारित कैप्टिव विद्युत संयंत्रों को सम्मिलित करते हुए सभी विद्युत संयंत्र, क्रमांक 34 में सीमेंट उद्योग, क्रमांक 35 में लद्यु उद्योगों को छोड़कर कच्चा लोहा#लौह अयस्क आधारित उद्योग और क्रमांक 36 में ऐसे अन्य उद्योग जो राज्य शासन द्वारा अधिसूचित किये जाएं, उनको जोड़ा जाए। यह संशोधन अधिसूचना जारी होने के दिनांक से प्रभावशील होगा, लेकिन जिन उद्योगों ने अधिसूचना जारी होने के दिनांक तक प्रभावी कदम उठा लिए हों, उनको निर्दिष्ट प्रोत्साहन प्राप्त होंगे।
  • औद्योगिक नीति 2004-09 के परिशिष्ट-1 की कंडिका-26 में परिभाषित प्रभावी कदम को स्पष्ट किया गया कि प्रभावी कदम से आशय निम्नलिखित कार्रवाईयां पूर्ण करने से है - इकाई ने भूमि का विधिवत आधिपत्य प्राप्त कर लिया हो। यहां इकाई द्वारा वांछित सम्पूर्ण निजी भूमि क्रय कर आधिपत्य में होना चाहिए और# अथवा निजी भूमि अर्जन की अवस्था में निजी भूमि का लीज डीड निष्पादन हो चुका हो। इकाई ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार शेड-भवन का निर्माण कार्य शुरू कर दिया हो। इकाई ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार प्लांट एवं मशीनरी का पक्का क्रय आदेश दे दिया हो और परियोजना के लिए वित्तीय संस्था से स्वीकृति आदेश प्राप्त हो। 
  •  छत्तीसगढ़ विशेष क्षेत्र (अचल सम्पत्ति का व्ययन) नियम 2008 को छत्तीसगढ़ राजपत्र में अधिसूचित किए जाने की, तथा निर्धारित कालावधि में प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विचार कर प्रशासकीय विभाग द्वारा अन्तिम प्रकाशन किए जाने का अनुमोदन करने का भी निर्णय लिया गया।     

मंत्रिपरिषद का निर्णय     

                     दिनांक 27 सितम्बर 2008

 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये :-

  •  छत्तीसगढ़ पशुधन विकास एवं प्रजनन नीति प्रारूप का अनुमोदन किया गया। इस नीति का उद्देश्य राज्य में उन्नत पशुधन की वृध्दि करना एवं पशु उत्पादों में वृध्दि करना है।
  •  14 जुलाई 2007 को शासकीय हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत विमानन संचालनालय के सहायक इंजीनियर स्व. श्री अभिताभ सोनी की पत्नी श्रीमती दीपा सोनी को मुख्य विद्युत निरीक्षक कार्यालय में सहायक ग्रेड-तीन के पद पर नियुक्ति दिये जाने का निर्णय लिया गया।
  •   भारत एल्यूमीनियम कम्पनी लिमिटेड, रायपुर (वेदांता ग्रुप) को कैंसर हॉस्पिटल निर्माण हेतु सशर्त भूमि आवंटन का निर्णय लिया गया।
  •   राज्य शासन की सेवाओं में सीधी भर्ती से भरे जाने वाले पदों पर नियुक्ति के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में छूट दिये जाने के प्रस्ताव का कार्योत्तर अनुमोदन मंत्रिपरिषद ने किया। सीधी भर्ती के पदों के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा संबंधी परिपत्र 16.09.2008 को जारी किया गया था।
  •  राज्य सेवा परीक्षा नियम 2008 में संशोधन का अनुमोदन किया गया। इसके अंतर्गत राज्य सेवा परीक्षा नियम के नियम-5 के उप नियम (ग) आयु (अ) में प्रतियोगी परीक्षा प्रारंभ के स्थान पर शब्द विज्ञापन जारी प्रतिस्थापित किया गया।
  •  वित्तीय वर्ष 2008-09 में मुख्यमंत्री जी के स्वेच्छानुदान मद में अधिकतम वार्षिक सीमा रू. 5 करोड़ के स्थान पर रू. 6 करोड़ तक व्यय प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।
  •   भारत सरकार के नीति अनुसार विपणन संघ द्वारा वर्ष 2009-10 में उर्वरक व्यवसाय के लिए राशि उपलब्ध कराने के संबंध में निर्णय लिया गया कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में जारी रू. सौ करोड़ की शासकीय प्रत्याभूति को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के पक्ष में प्रत्यावर्तित किया जाए। इस प्रत्याभूति पर प्रत्याभूति शुल्क में छूट भी दी जाएगी।
  •  अचानकमार, उदन्ती, सीतानदी अभ्यारण्य एवं इन्द्रावती राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व घोषित करने का निर्णय लिया गया।
  •   प्रदेश में वनक्षेत्र से 5 किमी. की परिधि के बाहर स्थित ग्रामों में तथा नगर पंचायत, नगर पालिका एवं नगर निगमों में उपभोक्ता डिपो के माध्यम से उपभोक्ताओं को जलाउ लकड़ी, बांस एवं बल्ली उपलब्ध कराने के लिए संचालित उपभोक्ता डिपो यथावत रखे जाने का निर्णय लिया गया। यह भी निर्णय लिया गया कि बांस को छत्तीसगढ़ वनोपज (व्यापार विनियमन) अधिनियम, 1969 की धारा 22 (क) के अंतर्गत अराष्ट्रीयकृत वनोपज घोषित किया जाए।
  •   मंत्रिपरिषद द्वारा मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 177 के अंतर्गत अपराध के लिए प्रथम अपराध की प्रशमन शुल्क राशि सौ रू. से बढ़ाकर दो सौ रू. तथा द्वितीय अथवा पश्चात्वर्ती अपराध के लिए प्रशमन शुल्क रू. तीन सौ से बढ़ाकर पांच सौ रूपये करने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।       

    मंत्रिपरिषद का निर्णय

             दिनांक 23 दिसम्बर 2008 

  •  किसानों को समर्थन मूल्य पर धान विक्रय पर 270 रूपए प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय। इसमें से पचास रूपए का अंशदान केन्द्र सरकार द्वारा किया जाएगा और 220 रूपए राज्य सरकार देगी। बोनस का भुगतान दो किश्तों में किया जाएगा। पचास प्रतिशत राशि इसी वित्तीय वर्ष में 31 जनवरी से 30 मार्च के बीच किसानों के खाते में डाल दी जाएगी। शेष पचास प्रतिशत राशि अगले वित्तीय वर्ष के शुरू में दी जाएगी। बोनस पर 880 करोड़ से 980 करोड़ रूपए की राशि व्यय होने का अनुमान है। सरकार किसानों को एक प्रमाण पत्र देगी। यह प्रमाण पत्र गारंटी कार्ड का काम करेगा।
  •  जनवरी के प्रथम सप्ताह में आनावारी रिपोर्ट आने के बाद कुछ और इलाकों को सूखा ग्रस्त घोषित किया जाएगा और सभी जगह राहत कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।

मंत्रिपरिषद का निर्णय-2009

मंत्रिपरिषद का निर्णय

दिनांक 02 जनवरी 2009
  • राज्यपाल के अभिभाषण का अनुमोदन।

मंत्रिपरिषद का निर्णय

 

दिनांक 20 जनवरी 2009
  •   पृथक महिला बटालियन गठित करने का फैसला।
  •   धान की कस्टम मिलिंग दर में दस रूपये की वृद्वि की मंजूरी। राईस मिलर्स को कस्टम मिलिंग के लिए 35 रूपए के स्थान पर 45 रूपये प्रति क्विंटल मिलेंगे।
  • सरस्वती साइकिल योजना के तहत स्कूली छात्राओं को साइकिल खरीद कर देने के बजाए साइकिल की कीमत देने का फैसला। प्रत्येक छात्रा को 2400 रूपये के मान से राशि दी जाएगी। इस योजना में राज्य की साठ हजार छात्राओं को साइकिल देने का प्रावधान है।

मंत्रिपरिषद का निर्णय

दिनांक 02 मार्च 2009
  •  शासकीय कर्मचारियों एवं पेंशनरों हेतु केन्द्रीय वेतन आयोग की अनुशंसा एक जनवरी 2006 से लागू। एक सितम्बर 2008 से नगद भुगतान।
  •  एक जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक बकाया राशि का भुगतान तीन वर्ष में किया जाएगा। (30 प्रतिशत, 30 प्रतिशत तथा 40 प्रतिशत)
  •  पेंशनरों को पुनरीक्षित पेंशन का भुगतान राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के अनुसार मध्यप्रदेश शासन की सहमति उपरांत किया जाएगा। पेंशनर्स की बकाया राशि का भुगतान दो वर्षों में किया जाएगा।
  •  एक सितम्बर 2008 से 31 मार्च 2009 की बकाया राशि का भुगतान 2009-10 में किया जाएगा।
  •  बकाया वेतन तथा पेंशन के भुगतान में राज्य सरकार पर वर्ष 2009-10 में रूपए 1100 करोड़ तथा वर्ष 2010-11 में रूपए 850 करोड़ एवं वर्ष 2011-12 में रूपए 800 करोड़ व्यय अनुमानित है।
  • अन्य भत्तों के संबंध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की अनुशंसाएं प्राप्त होने पर निर्णय किया जाएगा। नये वेतनमान से खजाने पर 35 फीसदी का अतिरिक्त मार पड़ेगा।
  • मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का गठन। चार अशासकीय संख्या सहित कुल सात सदस्य। राजस्व मंत्री पदेन उपाध्यक्ष, मुख्य सचिव एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव पदेन सदस्य होंगे। अशासकीय सदस्यों में सांसद श्री सोहन पोटाई, विधायक श्री राजू सिंह क्षत्रिय, पूर्व विधायक श्री बनवारी लाल अग्रवाल एवं श्री शिवरतन शर्मा सदस्य नामांकित किए गए हैं।

 

मंत्रिपरिषद के निर्णय

रायपुर, 01 जून 2009
 

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में निम्न लिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये :-

  •   राज्य में 5 हार्स पावर तक के सिंचाई पंपों के लिए सभी किसानों को नि:शुल्क बिजली देने की योजना स्वतंत्रता दिवस पर आगामी 15 अगस्त 2009 से शुरू होगी। इसके लिए राज्य शासन द्वारा सालाना 150 करोड़ रूपये की अनुमानित अनुदान राशि का भुगतान छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी को किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि राज्य में अभी तक यह योजना अनुसूचित जातियों और जनजातियों के किसानों के लिए लागू थी। अब सभी किसानों को इसका लाभ मिलेगा।
  •  योजना के तहत प्रत्येक कृषक परिवार के एक सदस्य को सिंचाई पंप के लिए निशुल्क बिजली की पात्रता होगी। यह सुविधा ऐसे किसानों को भी मिलेगी जो सामुदायिक सिंचाई योजना को तहत सिंचाई कर रहा है लेकिन ऐसी अवस्था में प्रत्येक हितग्राही द्वारा उपयोग किये जा रहे कृषि पंप हेतु अधिकतम 5 हार्स पॉवर की सीमा लागू होगी। जिन कृषक उपभोक्ताआं पर विद्युत वितरण कंपनी की बकाया राशि भुगतान के लिए शेष है, उन्हे यह सुविधा नहीं मिलेगी।
  •   इस योजना के तहत दिये जाने वाले सभी नये विद्युत कनेक्शनों के अतंर्गत उपभोक्ता को ऊर्जा कार्य कुशलता ब्यूरो के द्वारा अनुमोदित पंप सेट,पी.व्ही.सी. सक्शन और डिलीवरी पाईप, घर्षणरहित फुटवाल्व तथा उपयुक्त क्षमता का केपेसिटर लगाना अनिवार्य होगा। ऐसे किसान जिनके पंप वर्तमान में ऊर्जीकृत हैं, उन्हें एक वर्ष के अन्दर पुराने पंपों के बदले ऊर्जा कार्यकुशलता ब्यूरो द्वारा अनुमोदित पंप सेट स्थापित करना होगा साथ ही वर्तमान जी.आई.पाईप लाईन पी.व्ही. सी. सक्शन और डिलीवरी पाईप और घर्षणरहित फुटवाल्व से बदलना होगा। साथ ही उपयुक्त क्षमता का केपेसिटर स्थापित करना होगा अन्यथा नि:शुल्क विद्युत प्राप्त करने की पात्रता समाप्त हो जाएगी। योजना के तहत प्रत्येक कृषि पंप उपभोक्ता को 20 वाट तक के सी.एफ.एल बल्ब की स्थापना प्रकाश के लिए करना अनिवार्य होगा। नि:शुल्क विद्युत की सुविधा के लिए 150 यूनिट प्रति हार्सपावर प्रति माह की दर से बिजली की खपत की सीमा लागू होगी अर्थात अधिकतम 5 हार्सपावर के पंप के लिए प्रत्येक माह 750 यूनिट तक सीमा लागू रहेगी। इससे ज्यादा खपत पाये जाने पर नि:शुल्क बिजली की यह सुविधा स्वयं समाप्त हो जाएगी। इस योजना के तहत शासकीय, अर्ध्दशासकीय कृषि फार्म हाऊस, निगम, निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों को नि:शुल्क बिजली की पात्रता नहीं होगी।
  •   वर्तमान खरीफ वर्ष 2008-2009 में समर्थन मूल्य पर 37.59 लाख मीटरिक टन धान की खरीद की गयी है। इसमें से 8.58 लाख मीटरिक टन धान भारतीय खाद्य निगम को प्रदाय करने उपरांत शेष 29.0 लाख मीटरिक टन धान की मिलिंग मार्कफेड द्वारा कराई जा रही है। मंत्रिपरिषद ने निर्णय लिया कि 23 दिसम्बर 2008 के बाद राइस मिलर्स द्वारा मिलिंग हेतु उठाव की जाने वाली समस्त मात्रा पर 10 रूपये प्रति क्विंटल मिलिंग प्रोत्साहन राशि सहित कुल 45 रूपये प्रति क्विंटल अरवा कस्टम मिलिंग चार्ज का भुगतान किया जाए। जिन मिलर्स द्वारा अनुबंध अवधि में 3 माह की वृद्वि किए जाने के बाद भी उठाव नहीं किया गया है, उनकी समीक्षा कलेक्टर करेंगे बिना पर्याप्त कारण के विलंब पर अर्थदंड की कार्यवाही की जाएगी परंतु पर्याप्त कारण होने पर कलेक्टर अनुबंध अवधि 30 जून तक बढ़ा सकेंगे।
  •   नया रायपुर परियोजना हेतु आपसी करार द्वारा निजी भूमि क्रय करने पर एन.आर.डी.ए. को मुद्रांक शुल्क से छूट की अवधि मार्च 2010 तक बढ़ाने की अनुमति दी गयी।
  •  छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लि. को राज्य के बाहर की  शासकीय अर्धशासकीय बीज प्रदायक संस्थाओं से बीज क्रय हेतु अनुमति दी गयी।
  •   जल संसाधन विभाग के रिटायर्ड कार्यपालन अभियंता श्री के.पी. पटेल से  आर्थिक क्षति रूपये 9,52,574- (नौ लाख बावन हजार पांच सौ चौहत्तर) की वसूली पेंशन से किए जाने की अनुमति मंत्रिपरिषद द्वारा दी गयी ।
  • छत्तीसगढ़ निजी व्यवसायिक शिक्षण संस्था (प्रवेश का विनियमन एवं शुल्क का निर्धारण) (संशोधन) अध्यादेश 2009 का अनुमोदन मंत्रिपरिषद द्वारा किया गया।

मंत्रिपरिषद के निर्णय

रायपुर, 25 जून 2009
  •   अब दो से अधिक बच्चों वाले भी नगरीय निकाय का चुनाव लड़ सकेंगे। पंचायतों के लिए यह निर्णय पहले ही लिया जा चुका है। नए नियम आगामी चुनाव से प्रभावशील होगा।
  •   नई राजधानी क्षेत्र के किसानों को, जिनकी भूमि अधिग्रहित की गई है, प्रदेश में किसी भी क्षेत्र में भूमि खरीदने पर तीन साल तक स्टाम्प शुल्क में छूट मिलेगी। पहले किसानों को एक साल के लिए यह छूट दी गई थी।
  •  राज्य की 33 तहसीलें जहां सूखा पड़ा था, वहां बारिश होने तक राहत कार्य जारी रहेंगे। अन्य क्षेत्रों में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत काम चलाए जाएंगे।
  •  तैतीस सूखाग्रस्त तहसीलों में 7 से 15 जुलाई के बीच कृषि बीमा योजना के 68 करोड़ रूपए का भुगतान किसानों को कर दिया जाएगा।
  •   कैबिनेट ने नाबार्ड के जरिए सहकारी बैंकों द्वारा लिए जाने वाले 350 करोड़ रूपए की साख गारंटी को शुल्क मुक्त कर दिया।
  •  सरस्वती सायकल योजना के तहत पूरे प्रदेश के लिए सायकल खरीदी के लिए छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सी.आई.डी.सी.) दर तय करेगा।
  • राज्य के 37 लाख गरीबों को एक और दो रूपए किलो चावल योजना 08 जुलाई 2009 से पूरे प्रदेश में एक साथ शुरू होगी। यह योजना 'चावल उत्सव' के रूप में प्रत्येक सहकारी समिति स्तर पर शुरू की जाएगी। इसमें सरपंच से लेकर मंत्री तक जन-प्रतिनिधि शामिल होंगे। बी.पी.एल., अन्त्योदय योजना के हितग्राही और नि:शक्तजनों को प्रति माह 35 किलो चावल दिया जाएगा।

मंत्रिपरिषद का निर्णय

दिनांक 15 जुलाई 2009
 
  •  नक्सल हिंसा में 01 अप्रैल 2009 के बाद शहीद होने वाले पुलिस कर्मियों और अधिकारियों के परिजनों को हाउसिंग बोर्ड का मकान लेने पर विशेष छूट दी जाएगी। प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के परिजनों को छह लाख रूपये, द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के परिजनों को चार लाख रूपये और तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को दो लाख रूपए की छूट मिलेगी। परिजन अपने गृह जिले में हाउसिंग बोर्ड की किसी भी योजना का चयन कर सकते हैं, उन्हें लाटरी निकाले बिना ही मकान का आबंटन किया जाएगा।
  •  नक्सल हिंसा में शहीद होने वाले एस.पी.ओ. के परिजनों को विभिन्न योजनाओं में दो लाख रूपये तक के मकान मुफ्त दिए जाएंगे।
  •  प्रदेश के नक्सल प्रभावित सभी संवेदनशील और अतिसंवेदनशील थानों में तैनात जवानों को अब 20 प्रतिशत नक्सल क्षेत्र भत्ता दिया जाएगा। अब तक केवल राजनांदगांव, बस्तर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और बलरामपुर के नक्सल प्रभावित अतिसंवेदनशील थानें में पदस्थ जवानों को 20 प्रतिशत नक्सल क्षेत्र भत्ता मिलता था। इसके अलावा इन्ही क्षेत्र के 77 थानों के जवानों को 15 प्रतिशत नक्सल क्षेत्र भत्ता मिलता था।
  • राजनांदगांव जिले के मानपुर क्षेत्र के मदनवाड़ा में 12 जुलाई 09 की नक्सल घटना में शहीद पुलिस कर्मियों के परिजनों को 60 दिनों के भीतर अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान करने का निर्णय। चार शहीद अधिकारियों के आश्रितों के लिए विशिष्ट अनुकम्पा नियुक्ति की अनुमति।
  • विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किए जाने वाले अनुपूरक बजट को मंजूरी।

मंत्रिपरिषद की बैठक

दिनांक 10 अगस्त 2009
 
  • अल्प वर्षा और खण्ड वर्षा से निपटने के उपायों पर विचार-विमर्श
  • विभागों को आकस्मिक कार्य योजना तैयार करने के निर्देश।
  •   कृषि, जलसंसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और वन सहित सभी संबंधित विभागों को आकस्मिक कार्य योजना तैयार रखने के निर्देश दिए गए, जिसमें रोजगार की .ष्टि से अनुमानित प्रस्ताव शामिल किए जाएंगे।
  •  जिन इलाकों में औसत बारिश 50 प्रतिशत से कम है, वहां जिला कलेक्टर स्वयं दौरा करें और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, जल संसाधन, कृषि तथा राजस्व विभाग के अधिकारियों की टीम बनाकर उन्हें ऐसे इलाकों का स्थल निरीक्षण करने तथा एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित करें, ताकि उस रिपोर्ट के आधार पर जरूरी कार्य योजना तैयार की जा सके।
  •  बैठक में राज्य के बरसाती नालों में पानी रोकने के लिए अस्थाई व्यवस्था के तहत कच्चे नाला बंधान अधिक से अधिक संख्या में बनवाने का निर्णय भी लिया गया, ताकि पेयजल और निस्तारी सहित सिंचाई के लिए भी उसका उपयोग किया जा सके। इसी तरह जिन स्टाप डेमों में गेट नहीं है या खराब हो चुके हैं, उनमें गेट जल्द लगवाने और खराब गेटों की मरम्मत भी तत्काल करवाने के निर्देश भी दिए गए। यह भी तय किया गया कि जिन जलाशयों में 25 प्रतिशत से अधिक पानी है, वहां पेयजल और निस्तारी के लिए 25 प्रतिशत पानी रोक कर शेष पानी सिंचाई के लिए दिया जा सकता है।
  • लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को पेयजल की .ष्टि से गंभीर समस्या मूलक इलाकों में नलकूप खनन के लिए फिलहाल कुछ मशीने किराए पर लेने की अनुमति भी प्रदान कर दी गई। केबिनेट की बैठक में विभिन्न विभागों के सचिवों ने अल्प वर्षा और खण्ड वर्षा की स्थिति में अपने-अपने विभागों के द्वारा किए जा रहे उपायों की भी जानकारी दी।

 

मंत्रिपरिषद के निर्णय

दिनांक 08 सितम्बर 2009
 
  •   प्रदेश की नगरीय निकायों के सभी नियमित कर्मचारियों को सितम्बर 2009 के वेतन के साथ (जिसका भुगतान माह अक्टूबर में होगा) मूल वेतन का 20 प्रतिशत अंतरिम राहत के रूप में दिया जाएगा। यह लगातार तब तक जारी रहेगा जब तक निकाय को छठवां वेतनमान स्वीकृत नहीं होता है।
  •   नगरीय निकायों में आम जनता के विकास कार्य अवरूध्द न हों, इसे दृष्टिगत रखते हुए छठवां वेतनमान उन्हीं नगरीय निकायों में लागू किया जाएगा, जिनका स्थापना व्यय 65 प्रतिशत से कम हो।
  •   छठवें वेतनमान का नकद भुगतान पात्र नगरीय निकायों को जनवरी 2010 के वेतन के साथ (जो फरवरी 2010 में देय होगा) से प्रारंभ हो जाएगा।
  •  राज्य में किसानों को 05 हार्स पावर तक के पम्प कनेक्शनों पर नि:शुल्क विद्युत की सुविधा देने का निर्णय लिया गया। दो अक्टूबर 2009 से संचालित की जाने वाली इस योजना के अन्तर्गत 132 करोड़ रूपए का अनुदान राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कम्पनी को उपलब्ध कराया जाएगा।
  •   प्रत्येक किसान को वार्षिक आधार पर 6000 यूनिटों तक नि:शुल्क विद्युत की पात्रता रहेगी एवं इससे अधिक खपत होने पर अधिक यूनिटों पर एक रूपए प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना होगा।
  •  राज्य में 12 अक्टूबर 2009 से 31 जनवरी 2010 तक समर्थन मूल्य पर किसानों से धान खरीदी का निर्णय। धान खरीदी 1577 केन्द्रों पर की जाएगी। सामान्य धान 950 रूपए प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान 980 रूपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा। मक्का 840 रूपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा।
  •   समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से 4200 करोड़ रूपए का ऋण लेने के प्रस्ताव की मंजूरी। दस करोड़ बारदाने की खरीदी के लिए तीन सौ करोड़ रूपए की स्वीकृति। बारदानों की खरीदी डायरेक्टर जर्नल ऑफ सिविल सप्लाई एण्ड डिस्पोजल से की जाएगी।
  •   इस वर्ष भारतीय खाद्य निगम ने धान के स्थान पर चावल लेने के निर्णय से राज्य शासन को अवगत कराया है। इसलिए राज्य शासन सभी पन्द्रह सौ राईस मिलों को मिलिंग के कार्यों में लगाएगा। इस व्यवस्था को देखते हुए राज्य शासन ने सभी मिलों की भण्डारण क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया है। कलेक्टरों को अपने जिलों की मिलिंग क्षमता के अनुसार छह माह तक भण्डारण करने की छूट होगी।

मंत्रिपरिषद के निर्णय

दिनांक 20 अक्टूबर 2009
 

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज शाम यहां मंत्रालय में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जो इस प्रकार हैं -

  •  संग्रहण वर्ष 2008 से तेंदूपत्ते के व्यापार से प्राप्त शुध्द आय में से 80 प्रतिशत राशि संग्राहकों को प्रोत्साहन पारिश्रमिक के रूप में दी जाएगी। इसके बाद बचत राशि में से 15 प्रतिशत राशि प्राथमिक समितियों को अराष्ट्रीयकृत लघु वनोपज के व्यापार हेतु दी जाएगी। यह राशि समितियों को अराष्ट्रीयकृत लघु वनोपज के क्रय-विक्रय, भण्डारण तथा प्रसंस्करण हेतु उपलब्ध कराई जाएगी तथा यह कार्य लघु वनोपज संघ के मार्गदर्शन में किया जाएगा। शेष पांच प्रतिशत राशि घाटे वाली समितियों के घाटे की अस्थाई प्रतिपूर्ति के लिए परिक्रमण निधि के रूप में लघु वनोपज संघ के मुख्यालय में सुरक्षित रखने का निर्णय लिया गया।
  •  छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों को वायुसेवा से जोड़ने के प्रस्ताव पर सैध्दांतिक सहमति दी गई। बैठक में यह सुझाव दिया गया कि विशाखापट्टनम, रांची, नागपुर के लिए भी वायुसेवा का विस्तार किया जाए, जिससे विमान किराये में अपेक्षित कमी भी आएगी। उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा भिलाई, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, अम्बिकापुर, जशपुर तथा जगदलपुर को घरेलू विमान सेवा से जोड़ने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव के सभी पहलुओं के परीक्षण के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा।
  •  धान उपार्जन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर 700 करोड़ का ऋण प्राप्त करने हेतु शासकीय प्रत्याभूति जारी करने की सहमति भी दी गयी।


केबिनेट के निर्णय

दिनांक 06 नवम्बर 2009
  •  रायपुर विकास प्राधिकरण और हाउसिंग बोर्ड के भू-खंड और मकान लेने वाले हितग्राहियों को लगने वाला भू-भाटक समाप्त करने का निर्णय। इन संस्थाओं से 30 वर्ष की लीज पर दिए जाने वाले भूखण्ड और मकानों का मालिकाना हक लोगों को दे दिया जाएगा। इसके एवज में 99 साल के लिए एक मुश्त राशि लेकर भूखण्ड या मकान फ्री होल्ड कर दिया जाएगा। इसके नियम और प्रक्रिया तय करने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गयी है।
  •  राज्य की वर्ष 2009-14 की नयी पंच वर्षीय औद्योगिक नीति मंजूर। यह नीति 01 नवम्बर 2009 से लागू।
  •  उद्योगों के लिए जमीन की नयी दरें निर्धारित मुरूम वाली जमीन की कीमत 50 हजार रूपए प्रति एकड़ थी, जिसे बढ़ाकर कम से कम पांच लाख रूपए प्रति एकड़, असिंचित जमीन जिसकी कीमत 75 हजार रूपए प्रति एकड़ निर्धारित थी, उसके लिए 7 लाख 50 हजार रूपए और सिंचित जमीन की कीमत एक लाख रूपए से बढ़ाकर दस लाख रूपए निर्धारित की गई।
  •   नयी उद्योग नीति कोर सेक्टर के उद्योगों की अपेक्षा लघु उद्योगों पर केन्द्रित। सभी वृहद औद्योगिक क्षेत्रों में कम से कम 20 प्रतिशत जमीन लघु उद्योगों के लिए आरक्षित रखी जाएगी। अब स्टील, पॉवर, सीमेन्ट व एल्युमिनियम उद्योगों को भूमि पंजीयन पर स्टाम्प शुल्क में छूट के अलावा अन्य छूट की पात्रता नहीं होगी।
  •   नई उद्योग नीति में डाउन स्ट्रीट उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा। संतुलित विकास की दृष्टि से जिलों के स्थान पर अब विकासखण्ड को यूनिट माना जाएगा।
  •   75 एकड़ के रकबे में निजी औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की अनुमति दी जाएगी।
  •   सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की भागीदारी (पी.पी.पी.) माडल से औद्योगिक क्षेत्रों में अधोसंरचना विकसित की जाएगी। जिसके तहत खदान क्षेत्र से उद्योगों तक कॉमन रेल कारिडोर, कांक्रीट छह लेन सड़कों का निर्माण, छह-सात उद्योगों के लिए एनीकटों का निर्माण कर कॉमन वाटर सप्लाई जैसी सुविधाएं विकसित की जाएगा।
  •  महिला, विकलांग, सेवानिवृत्त और नक्सल प्रभावितों को उद्योग लगाने पर दस प्रतिशत छूट का प्रावधान। एन.आर.आई. एवं शत-प्रतिशत एफ.डी.आई. वाले निवेशकों को पांच प्रतिशत अधिक अनुदान का प्रावधान। निर्यात संवर्धन के लिए रायपुर में सूचना केन्द्र स्थापित करने की मंजूरी। पर्यटन, लॉजिस्टिक हब और वेयर हाउसिंग को भी उद्योग की भांति रियायत देने पर विचार। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमियों को मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत बजट में प्रावधान कर विशेष छूट देने का प्रस्ताव।
  •   मेटल, प्लास्टिक, जेम एण्ड ज्वेलरी, हर्बल, फूड, इंजीनियरिंग और एल्युमिनियम तथा फार्मेस्युटिकल पार्क विकसित किए जाएंगे।
  •   प्रदूषण रोकने उद्योगों को आधुनिक तकनीकी का उपयोग करना होगा।
  •   युवाओं को तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा का प्रशिक्षण कोर सेक्टर के उद्योगों के साथ जोड़कर देने का प्रावधान।
  •    बड़े उद्योगों को सामुदायिक क्षेत्र विकास योजना के तहत पूरे जिले को विकसित करना होगा।
  •   जिलों में भूमि बैंक बनाए जाएंगे।

मंत्रिपरिषद के निर्णय- 2010

 केबिनेट के निर्णय

दिनांक 04 जनवरी 2010

 

  • राज्यपाल के अभिभाषण को मंजूरी।
  • अनुपूरक बजट को मंजूरी।
  • धान की कस्टम मिलिंग दर में पांच रूपये का इजाफा। अब मिलिंग दर बढ़कर 40 रूपये प्रति क्विंटल हो गई है।
  • मूल निवास प्रमाण पत्र हेतु पात्रता के मौजूदा प्रावधान में यह भी जोड़ा गया कि यदि आवेदक के माता-पिता में से एक के पास मूल निवासी प्रमाण पत्र हो अथवा वे इसकी पात्रता रखते हैं तो उसे प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा। माता-पिता के दिवंगत होने की स्थिति में यह देखा जाएगा कि क्या वे जीवित अवस्था में इस प्रमाण पत्र की पात्रता रखते थे।
  •  मिलरों की मांग के मद्देनजर अरवा और उसना चावल की झड़ती दो-दो किलो कम करने की अनुशंसा केन्द्र सरकार से की गयी। अरवा की झड़ती 68 से घटाकर 66 किलो तथा उसना की झड़ती 67 से घटाकर 65 किलो करने की सिफारिश की गई।
  •   नक्सल हिंसा में शहीद विशेष सुरक्षा अधिकारी (एस.पी.ओ) के परिजनों को मुफ्त में दीनदयाल और अटल आवास देने का निर्णय।

मंत्रिपरिषद के निर्णय

 रायपुर ,30 जनवरी 2010

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए :-

  •   समर्थन मूल्य पर धान के नगद उपार्जन की समयावधि दिनांक 05 फरवरी 2010 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया। ज्ञातव्य है कि राज्य शासन द्वारा वर्तमान खरीफ विपणन वर्ष 2009-2010 में समर्थन मूल्य पर धान के नगद उपार्जन की तिथि 12 अक्टूबर 2009 से 31 जनवरी 2010 तक तथा लिंकिंग के तहत दिनांक 15 फरवरी 2010 तक निर्धारित की गयी थी।


    दिनांक 28 जनवरी 2010 तक समस्त उपार्जन केन्द्रों में समर्थन मूल्य पर 36.38 लाख टन धान की खरीदी की जा चुकी है, जो विगत वर्ष 28 जनवरी 2009 की स्थिति में हुई धान खरीदी 32.51 लाख टन से लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। अब तक पिछले वर्ष की तुलना में रायपुर जिले में 21 प्रतिशत तथा महासमुन्द जिले में 35 प्रतिशत अधिक खरीदी हुई है। उपार्जन की शेष अवधि में प्रदेश में धान उपार्जन की मात्रा 40 लाख टन से अधिक भी हो सकती है।

  •     प्रचलित मछली पालन नीति की कण्डिका क्रमांक 16 में संशोधन कर तालाबों व सिंचाई जलाशयों में लीज की समय-सीमा 5 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष करने का निर्णय लिया गया।
  •    मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 68(2) के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा अधिकारियों/कर्मचारियों का दिनांक 01.11.2000 से उत्तरवर्ती राज्यों को अंतिम आवंटन किया गया है। ऐसे अधिकारी/कर्मचारी जिनके संबंध में न्यायालय से कोई भी स्थगन या अन्यथा आदेश नहीं है एवं जिनके संबंध में दोनों राज्य की सहमति से संविलियन/प्रतिनियुक्ति की कार्रवाई नहीं की गई है, उनके लिए दोनों राज्य अगर प्रतिनियुक्ति/संविलियन के लिए सहमत होते हैं तो 31 मई 2010 तक प्रतिनियुक्ति/संविलियन अथवा अंतिम आवंटन की कार्रवाई कर ली जाए अन्यथा छत्ताीसगढ़ के ऐसे अधिकारियों/कर्मचारियों को मध्यप्रदेश द्वारा 31 मई 2010 तक यदि कार्यमुक्त नहीं किया जाता है तो माना जायेगा कि मध्यप्रदेश सरकार ने उनका संविलियन मध्यप्रदेश में कर लिया है और 31 मई 2010 के बाद उन्हें छत्ताीसगढ़ में कार्यभार ग्रहण नहीं कराया जायेगा।

    मंत्रिपरिषद द्वारा अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार किया गया।

 

मंत्रिपरिषद के निर्णय

रायपुर 09 मार्च 2010

औद्योगिक-वाणिज्यिक परियोजनाओं के भू-विस्थापितों के लिए मुआवजा राशि में भारी वृध्दि ...

मंत्रिपरिषद ने लिया आदर्श पुनर्वास नीति में संशोधन का निर्णय

मुआवजा राशि पड़त भूमि के लिए 50 हजार से बढ़कर छह लाख,

एक फसली असिंचित भूमि के लिए 75 हजार से बढ़कर आठ लाख और

दो फसली सिंचित भूमि के लिए एक लाख से बढ़कर दस लाख रूपए प्रति एकड़ होगी

छत्तीसगढ़ में विभिन्न औद्योगिक और वाणिज्यिक परियोजनाओं के प्रभावित भू-विस्थापितों के लिए दी जाने वाली मुआवजे की राशि में राज्य सरकार ने भारी वृध्दि करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज दोपहर यहां आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में इस प्रकार की परियोजनाओं में भूमिस्वामियों को उनकी जमीन का समुचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। संबंधित भूमिस्वामियों को अब तक मिल रही मुआवजे की राशि में मंत्रिपरिषद के इस फैसले के अनुरूप लगभग दस गुना से लेकर बारह गुना तक बढ़ोत्तरी हो जाएगी। मंत्रिपरिषद ने इसके लिए राज्य की आदर्श पुनर्वास नीति की कंडिका 4.1.5 में संशोधन करने का निण्र्ाय लिया। राजस्व मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने आज अपरान्ह विधानसभा में सदस्यों को केबिनेट के इस निर्णय की जानकारी दी। श्री अग्रवाल ने सदन को बताया कि इस फैसले के अनुसार आदर्श पुनर्वास नीति में होने वाले संशोधन के फलस्वरूप भू-विस्थापितों को दो फसली सिंचित भूमि के लिए एक लाख रूपए प्रति एकड़ के स्थान पर दस लाख रूपए प्रति एकड़, एक फसली असिंचित भूमि के लिए 75 हजार रूपए प्रति एकड़ के स्थान पर आठ लाख रूपए प्रति एकड़ और पड़त भूमि के लिए अब 50 हजार रूपए प्रति एकड़ के स्थान पर छह लाख रूपए प्रति एकड़ की दर से मुआवजा मिलेगा। राजस्व मंत्री ने सदन को बताया कि भूमिस्वामियों को अनिवार्य भू-अर्जन अथवा आपसी सहमति के माध्यम से क्रय की जाने वाली भूमि के बदले ये नवीन दरें प्राप्त होंगी।  मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में केबिनेट की बैठक विधानसभा परिसर स्थित मुख्य समिति कक्ष में आयोजित की गयी।

क्रमांक 4328/स्वराज्य

 

केबिनेट की बैठक

    26 मार्च 2010 को विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में आयोजित की गयी।

 

मंत्रि-परिषद के निर्णय

दिनांक 26 मई 2010
  •     वर्ष 2010-11 के लिए स्थानांतरण नीति में फेरबदल नहीं करने का फैसला। माह जून-जुलाई में होने वाले तबादले इस वर्ष नहीं होंगे। मुख्यमंत्री की सहमति से समन्वय के जरिए अत्यावश्यक तबादले जारी रहेंगे।
  •    नक्सल प्रभावित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों विशेष रूप से विधायकों को जिला मुख्यालयों में शासकीय आवास देने का निर्णय।
  •     भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय के निर्माण हेतु रायपुर के नजदीक बोरियाकला में तथा बालोद, मुंगेली और बिलासपुर में जिला कार्यालयों के लिए भूमि रियायती दर पर देने के प्रस्ताव को हरी झण्डी।
  •     अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में साल बीज की मांग और कीमत गिरने के कारण साल बीज का समर्थन मूल्य दस रूपए से घटाकर पांच रूपए प्रति किलो करने का निर्णय। पांच रूपए किलो खरीदी पर जो लाभ मिलेगा, उसका बोनस संग्राहकों को दिया जाएगा।
  •   जल संवर्धन के संबंध में जन-जागृति लाने विशेष अभियान चलाने का निर्णय।

 केबिनेट के निर्णय

21 जून 2010
  • छत्तीसगढ़ में निजी मेडिकल कॉलेज खोलने अलग से नीति बनेगी।
  • जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में प्राध्यापकों की कमी को पूरा करने के लिए प्रमोशन के पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। सहायक प्राध्यापकों के पद भी भरे जाएंगे। केबिनेट ने इस साल केवल जिला स्तरीय तबादलों की ही मंजूरी दी है। जिले के प्रभारी मंत्री 15 जुलाई तक अपने-अपने जिलों के प्रभार के क्षेत्र में कर्मचारियों के तबादले कर सकेंगे। प्रदेश स्तर पर होने वाले तबादलों पर प्रतिबंध जारी रहेगा। प्रदेश स्तर के तबादले मुख्यमंत्री के समन्वय से ही हो सकेंगे।
  • राज्य में त्वरित चिकित्सा सेवा के लिए आंध्रप्रदेश के जीवीके समूह को डायल 108 एम्बुलेंस सेवा शुरू करने की मंजूरी। प्रदेश में इमरजेंसी मेडिकल रिसपांस सर्विस दो चरणों में लागू की जाएगी। पहले चरण में 50 एम्बुलेंस और दूसरे चरण में 122 एम्बुलेंस शुरू की जाएगी।

केबिनेट के निर्णय

21 जुलाई 2010
  •   नया रायपुर में हैदराबाद की तर्ज पर छत्तीसगढ़ निर्माण अकादमी की स्थापना की जाएगी। इसमें निर्माण कार्यों के प्रशिक्षण के अलावा डिग्री और डिप्लोमा कोर्स शुरू किए जाएंगे।
  •  छत्तीसगढ़ में अब निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लिनिक और पैथालाजी लैब खोलने के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए छत्तीसगढ़ उपचर्या गृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापना अनुज्ञापन विधेयक 2010 आगामी विधानसभा सत्र में लाया जाएगा।
  •     प्रदेश में अवैध निर्माण पर रोक लगाने विधानसभा के अगले सत्र में नए कानून को मंजूरी दी जाएगी। अवैध निर्माण पर लगाने वाला अर्थदंड 500 रूपए से बढ़ाकर दस हजार रूपए कर दिया गया है। अवैध निर्माण हटाने के लिए पहले तीन सप्ताह पूर्व नोटिस देने का प्रावधान था। अब इसमें एक सप्ताह पहले नोटिस देने का प्रावधान किया जा रहा है।

मंत्रिपरिषद के निर्णय

रायपुर, 12 अगस्त 2010

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज शाम यहां उनके निवास पर आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए :-
1.    लेह (लद्दाख) की प्राकृतिक विपदा में मारे गए छत्तीसगढ़ के मजदूरों के आश्रित परिवारों में से प्रत्येक को प्रति एक लाख रूपए के मुआवजा राशि दी जाएगी। घायल व्यक्तियों के नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था राज्य शासन द्वारा की जा रही है और प्रभावित व्यक्तियों को लाने के लिए राज्य के अधिकारियों का एक दल लेह भेजा गया है, जिससे प्रभावित परिवारों को तात्कालिक सहायता आवश्यकता के अनुरूप दी जा सके।

2.    छत्तीसगढ़ में नये एलोपैथिक चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना के लिए निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहन देने की नीति का अनुमोदन किया गया। इसी प्रकार सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों के लिए और छोटे शहरों एवं विकासखण्ड मुख्यालयों पर नर्सिंग होम चिकित्सालयों की स्थापना के लिए भी निजी क्षेत्र के निवेश के प्रोत्साहन देने की नीति का अनुमोदन किया गया। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को इलाज के लिए दूर-दराज न जाना पड़े, इस उद्देश्य से यह नीति बनायी गयी है। निजी क्षेत्र के चिकित्सा महाविद्यालयों को भारतीय चिकित्सा परिषद के प्रावधानों के अनुसार एक रूपए टोकन राशि पर भूमि उपलब्ध करायी जाएगी। सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों के लिए शहरी क्षेत्रों में दो एकड़ तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पांच एकड़ भूमि एक रूपए टोकन राशि पर दी जाएगी। आदिवासी विकासखण्डों में अस्पतालों के लिए 22,500 वर्गफुट (आधा एकड़) भूमि एक रूपए टोकन राशि पर दी जाएगी। ये सभी अस्पताल शासकीय सेवकों के इलाज के लिए मान्यता प्राप्त होंगे और इनमें गरीबों का नि:शुल्क इलाज किया जाएगा।

3.    मुख्य वन संरक्षकों के 04 पदों का उन्नयन अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद पर किए जाने का निर्णय लिया गया।

4.    अनियमितता के कारण दो सेवानिवृत्त अधिकारियों - श्री पी.डी. ध्रुव (सेवानिवृत्त एस.डी.ओ. राजस्व, जगदलपुर) तथा आर.के. लोहार (सेवानिवृत्त कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग) की पेंशन की पांच प्रतिशत राशि एक वर्ष तक रोकने का अनुमोदन किया गया।

मंत्रिपरिषद के निर्णय



14 सितम्बर 2010
 

 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में निम्नांकित निर्णय लिए गए-

  • राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तावित जीएसटी के मौजूदा स्वरूप से असहमति व्यक्त करते हुए इसमें अपना पक्ष रखने का निर्णय।
  • वन्य प्राणियों के हमलों में होने वाले नुकसान से मुआवजे की राशि में वृद्धि करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत हाथी अथवा जंगली जानवरों के हमले में व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर मुआवजा अब 1.50 लाख रूपए के बजाय 02 लाख रूपए दिया जाएगा। स्थायी अपंगता होने पर 50 हजार रूपए के स्थान पर 75 हजार रूपए, घायल होने पर 10 हजार के स्थान पर 20 हजार रूपए तथा पशुहानि होने पर अधिकतम 15 हजार रूपए का मुआवजा दिया जाएगा।
  • सरगुजा संभाग की तहसीलों को कम वर्षा होने के कारण सूखा ग्रस्त घोषित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग से अनुमति ली जाएगी।

मंत्रिपरिषद के निर्णय

दिनांक 11 अक्टूबर 2010


  • राज्य में एक नवम्बर 2010 से 31 जनवरी 2011 तक किसानों से समर्थन मूल्य पर सहकारी समितियों में धान खरीदी होगी। लिकिंग में धान खरीदी 15 फरवरी तक होगी। इस वर्ष 50 लाख मीटरिक टन धान खरीदी का अनुमानित लक्ष्य। इस पर पांच हजार करोड़ रूपए खर्च होने का अनुमान है। धान खरीदी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य ग्रेड ए और मोटा किस्म के लिए क्रमश: 1030 और 1000 रूपए प्रति क्ंविटल तय किया गया है। पिछले वर्ष यह मूल्य क्रमश: 980 रूपए और 950 रूपए प्रति क्विंटल था। छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए 12 लाख टन धान रखा जाएगा। दस लाख टन केन्द्र सरकार के लिए और शेष एफ.सी.आई. को दिया जाएगा।
  • बारदाने डी जी एस एंड डी के जरिए खरीदे जाएंगे।
  • प्रत्येक खरीदी केन्द्र की पहचान स्पष्ट करने के लिए बोरों पर खरीदी केन्द्र का नाम, नम्बर और धान की क्वालिटी का उल्लेख किया जाएगा। गैर आदिवासी क्षेत्रों के धान खरीदी केन्द्रों में आर्द्रता मापी उपकरण स्थापित किए जाएंगे।
  • राज्य की 1333 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के 1577 धान खरीदी केन्द्रों के प्रशासनिक व्यय में वृध्दि का निर्णय। कर्मचारियों के मोबाइल खर्च, मोटर साइकल, कम्प्यूटर और बीमा आदि पर होने वाले 0.2 प्रतिशत व्यय को बढ़ाकर 0.4 प्रतिशत किया गया। इस वर्ष इस  पर 18 करोड़ रूपए खर्च होने का अनुमान।
  • कस्टम मिलिंग की दर 40 रूपए प्रति क्विंटल यथावत  रखने का निर्णय। एक बार उपयोग किए गए बोरे पर मिलर्स की 14 रूपए प्रति बोरा दिया जाएगा।
  • आगामी रबी मौसम के लिए बांधों से पानी छोड़ने का फैसला। प्राथमिकता के आधार पर दलहन, तिलहन और गेहूं की फसलों के लिए पानी देने का निर्णय। राज्य शासन द्वारा ग्रीष्मकालीन धान का उपार्जन नहीं किया जाएगा।
  • छह माह से कम अवधि जेल में रहने वाले मीसा बंदियों को सम्मान निधि (पेंशन) देने के प्रस्ताव को हरी झंडी। जिले के प्रभारी मंत्री के प्रस्ताव पर जिला कलेक्टर परीक्षण कर अनुशंसा करेंगे। राज्य सरकार द्वारा एक माह से छह माह तक के बंदियों में तीन हजार और छह माह से अधिक के बंदियों को छह हजार रूपए सम्मान निधि दी जा रही है।
  • पटवारियों, राजस्व निरीक्षकों और लिपिकों को नायब तहसीलदार के पद पर पदोन्नति हेतु आयु सीमा में छूट देने का निर्णय। अनारक्षित पदों के लिए आयु सीमा 45 वर्ष से बढ़ाकर 49 वर्ष और आरक्षित वर्ग के लिए 50 वर्ष से बढ़ाकर 55 वर्ष करने का निर्णय।

मंत्रिपरिषद के निर्णय

08 नवम्बर 2010

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह  की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय इस प्रकार हैं-

  • छत्तीसगढ़ जिला योजना समिति संशोधन विधेयक 2010 की अनुसूची में नारायणपुर तथा बीजापुर जिला तथा इन जिलों में सदस्य संख्या 10-10 शामिल की जाए।
  • अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग के आर्थिक विकास हेतु छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम की कार्य योजना हेतु राष्ट्रीय निगमों के लिए वित्तीय वर्ष 2010-11 में वित्त विभाग द्वारा उपबंधित प्रत्याभूति शुल्क के बिना रूपए 20 करोड़ की स्टेट ब्लाॅक गांरटी प्रदान की जाए।
  • छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की चौथे  सदस्य पद पर नियुक्ति के लिए श्री रमेशचन्द्र    शर्मा सेवानिवृत्त आई.पी.एस. के नाम का अनुमोदन किया गया। आयोग में वर्तमान में श्री बी.एल.ठाकुर अध्यक्ष, श्री दुर्गाशरण चंद्रा सदस्य, श्री प्रदीप कुमार देशपांडे सदस्य तथा श्री इतवारी राम खूंटे सदस्य हैं।
  • प्रदेश के किसानो को कृषि ऋण वितरण हेतु कृषकों के सहकारी ऋणों पर ब्याज अनुदान नियम 2010 वर्ष 2010-11 एवं पश्चतावर्ती वर्षों में दिनांक 01.04.2010 से लागू किए जाने का अनुमोदन किया गया।
  • छत्तीसगढ़ मंत्रालय में अवर सचिव के पद पर कार्यरत रहे श्री ए.आर.दीवान ने लकवाग्रस्त होने के कारण असमर्थता सेवानिवृत्ति ली थी। इनके पुत्र श्री हेमन्त कुमार दीवान को सहायक ग्रेड-3 के पद पर विशेष नियुक्ति देने का निर्णय लिया गया।

क्रमांक-3622

केबिनेट के निर्णय

दिनांक 30 नवम्बर 2010
 

  •  द्वितीय अनुपूरक बजट को मंजूरी। इस तरह अब राज्य का बजट 28 हजार करोड़ रूपए से अधिक हो जाएगा।
  •  मंडी चुनावों को लेकर कृषि उपज मंडी एवं साहूकारी प्रथा अधिनियम संशोधन विधेयक को मंजूरी।
  •  मार्कफेड को बारदाना खरीदी के लिए एक सौ करोड रूपए देने का निर्णय।
  •  छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण विकास संस्थान निमोरा के संचालन के लिए स्वायत्त निकाय का गठन करने का निर्णय।
  •  गन्ना उत्पादकों को 35 रूपए प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय। गन्ना 186 रूपए प्रतिक्विंटल की दर से खरीदा जाएगा। इसमें तेरह रूपए परिवहन भत्ता भी शामिल है।
  •  नक्सल प्रभावित इलाकों में मंजूर एस.पी.ओ. के तीन हजार से अधिक पद जल्द भरने का निर्णय।
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