Homeरायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा में कृषि, पशुपालन, मछलीपालन,जल संसाधन तथा धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग की अनुदान मांगें पारित : मंत्री श्री अग्रवाल ने अनुदान मांगों पर हुई चर्चा के जवाब में विभागीय उपलब्धियों और प्रस्तावित कार्यों का दिया ब्यौरा

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रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा में कृषि, पशुपालन, मछलीपालन,जल संसाधन तथा धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग की अनुदान मांगें पारित : मंत्री श्री अग्रवाल ने अनुदान मांगों पर हुई चर्चा के जवाब में विभागीय उपलब्धियों और प्रस्तावित कार्यों का दिया ब्यौरा

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रायपुर, 20 मार्च 2017

छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज आगामी वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए कृषि, पशुपालन, मछलीपालन, उद्यानिकी, जल संसाधन,  आयाकट, जैव प्रौद्योगिकी तथा धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग से संबंधित चार हजार 227 करोड़ 42 लाख 30 हजार रूपए की अनुदान मांगे पारित की गई। इनमें कृषि विभाग के लिए एक हजार 269 करोड़ 98 लाख 32 हजार रूपए, पशुपालन विभाग के लिए 455 करोड़ 95 लाख 95 हजार रूपए, मछलीपालन विभाग के लिए 63 करोड़ 26 लाख 67 हजार रूपए, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा के लिए 152 करोड़ 70 लाख रूपए, जल संसाधन विभाग के लिए 979 करोड़ 34 लाख 91 हजार रूपए, आयाकट विभाग के लिए 32 करोड़ 62 लाख 76 हजार रूपए, लघु सिंचाई निर्माण कार्य के लिए 559 करोड़ 37 लाख 9 हजार रूपए, जल संसाधन विभाग से संबंधित नाबार्ड से सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लिए 699 करोड़ 91 लाख रूपए तथा धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के लिए 14 करोड़ 25 लाख 60 हजार रूपए की अनुदान मांगे शामिल  है। इन विभागों के मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने अनुदान मांगों पर लंबी चली चर्चा के बाद अपने जवाब में विभागीय उपलब्धियों और वित्तीय वर्ष 2017-18 में किए जाने वाले कार्यो का विस्तार से ब्यौरा दिया। चर्चा में 23 सदस्यों ने हिस्सा लिया।
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग
मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने जवाब देने का सिलसिला धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग से किया। उन्होंने कहा कि राजिम कुंभ से आज देश-विदेश में छत्तीसगढ़ की विशेष पहचान बनी है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में बारह साल पहले राजिम के त्रिवेणी संगम पर कुंभ आयोजित करने की परम्परा शुरू हुई। इस साल बारहवें वर्ष के उपलक्ष्य में राजिम महाकुंभ (कल्प) का आयोजन 10 फरवरी से 24 फरवरी तक सफलतापूर्वक किया गया। श्री अग्रवाल ने बताया कि राज्य शासन द्वारा संधारित मंदिरों के लिए आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में एक करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार तीर्थनगरी राजिम के आसपास स्थित के पंचकोशी धामों के विकास के लिए एक करोड़ रूपए की व्यवस्था की गई है। राज्य सरकार द्वारा संधारित मंदिरों के पुजारियों को पूजा-पाठ का प्रशिक्षण देने 50 लाख रूपए का प्रावधान बजट में किया गया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की ओर से मानसरोवर यात्रा और सिंधु दर्शन यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को आर्थिक सहायता दी जाती है।
कृषि विभाग
श्री अग्रवाल ने कृषि विभाग की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है। इसलिए प्रदेश सरकार ने कृषि और किसानों की उन्नति के लिए विशेष प्रयास किए हैं। छत्तीसगढ़ की तेरह साल की उन्नति अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा देने का काम कर रही है। छत्तीसगढ़ को धान उत्पादन में तीन बार तथा दलहन उत्पादन में एक बार केन्द्र सरकार से कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के 94 प्रतिशत अर्थात 36 लाख 66 हजार किसानों को उनकी खेती की जमीनों का स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की योजना के अनुरूप छत्तीसगढ़ के किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से पिछले दो साल में राष्ट्रीय कृषि मेले के आयोजन की परम्परा शुरू हुई है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जैविक खेती मिशन शुरू किया गया है। मिशन के अंतर्गत प्रदेश के पांच जिले-दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और गरियाबंद को पूर्णतः जैविक खेती जिला बनाने की कार्य योजना पर अमल शुरू हो गया है। प्रदेश के शेष 22 जिलों के एक-एक विकासखण्डों को जैविक जिला बनाया जाएगा। इसके लिए कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की ओर से लगभग 574 करोड़ रूपए की पंचवर्षीय कार्य योजना बनाई गई है। इसी प्रकार राज्य के छह जिलों-सरगुजा, सूरजपुर, जशपुर, कोरिया, कोरबा, तथा दंतेवाड़ा जिले में 188 कलस्टर बनाकर 9400 एकड़ रकबे में पराम्परागत खेती विकास योजना के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2017-18 में इन जिलों में 98 नये कलस्टर बनाकर लगभग 4900 एकड़ क्षेत्र में इसका विस्तार किया जाएगा। इसके लिए 15 करोड़ 60 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है।
कृषि विभाग के अंतर्गत सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए शाकम्भरी योजना के अंतर्गत वर्ष 2017-18 में 40 करोड़ रूपए, लघुत्तम सिंचाई योजना के लिए 20 करोड़ रूपए तथा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए 25 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ में 150 नये कृषि सेवा केन्द्र खोलने के लिए आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में 15 करोड़ रूपए की व्यवस्था की गई है। वर्ष 2017-18 के बजट में किसानों को एक हजार 430 कृषि यंत्र कीट वितरित करने साढ़े पांच करोड़ रूपए की व्यवस्था की गई है। श्री अग्रवाल ने बताया कि किसानों को सूक्ष्य सिंचाई योजना के अंतर्गत स्प्रिंकलर, ड्रिप तथा शक्तिचलित यंत्रों के वितरण के लिए गुजरात पैटर्न लागू किया जाएगा। राज्य शासन के विशेष प्रयासों से छत्तीसगढ़ में विगत तेरह साल में उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में 422 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। प्रदेश में उद्यानिकी के किसानों को सुरक्षा मुहैया कराने उद्यानिकी फसलों के लिए मौसम आधारित फसल योजना लागू की गई है। प्रदेश में स्थापित चार शक्कर कारखानों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में पॉलीबैग से गन्ना पौधा तैयार करने की योजना बनाई गई है। इन चारों क्षेत्रों में 500-500 एकड़ में पौधे तैयार किए जाएंगे। किसानों की सुविधा के लिए पिछले साल 11 लाख 14 हजार 788 क्विंटल बीजों का उत्पादन किया गया। छत्तीसगढ़ बीज उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बन गया है। श्री अग्रवाल ने बताया कि फल-फूलों और सब्जियों का भण्डारण करने एक सौ छोटे कोल्ड स्टोरेज बनाए जाएंगे। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में किसानों ने पीपरमेंट की खेती शुरू की है। इसे प्रोत्साहित करने के लिए 40 लाख रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ में उन्नत तौर तरीके से खेती को बढ़ावा देने के लिए सेटेलाईट के माध्यम से बेसलाईन सर्वेक्षण कराया जाएगा। इसमें उद्यानिकी फसलों के लिए विशेष प्रावधान किया जाएगा। श्री अग्रवाल ने बताया कि जैव प्रौद्योगिकी उद्योगों की स्थापना एवं रोजगार को बढ़ावा देने जैव प्रौद्योगिकी पार्क स्थापित करने का निर्णय लिया है।
मंडी बोर्ड
श्री अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश के किसानों को उनकी उपज का बेहतर कीमत उपलब्ध कराने यहां की पांच मंडियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार व्यवस्था से जोड़ दिया गया है। नौ और मंडियों को इस व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। सात मंडियों में अनाजों को रखने 100 गोदाम बनाए जाएंगे। पत्थलगांव में नौ करोड़ रूपए की लागत से फल सब्जी मंडी शुरू की जाएगी। इसी प्रकार फल-फूलों और सब्जियों की खरीदी-बिक्री के लिए 100 स्थानों में हाट-बाजार खोले जाएंगे। राजधानी रायपुर की कृषि उपज मंडी की लगभग 25 एकड़ जमीन में मेला ग्राउण्ड बनाया जाएगा।
जल संसाधन
श्री अग्रवाल ने जल संसाधन विभाग की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा कि राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ में 13 लाख 28 हजार हेक्टेयर रकबे में सिंचाई होती थी। दिसम्बर 2016 की स्थिति में इसका रकबा बढ़कर 20 लाख तीन हजार हेक्टेयर हो गया है। सिंचाई का प्रतिशत 23 से बढ़कर 35 प्रतिशत हो गया है। श्री अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार ने वर्षों से अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को पूर्ण करने लक्ष्य भागीरथी अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत 106 परियोजनाओं का चयन किया गया है। इनमें से 86 योजनाओं को आगामी एक वर्ष के भीतर पूर्ण कर लिया जाएगा। विभिन्न योजनाओं के तहत अगले दो साल में दो लाख हेक्टेयर अतिरिक्त रकबे में सिंचाई क्षमता विकसित करने की कार्य योजना बनाई गई। केलो, हसदेव और अरपा-भैंसाझार सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने का विशेष कार्य योजना बनाई गई है। श्री अग्रवाल ने बताया कि खारंग-अहिरन लिंक परियोजना के लिए चार करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के फास्ट ट्रेक अंतर्गत कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन कार्य के अंतर्गत तीन वृहद परियोजनाओं केलो, खारंग और मनियारी जलाशय के लिए वर्ष 2017-18 के बजट में 200 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। श्री अग्रवाल ने बताया कि 176 करोड़ रूपए की लागत से सिरपुर-मोहमेला बैराज का निर्माण किया जाएगा।
श्री अग्रवाल ने जल ससांधन विभाग की नई योजनाओं के बारे में बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत वर्ष 2017-18 की बजट में 15 योजनाओं के लिए तीन करोड़ 30 लाख का बजट प्रावधान किया गया है। ए.आई.बी.पी. योजना के अंतर्गत राज्य की पांच अपूर्ण परियोजनाओं की नहर लाईनिंग व फील्ड चैनल का निर्माण वर्ष 2018 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। 15 सौर सूक्ष्म सिंचाई योजना के लिए दस करोड़ 55 लाख रूपए की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017-18 में माइक्रो एरिगेशन की चार तथा सौर सूक्ष्म सिंचाई की छह योजनाओं को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। एनीकटों से माइक्रो एरिगेशन सिस्टम के माध्यम से सिंचाई क्षमता बढ़ाने प्रदेश में विशेष रूप से प्रयास किया जा रहा है।
पशुधन विकास
श्री अग्रवाल ने बताया कि छत्तीगसढ़ में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए डेयरी उद्यमिता विकास योजना शुरू की गई है। योजना के अंतर्गत पिछले साल 700 डेयरियां स्वीकृत की गई है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 300 नई डेयरियां खोेलने का लक्ष्य रखा गया है। सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले पशुओं के इलाज के लिए 27 जिलों के लिए रेस्क्यू वाहन की व्यवस्था की जा रही है। छत्तीसगढ़ के सभी जिलों मंे पशुओं के लिए पशुधन बीमा योजना भी लागू की गई है। कामधेनू विश्वविद्यालय के अंतर्गत राजनांदगांव जिले में भी वेटनरी पॉलिटेक्निक खोला जाएगा। नारायणपुर और बीजापुर जिले में पशु रोग अनुसंधान केन्द्र खोलने की कार्ययोजना भी राज्य सरकार ने बनाई है। सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले पशुओं के इलाज में सुविधा के लिए शीघ्र ही टोल फ्री वाहन की सेवा शुरू की जाएगी।
मछली पालन
श्री अग्रवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य मछली बीज उत्पादन के मामले में आत्म निर्भर हो गया है। पिछले साल 152 करोड़ मछली बीज का उत्पादन किया गया। छत्तीसगढ़ से ओड़िशा और मध्यप्रदेश को भी मछली बीज भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि कांकेर में मत्स्य विकास केन्द्र खोलने वर्ष 2017-18 के बजट में 50 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। इसी तरह प्रदेश में पांच नई हेचरी और दस जिलों में आउटलेट सेंटर स्थापित किया जाएगा। नया रायपुर के जंगल सफारी में मछली घर खोलने की कोशिश की जाएगी।

 

क्रमांक-5995/राजेश

Date: 
20 Mar 2017